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पदोन्नति में आरक्षण बिल : सपा-बसपा की ताकत आंकना चाहेगी बीजेपी

नई दिल्ली। हाल में हुए दलित प्रदर्शनों के अलावा और पार्टी के भीतर से उठती विरोधी आवाजों से परेशान मोदी सरकार दलितों को पदोन्नति में आरक्षण देने के लिए अध्यादेश ला सकती है.

राजनीतिक तौर पर इस निर्णय से केंद्र सरकार यूपी में तेजी से विकसित हो रहे दलित-ओबीसी गठजोड़ की ताकत का पता भी लगा लेगी और सपा-बसपा गठजोड़ की थी. लंबे समय से अटके पड़े 117वें संविधान संशोधन बिल के जरिए दलित सेंटिमेंट्स को भी साधने की कोशिश की जा रही है.

सरकार का ये कदम उसकी सहयोगी पार्टी लोकजनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष के उस बयान के बाद आया है. ये बिल 2012 में यूपीए सरकार द्वारा संसद में लाया गया था.

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बिल का उद्देश्य उस समय सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद लाया गया था जिसमें कोर्ट ने यूपी सरकार के प्रमोशन में आरक्षण के फैसले पर रोक लगा दी थी. जब यूपीए सरकार 2012 में ये 117वां संविधान संशोधन बिल लेकर आई थी तो उस समय काफी विरोध का सामना करना पड़ा था. यहां तक कि यूपीए के भीतर से भी इसका विरोध हुआ था. समाजवादी पार्टी ने तो इसके लिए बाकायदा संसद से बाहर प्रदर्शन किया था.

यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार बने उस समय महज कुछ ही दिन हुए थे. उस पर इस बिल के विरोध के लिए कोई राजनीतिक दबाव नहीं था. लेकिन इस समय यूपी में राजनीतिक हालात बदले हुए हैं. अब यूपी में बीजेपी की सरकार है. सपा-बसपा के कार्यकर्ता साथ मिलकर एक नया गठजोड़ बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

हालिया स्थिति 2012 से बिल्कुल भिन्न है. ऐसे हालात में सरकार द्वारा अध्यादेश लाए जाने पर इन दलों की क्या प्रतिक्रिया होगी? दोनों दल मिलकर 2019 की लड़ाई की तैयारी कर रहे हैं. ऐसे में बीजेपी सरकार इन दोनों की ताकत का अंदाजा भी जरूर लगाना चाहेगी.