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UP में ब्यूरोक्रेसी पर नहीं चढ़ा केसरिया रंग!

नई दिल्ली/लखनऊ। यूपी में योगी सरकार के गठन को एक हफ्ता होने को आया है, लेकिन इस दौरान प्रशासनिक पदों पर पूर्व सरकार के समय तैनात अफसरों से ही काम चलाया जा रहा है। यहां तक कि शीर्ष पदों पर अब तक कोई नई तैनाती नहीं हो सकी है। इन पदों पर वे अधिकारी ही तैनात हैं, जिन पर विपक्ष में रहते हुए बीजेपी नेता एसपी कार्यकर्ता के रूप में काम करने का आरोप लगाते रहे हैं।

बदलाव न होने की वजह
बीजेपी के एक सीनियर लीडर के अनुसार यूपी में पिछले 15 साल से एसपी और बीएसपी की ही सरकार रही हैं। इससे यहां की ब्यूरोक्रेसी पर हरा और नीला रंग इतना चटख चढ़ चुका है कि उसमें किसी पर केसरिया रंग जल्दी चढ़ पाएगा, यह एक विचारणीय मुद्दा है। अब तक कोई ऐसा अफसर नहीं दिखा है, जिस पर थोड़ा बहुत भी केसरिया रंग नजर आ रहा हो। इस वजह से हड़बड़ी में कोई कदम उठाने की जगह बहुत फूंक-फूंक कर कदम उठाया जा रहा है।

यूपी कैडर के अफसरों पर नजर
दिल्ली में तैनात यूपी कैडर के अफसरों पर नजर है। बीजेपी की टॉप लीडरशिप भी यूपी में शीर्ष प्रशासनिक पदों पर ऐसे अफसरों की तैनाती चाहती है, जो विचारधारा के अनुरूप तो हों ही, साथ ही बेदाग छवि और सरकार के अजेंडे को हकीकत में तब्दील करने की कूवत रखते हों। इस वजह से चुनाव में और भी दिक्कत आ रही है। अखिलेश और इससे पहले मायावती सरकार पर नाकामी का ठीकरा फूटने के लिए बहुत हद तक ब्यूरोक्रेसी ही जिम्मेदार है। अखिलेश सरकार का आधा कार्यकाल एक ऐसे मुख्य सचिव के हवाले से कट गया, जो सुस्त रफ्तार से काम के लिए जाने गए और उनकी नजर रिक्त हो रहे मुख्य सुचना आयुक्त के पद पर लगी रही।

2 पालों में ब्यूरोक्रेसी
इसमें कोई शक नहीं कि पिछले 15 सालों के दौरान यूपी की ब्यूरोक्रेसी खुलकर एसपी-बीएसपी के पाले में बंटी नजर आई। ब्यूरोक्रेट्स भी खुद पर पार्टी विशेष की मुहर लगवाने के लिए बेताब रहे। उन्हें लगता था कि मुहर लगी रहने की वजह से यह फायदा होगा कि उनकी पार्टी की सरकार में उन्हें प्राइम पोस्टिंग मिलेगी और रिटायरमेंट के बाद भी किसी संवैधानिक संस्था में मनोनयन हो जाएगा। ऐसा होता भी रहा है। शायद यही वजह रही कि मायावती सरकार में कैबिनेट सेक्रटरी और होम सेक्रटरी जैसे अहम पदों पर बैठे अफसरों ने पार्टी से जुड़े मसलों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने में हिचक नहीं दिखाई तो मुलायम सरकार में मुख्य सचिव के पद पर तैनात अफसरों ने एसपी पार्टी ऑफिस में आयोजित कार्यक्रम में न केवल शिरकत की, बल्कि मुलायम की तारीफ में शेरो-शायरी कर पार्टी नेताओं को पीछे छोड़ दिया था।

यह सूरत-ए-हाल न हो
बीजेपी लीडरशिप चाहती है कि जिन वजहों से समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी को बदनामी मिली, वह सूरत-ए-हाल उनकी सरकार का न हो, इस वजह से ऐसे अफसरों से दूरी बना कर चलने की बात हो रही है।