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सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत सामरिक दृष्टि से अहम, जारी करना बड़ी लापरवाही!

surgical-strike06नई दिल्ली। सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत सार्वजनिक किए जाने की मांगों के बीच सरकार ने ये साक्ष्य जारी नहीं करने का फैसला किया है। जानकारी के मुताबिक, सरकार को लगता है कि ऐसा करना बड़ी लापरवाही होगी। सरकार के वरिष्ठ सूत्रों ने बताया कि इस ऑपरेशन से जुड़े विडियो, तस्वीरें और इन्फ्रारेड फोटो को जारी करना बड़ी असावधानी होगी। केंद्र का मानना है कि इससे ऑपरेशन की जानकारियां और आतंकी लॉन्च पैड्स के पास जाने के लिए सेना द्वारा इस्तेमाल किए गए साधनों से जुड़ी जरूरी जानकारियां भी सार्वजनिक हो जाएंगी।

बताया जा रहा है कि सेना ने जिन आतंकी लॉन्च पैड्स को निशाना बनाया, उनमें से कम-से-कम 2 ऐसे हैं जो कि नियंत्रण रेखा के पार पाकिस्तानी सेना की पॉजिशन के साथ बने हुए थे। एक सूत्र ने बताया, ‘सबूत जारी करना या फिर इन्हें कुछ चुने हुए लोगों के सामने पेश करने का फैसला सर्वोच्च नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा, बशर्ते ऐसा करने की जरूरत महसूस की जाए।’ फिलहाल तो रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल और सेना प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग सहित कई अन्य लोग सबूत सार्वजनिक नहीं किए जाने के पक्ष में हैं।

सेना की सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान ली गईं तस्वीरें, इन्फ्रारेड फोटो और विडियो कई तरीके से कैद किए गए। इसके लिए कमांडोज के हेल्मेट में लगे कैमरा के अलावा जासूसी ड्रोन्स की भी मदद ली गई। सूत्र ने बताया, ‘फटॉग्रफिक सबूतों में धमाकों, धुएं के गुबार और लॉन्च पैड्स में बनी झोपड़ियों को तबाह होते हुए देखा जा सकता है।’
सूत्र ने आगे बताया, ‘ऑपरेशन में कितने आतंकी और पाकिस्तानी सेना के जवान मारे गए, इसका जवाब देना मुमकिन नहीं है। हमारे कमांडोज वहां लाशों को गिनने के लिए नहीं रुके थे। हां, इतना जरूर कहा जा सकता है कि मारे गए लोगों की संख्या खासी थी। पाकिस्तान ने 29 सितंबर को खुद माना था कि उसके 2 सैनिक मारे गए हैं और 9 घायल हुए हैं। हालांकि उसने यह भी कहा कि इन लोगों की मौत सीमा-पार से हुई गोलीबारी में हुई।’

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पाकिस्तान ने लगातार भारत द्वारा सर्जिकल स्ट्राइक किए जाने का खंडन किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा करने से पाकिस्तान के पास जवाबी कार्रवाई के विकल्प काफी सीमित हो जाते हैं और यह भारत के हित में भी है। भारत तनाव को बढ़ाकर युद्द की स्थिति तैयार करने की जगह सीमित और कारगर कार्रवाई के पक्ष में है। हालांकि इस घटना के बाद से ही भारत और पाकिस्तान सीमा पर अपनी-अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिशों में लगे हैं। अतिरिक्त फौज, गोला-बारूद और हथियार सीमा के नजदीकी सैन्य ठिकानों पर भेजे जा रहे हैं।

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