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सब कुछ देकर भी “नेता जी” ने छीन लिया “सबकुछ”, और लाचार “शिवपाल” देखते रह गये “मुलायम” के हर “दांव” को

mulayam-shivpal-akjileshलखनऊ। समाजवादी पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने प्रो रामगोपाल यादव का निष्कासन रद्द कर उनकी घर वापसी कराकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी और परिवार में सब कुछ ठीक है. लेकिन पार्टी और परिवार मे अधिकार और वर्चस्व की लड़ाई आने वाले दिनों में कौन सा गुल खिलाती है, पेश है इस पर खास रिपोर्ट

सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने रामगोपाल यादव को सभी आरोपों से बरी करते हुए उनकी घर वापसी करा दी है. फिलहाल मुलायम ने एक बार फिर टैम्परेरी सीजफायर करा दिया है. इस पूरे फैमिली ड्रामे को मायावती ने लीपापोती का नाम दिया है, जबकि भाजपा ने इसे राजनीतिक ड्रामा बताया है.

वहीं सपा के नेताओं का दावा है कि सपा में सब कुछ ठीक है. क्या वाकई में पार्टी और परिवार में ऑल इज वेल की स्थिति है? इस पर अभी भी सवाल बने हुए हैं. पहला सवाल है क्या रामगोपाल की वापसी के बाद शिवपाल की भी मंत्रिमंडल में वापसी होगी? क्योंकी अखिलेश ने सख्त तेवर में कहा था कि जब तक रामगोपाल की पार्टी में वापसी नहीं होगी शिवपाल की मंत्रिमंडल में वापस नहीं करेंगे. दूसरा यह कि क्या अखिलेश से छीने गए उनके अधिकार वापस दिये जाएंगे?

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आने वाले दिनों में लगता है कि उत्तर प्रदेश की सबसे प्रतिष्ठित लड़ाई कोई निर्णायक मोड़ ले ले क्योंकि जिस तरह से एक-एक करके अखिलेश की बातें मानी जा रही हैं उससे पार्टी में उनकी छवि सुप्रीम बॉस की और शिवपाल की स्थिति काफी हद तक बहुत कमजोर हुई है. संभव है कि शिवपाल अपने वर्चस्व की लड़ाई को लेकर कभी भी मोर्चा खोल कर सामने आ जाएं. पार्टी में भले ही सभी यह दिखाने की कोशिश करें कि सब कुछ ठीक है पर अंदर ही अंदर परिवार अभी भी दो खेमों में बंटा नजर आ रहा है

रामगोपाल की घर वापसी के बाद सपा के सारे नेता गा रहे हैं की आल इज वेल. पर अहम और वहम की लड़ाई में रोज एक सवाल शांत होता नहीं कि दूसरा खड़ा हो जाता है. ऐसे में कैसे उम्मीद की जा सकती है कि परिवार में वाकई सब कुछ ठीक ठाक चल रहा है.

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