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इस साल दाल-रोटी के भी पड़ जाएंगे लाले!

Agricultureलखनऊ। सूखे से खरीफ की फसल (अरहर, तिल, उड़द) तो चौपट हुई ही, अब रबी की फसलों (गेहूं, सरसों, चना, मसूर, मटर) पर भी मौसम का ग्रहण लग गया है। पूरे यूपी में रबी की फसल की बुआई का रकबा इस बार 18 फीसदी घट गया है। इस साल प्रदेश में महज 82 फीसदी रकबे में ही रबी की फसलों की बुआई हुई है।

केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने भी शुक्रवार को कहा है कि इस समय मौसम में चल रही गर्मी गेहूं की फसल के लिए खतरा बन सकती है। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, लगातार दो साल के सूखे के बाद मिट्टी में नमी की कमी से पूरे देश में रबी की मुख्य फसल गेहूं की बुआई लक्ष्य से पीछे है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, ये न केवल यूपी बल्कि पूरे देश में अनाज संकट गहराने के आसार हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, चित्रकूटधाम मंडल में इस साल महज 19 फीसदी बुआई हुई है। इसमें भी गेहूं की बुआई तो महज 13 फीसदी ही हुई है। झांसी मंडल में बुआई 62 प्रतिशत पर अटकी., वहीं बुंदेलखंड में तो खेत के खेत खाली हैं। 2004 से लगातार पड़े सूखे के कारण किसान कर्ज से दबे हैं। इस साल नमी न मिलने के कारण वहां किसानों ने रबी की फसलें बोई ही नहीं।

पिछले साल रबी की फसलों के वक्त बेमौसम बारिश ने किसानों को तबाह कर दिया। उसके बाद खरीफ में सूखा पड़ गया। अब इस साल भी रबी की फसलों में मौसम साथ नहीं दे रहा है। सामान्य तौर पर रबी की देर से आने वाली फसलों की भी बुआई 25 दिसंबर तक हो जाती है। इस साल किसान इंतजार ही कर रहे हैं। यूपी सरकार की ओर से जारी 28 दिसंबर तक के आंकड़ों के अनुसार, तय लक्ष्य से 18 फीसदी कम बुआई हुई है। वहीं किसानों का दावा है कि प्रदेश भर में 40 फीसदी कम बुआई हुई है। इसके बाद भी मौसम ने साथ नहीं दिया तो जितनी बुआई हुई है, उतनी फसल बचेगी इसमें भी संशय है।

कहां से आएगा आटा

प्रदेश में इस साल कुल 99 लाख हेक्टेअर में गेहूं की बोआई का लक्ष्य रखा गया था। 28 दिसंबर तक 83.89 लाख हेक्टेअर में ही इसकी बुआई हुई है। इस तरह लगभग 15 लाख हेक्टेअर कम गेहूं बोया गया है। पिछले साल के बराबर ही लक्ष्य इस बार रखा गया था, लेकिन पिछले साल इस समय तक 94.08 लाख हेक्टेअर बुआई हो चुकी थी।

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दालों पर ज्यादा संकट

इस सीजन की दलहनी फसलों में चना, मटर और मसूर हैं। इनकी बुआई तो काफी कम है। चना 58 प्रतिशत बोया गया है , तो मटर 78 और मसूर सिर्फ 72 प्रतिशत। प्रदेश में इस साल अनाज की बुआई कुल 22 लाख हेक्टेअर घटी है।

सर्दी न पड़ने से होगा नुकसान

प्रदेश भर में अब जो फसल बोई गई है, उसके भी सूखने के आसार हैं। इसकी वजह है कि इस समय फसल को सर्दी की जरूरत होती है। शुरुआत में दाना पकने के लिए हल्का पाला जरूरी होता है। देर से बोई जाने वाली फसल को भी ठंडा मौसम और नमी चाहिए जो नहीं मिल रही। कृषि अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिक डॉक्टर विनोद तिवारी कहते हैं कि अब भी मौसम कुछ ठंडा हो जाए तो फसलों के लिए अच्छा रहेगा।

रबी की फसलों के लिए अगले दो-तीन दिन काफी महत्वपूर्ण हैं। अगर पुणे स्थित भारतीय मौसम विभाग की बारिश होने की भविष्यवाणी सही होती है तो अच्छा होगा। कृषि मंत्रालय व करनाल स्थित गेहूं शोध महानिदेशालय नजर रखे हुए है।

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