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लॉ कमिशन के 16 सवालों की लिस्ट फरेब है, सवाल एकतरफा हैं: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

8दिल्ली। यूनिफॉर्म सिविल कोड बनाने के लिए लॉ कमिशन ने आम नागरिकों की राय मांगी है। ट्रिपल तलाक जैसी महिला विरोधी प्रथाओं और कुरीतियों को खत्म करने के लिए आम लोगों से राय लेने का फैसला लिया गया है लेकिन मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (MPLB) इसे सही नहीं मानता। MPLB का कहना है कि समान नागरिक संहिता इस देश के लिए अच्छा फैसला नहीं है। इस देश में कई धर्मों और संस्कृतियों के लोग रहते हैं और हमें उन्हे सम्मान देना चाहिए।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस जारी कर कहा कि लॉ कमिशन के 16 सवालों की लिस्ट धोखाधड़ी है। इसमें मौजूद सवाल एकतरफा हैं। यूनिफॉर्म सिविल कोड इस देश में संभव नहीं है। बोर्ड का कहना है कि मुस्लिमों ने भी इस देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी है लेकिन उनकी भागीदारी को हमेशा नजरअंदाज कर दिया जाता है। इस देश का संविधान हमें अपने धर्म को मानने की छूट देता है।

बोर्ड ने सवाल किया कि अमेरिका में हर कोई पर्सनल लॉ का अनुसरण करता है फिर हमारा देश ऐसा क्यों नहीं करना चाहता? दरअसल, लॉ कमिशन ने 16 सवालों की एक लिस्ट तैयार की है जिस पर लोगों के जवाब इकट्ठे किए जाएंगे। इन सवालों में बहुविवाह के प्रचलन को खत्म करने से संबंधित बात को भी शामिल किया गया है। मुसलमानों में पुरुष को चार शादियां करने की छूट है। इस संबंध में कमिशन का सवाल है कि क्या इस छूट को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाए या फिर इस पर किसी तरह की लगाम लगाई जाए। साथ ही, एक और महत्वपूर्ण प्रचलन है मैत्री करार का, इसे भी सूची में शामिल किया गया है। मैत्री करार कानूनी रूप से अवैध है, फिर भी गुजरात में यह काफी प्रचलन में है। इसके तहत एक शादीशुदा हिंदू पुरुष स्टैंप पेपर पर दोस्ती का करार करके अन्य महिला को साथ रहने के लिए घर ले आता है।

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इन सवालों की लिस्ट में हिंदू महिलाओं के संपत्ति के अधिकार को भी जगह दी गई है। आयोग ने जनता से सुझाव मांगे हैं कि किस तरह हिंदू महिलाओं के इस अधिकार को सुनिश्चित किया जा सके। फिलहाल स्थापित प्रचलन के मुताबिक बेटे ही इसके हकदार मान लिए जाते हैं।

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