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22 अफसरों पर कार्रवाई, एक निलंबित, लखनऊ सीएमओ भी नपे

malariaलखनऊ। यूपी में डेंगू से सैकड़ों मौतें हुई। इन मौतों के जिम्मेदार वो स्वास्थ्य अफसर थे जिन्होंने मच्छरजनित बीमारियों से रोकथाम के लिए आया बजट खर्चा ही नहीं किया। जब हाईकोर्ट ने शिकंजा कसा तो सरकार ने तत्काल जांच कराई और इन अफसरों को कारण बताओ नोटिस जारी किया लेकिन अब सरकार ने इन अफसरों के खिलाफ कार्रवाई का पूरा ब्यौरा हाईकोर्ट को बुधवार को सौप दिया।

हालाँकि डीजी हेल्थ की मेहरबानी से अभी तक मलेरिया अफसरों पर कोई भी कार्रवाई नहीं हो सकी है लेकिन दोषी अफसरों को तत्काल महत्वपूर्ण पदों से हटा देना चाहिए। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य अरुण कुमार सिन्हा की और से कुल 22 अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौपी गयी है। रिपोर्ट के मुताबिक तत्कालीन संयुक्त निदेशक एमके गुप्ता को निलम्बित कर दिया गया है। कार्रवाई में शामिल एक अफसर आयुष का भी है ।

चार रिटायर सीएमओ के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई के आदेश दे दिए गए हैं। वहीं कई 14 सीएमओ को परिनिन्दा के तौर पर अनुशासनिक कार्रवाई की गयी है  जिनमे मौजूदा सीएमओ गोंडा अमर सिंह कुशवाहा, सीएमओ रायबरेली राकेश कुमार सीएमओ बरेली विजय कुमार यादव सीएमओ औरैया एसबी मिश्र सीएमओ एटा रमेश चंद्र पांडेय सीएमओ झांसी विनोद कुमार यादव और सीएमओ सीतापुर हरगोविंद सिंह शामिल हैं जो मौजूदा सीएमओ है और इनके खिलाफ परिनिन्दा प्रविष्टि जारी की गयी है इसी तरह इस सूची में सात तत्कालीन सीएमओ भी शामिल हैं जिनमे तत्कालीन सीएमओ कौशाम्बी उदयभान सिंह सीएमओ श्रावस्ती  आशीष दस सीमा सीएमओ कासगंज  विपेंद्र कुमार सिंह सीएमओ बदायू सूर्य प्रकाश अग्रवाल सीएमओ बागपत रमेश चन्द्र सीएमओ आजमगढ़ विक्रम बहादुर सिंह सीएमओ सीतापुर आरके पोरवाल को भी परिनिन्दा दी गयी है ये सभी तत्कालीन सीएमओ उन जनपदों के रहे हैं जहाँ डेंगू से बचाव के लिए आये करोड़ों रूपए यूँ ही कूड़े के ढेर में पड़े रहे।

वहीं निलम्बित तत्कालीन संयुक्त निदेशक एमके गुप्ता के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी होगी। इसी तरह जिलों में तत्कालीन  सीएमओ बागपत आरमिश्र तत्कालीन  सीएमओ हाथरस  रामवीर सिंह तत्कालीन सीएमओ कासगंज सत्या सिंह के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद यूपी के ताकतवर सीएमओ की सूची में शुमार कई रिटायर भ्रष्टों को भी शासन ने नहीं बक्शा है जिनमे सबसे पहला नाम लखनऊ में सीएमओ के पद पर बरसों से कब्जा जमाये रिटायर एसएनएस यादव भी शामिल है जिनके खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई के आदेश जारी किये गए हैं। डाॅ. यादव के ऊपर करोड़ों के घोटालों के संगीन आरोप भी है।

इसी तरह रिटायर सीएमओ चित्रकूट रहे डाॅ. वेदप्रकाश, रिटायर सीएमओ मुजफ्फरनगर रहे डाॅ. एसके त्यागी और नोएडा से रिटायर सीएमओ डाॅ. आरके गर्ग के खिलाफ भी शासन ने विभागीय कार्रवाई के आदेश जारी किये गए हैं। डाॅ. गर्ग दागी आईएएस संजय अग्रवाल के बेहद करीबी है और इनके ऊपर भी भ्रष्टाचार के संगीन आरोप हैं। शासन ने ये गोपनीय रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौपकर इन अफसरों के ऊपर कार्रवाई का पूरा ब्यौरा दिया है लेकिन जांच में दोषी मिले इन अफसरों को तत्काल पद से भी हटा देना चाहिए।

शासन ने एनएचएम एमडी आलोक कुमार कुमार को 18 अक्टूबर को  आननफानन में जांच सौंपते हुए दोषी अफसरों का पता लगाने के निर्देश दिए गए  थे साथ ही जिलों को एनएचएम के तहत कितना पैसा दिया गया और कितना खर्च हुआ इसकी भी आख्या सौंपने को कहा था। बेहद तेज तर्रार व साफ छवि के एनएचएम एमडी आलोक कुमार ने तत्काल जांच की और शासन को 20 अक्टूबर को अपनी रिपोर्ट सौप दी।

जांच में साफ हुआ कि 2013-2014 में आये 24 करोड़ में से 13 करोड़ ही खर्च किये गए। वहीं 2014-2015 में आये 36 करोड़ में से अफसरों ने 15 करोड़ ही खर्चे लेकिन सबसे चैंकाने वाला आंकड़ा तो 2015-2016 का रहा, जहाँ अफसरों ने 54 करोड़ में से 11 करोड़ ही मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम में खर्चे। 2013-2014 के तत्कालीन 15 अफसर, 2014-2015 के 15 अफसर व् 2015-2016 के दौरान तैनात रहे 18 स्वास्थ्य अफसर इस बड़ी कार्रवाई के घेरे में हैं

कुछ अफसरों को बख्शा जा रहा है जो मौतों के असली जिम्मेदार हैं इनमे सबसे पहला नाम मलेरिया अफसरों के हैं। जिनको बचाने का श्रेय सीधे स्वास्थ्य महानिदेशक डाॅ. सुनील श्रीवास्तव को जाता है। एनएचएम एमडी की रिपोर्ट में साफ दिया  था  कि कई जिलों के अफसरों ने आये बजट का दस फीसदी हिस्सा भी नहीं खर्चा था। जिनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गयी।

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कुल 48 अफसरों को रिपोर्ट में दोषी ठहराया गया है इन अफसरों में इन तीन वर्षों के दौरान तैनात रहे डीजी हेल्थ, जिलों के सीएमओ समेत अपर निदेशक मलेरिया और जिला मलेरिया अधिकारियों से लेकर निदेशक कम्युनिकेबल डीजीज शामिल हैं। लेकिन एनएचएम एमडी की इस रिपोर्ट के बावजूद असली दोषियों के खिलाफ अभी कोई कार्रवाई नहीं की गयी। जिसमे सबसे पहला नंबर जिलों के  मलेरिया अफसरों, अपर निदेशक मलेरिया व्  निदेशक कम्युनिकेबल डीजीज का आता है लेकिन हद तो तब हो गयी जब स्वास्थ्य महानिदेशक सुनील श्रीवास्तव ने अभी तक इन अफसरों से कोई स्पष्टीकरण माँगा ही नहीं।

एनएचएम एमडी की जिस रिपोर्ट के ऊपर सरकार ने 48 अफसरों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन हाईकोर्ट को दिया था, वो रिपोर्ट तो जैसे कूड़े के ढेर में ही फेंक दी गयी है। जिसके प्रमुख जिम्मेदार स्वास्थ्य महानिदेशक डाॅ. सुनील कुमार है जब सीएमओ से स्पष्टीकरण माँगा गया तो आखिर मलेरिया अफसरों को क्यों बख्श दिया गया। सूत्रों के मुताबिक स्वास्थ्य महानिदेशक खुद अपने अफसरों के खिलाफ कार्रवाही से आक्रोशित हैं तभी अभी स्पष्टीकरण तक नहीं माँगा गया। ऐसे में हाईकोर्ट को तत्काल ऐसे अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए ये सभी अफसर अभी विभाग में मलाईदार पदों पर कब्जा जमाये बैठे हैं।

हाईकोर्ट की लखनऊ खंड पीठ डेंगू-चिकनगुनिया मामले में सरकार सहित अन्य सम्बंधित विभागों की कार्यवाही से संतुष्ट नहीं है। अदालत ने कहा कि इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों ने घोर लापरवाही की है। अभी तक इलाज व रोकथाम के लिए की गई कार्यवाही पर्याप्त नहीं है यह आदेश न्यायमूर्ति अमरेश्वर प्रताप शाही व न्यायमूर्ति देवेन्द्र कुमार उपाध्याय की खंडपीठ ने यह आदेश स्थानीय अधिवक्ता एमपी सिंह व एक अन्य की जनहित याचिका पर दिए हैं।

सुनवाई के समय राज्य सरकार की ओर से मुख्य सचिव द्वारा पेश किये गएहलफनामे में कहा गया कि डेंगू को महामारी घोषित करने का कैबिनेट का फैसला आठ नवंबर को किया जा चुका है। नौ नवम्बर को गजट के लिए भेज दिया गया है। सरकारी वकील ने अदालत को यह भी बताया कि लापरवाही करने वाले 14 अधिकारियों व अन्य कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है। यह भी कहा कि टास्क फोर्स भी मीटिंग कर कार्यवाही कर रही है।

अदालत ने कहा कि इतने बड़े मामले में इस प्रकार की लचर कार्यवाही पर्याप्त नहीं है। कहा कि जहां सैकड़ों लोगों की जान चली गई और अभी भी बीमारी पर नियंत्रण नहीं किया गया है । अदालत ने कहा कि सरकार व विभागों द्वारा की गयी कार्यवाही अपर्याप्त है। याची की ओर से आरोप लगाया गया कि अभी तक नोटिफिकेशन का गजट जारी नहीं किया गया है और अधिकारियों ने मामले में घोर लापरवाही की है।

यह भी कहा गया कि लखनऊ में सरकारी प्रेस है फिर भी अब तक गजट जारी नहीं किया गया। यह भी कहा कि अभी तक कुछ ही लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही की गई है सुनवाई के समय प्रमुख सचिव स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा, जल निगम के अधिकारी उपस्थित हुए । विदित हो कि डेंगू- चिकनगुनिया से लखनऊ समेत प्रदेश में सैकड़ों मौतें हुईं है। यह भी आरोप लगाया गया कि अभी तक राज्य सरकार व संबंधित विभागों की ओर से उचित कार्यवाही नहीं हो रही है ।

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