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सपा में फिर संग्राम , सत्ता से फुटपाथ पर आए शिवपाल बोले-PWD मंत्री बनाओ तो अखिलेश ने ठुकराया, कहा-PWD छोड़ कोई भी मिनिस्ट्री चाचा ले लें

akhilesh-shivpalलखनऊ। समाजवादी पार्टी में प्रो. रामगोपाल की वापसी के साथ फिर से घमासान शुरू हो गया है। अखिलेश यादव के समर्थक जिन युवा नेताओं को शिवपाल ने पार्टी से निकाला, उनसे माफीनामा लिखवाकर फिर से पार्टी में शामिल करने की सुगबुगाहट के बीच शिवपाल यादव ने भी शर्त रख दी है। यह शर्त है खुद को फिर से पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर बनाए जाने का। मंत्री पद जाते ही रौब-रुतबा छिन जाने से शिवपाल को सत्ता से फुटपाथ पर आने का अहसास हो रहा है। मगर अब यह अहसास ज्यादा समय तक बर्दाश्त नहीं करने के मूड में हैं। कहा जा रहा है कि जाते-जाते चुनावी बेला में मलाई काटने की गरज से दोबारा मंत्री बनने की जब शिवपाल ने इच्छा जताई तो सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने भी सहमति जाहिर करते हुए अखिलेश यादव से बात की। मगर अखिलेश ने पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर बनाने से साफ मना कर दिया।

पार्टी के सूत्र बताते हैं कि जब सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश से शिवपाल को फिर से पीडब्ल्यूडी मंत्री बनाने को कहा तो अखिलेश ने कहा कि इस मालदार महकमे को छोड़कर वह कोई दूसरा विभाग ले सकते हैं। एक बार हटाकर फिर से वही विभाग देने से आम जन में गलत संदेश जाएगा।

पिछले हफ्ते शिवपाल यादव अपने जसवंतनगर विधानसभा के ताखा ब्लाक में एएस डिग्री कॉलेज परिसर में सहाकारिता विभाग के एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। यह कार्यक्रम उनके चेयरमैन बेटे आदित्य यादव की ओर से किया गया था। इस दौरान उन्होंने बातों ही बातों में अपने दिल की टीस उजागर कर दी। अपना दर्द करीबियों से साझा किया। जिसके बाद उनके करीबियों ने कहा कि जब रामगोपाल समेत उनके सभी विरोधी पार्टी में वापस हो रहे हैं तो आप भी मुलायम से कहकर मंत्री पद क्यों नहीं लेते। अभी छह महीने मौका है, कौन जानता है कि आगे सरकार बने या न बने। यह बात शिवपाल को जम गई और उन्होंने बड़े भाई मुलायम से मुलाकात कर फिर से मंत्री बनने की हसरत जाहिर की तो मुलायम ने भी अखिलेश से देख लेने को कहा। मगर अखिलेश ने फिर से चाचा के रास्ते में अड़ंगा डाल दिया।

मंत्री पद जाते ही शिवपाल यादव मानो सत्ता से फुटपाथ पर आ गए हैं। कभी अपने इलाके जसवंतनगर हो या सूबे में कहीं भी शिवपाल कदम रखते थे तो डीएम-एसपी समेत पूरा अमला सेवा में हाजिर हो जाता था। आज आलम है कि उनके ही विधानसक्षा क्षेत्र में जाने पर कोई अफसर नहीं दिखता है। केवल उनके वही करीबी अगुवाई करने आते हैं, जिनको वे अपने कार्यकाल में उपकृत कर चुके हैं। कहा जा रहा है कि यही वजह है कि सत्ता का कार्यकाल बीतते-बीतते शिवपाल यादव कुछ और समय मंत्री बनने की कोशिश कर रहे हैं।

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शिवपाल के फिर से नाराज होने से सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव चिंतित नजर आ रहे हैं। वजह कि शिवपाल यादव इस समय प्रदेश अध्यक्ष हैं। जाहिर सी बात है कि टिकट वितरण में टांग अड़ाने लगेंगे।

जिससे अखिलेश यादव से फिर टकराव बढ़ेगी। लिहाजा चुनाव सिर पर होने से फिर विवाद पैदा होने पर पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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