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लाइव टीवी शो में ‘मॉडर्न’ इमाम पर चला जूता, मारपीट

egyptकाहिरा। सिडनी के एक इमाम पर यहां एक टॉक शो के दौरान उनके साथी पैनलिस्ट ने जूता फेंककर हमला किया। यह हादसा लाइव टीवी शो के दौरान हुआ। मुस्तफा राशिद नाम के यह इमाम स्टूडियो में ‘मुस्लिम महिलाओं द्वारा सिर पर स्कार्फ बांधा जाना चाहिए या नहीं’, विषय पर बहस कर रहे थे। इसी दौरान पैनल में शामिल मिस्र के एक वकील नबीह-अल-वहशा ने अपना जूता निकाला और मुस्तफा के सिर पर जूते से वार करने की कोशिश की।

मालूम हो कि मुस्तफा इस्लाम से जुड़े मसलों पर अपने आधुनिक नजरिए के कारण अक्सर ही कट्टरपंथियों के निशाने पर रहते हैं। इससे पहले जब उन्होंने यह कहा था कि मुस्लिम महिलाओं को बुर्का नहीं पहनना चाहिए, तब भी उनका काफी विरोध हुआ था। मुस्तफा का वह बयान कि इस्लाम में शराब पर मनाही नहीं है, भी काफी विवाद में रहा था।

 टॉक शो में मुस्तफा ने मुस्लिम महिलाओं द्वारा सिर ढकने को लेकर जो विचार रखे, उससे नबीह को गुस्सा आ गया। जब यह हादसा हुआ, तब स्टूडियो से इस वार्ता का लाइव प्रसारण किया जा रहा था। पूरी घटना को लोगों ने लाइव देखा। विडियो में दिख रहा है कि कार्यक्रम के दौरान मुस्तफा और नबीह में तल्ख बहस हो रही है। इसी बहस के दौरान नबीह ने अपने दाहिने पैर का जूता निकाला और उसे मुस्तफा की ओर फेंक दिया। खुद को बचाने की कोशिश में मुस्तफा ने पलटवार किया। कार्यक्रम के होस्ट मुहम्मद अल-घाइति और प्रॉडक्शन टीम के कई सदस्य दोनों के बीच बीचबचाव की कोशिश करते हुए दिखे।

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हादसे के फौरन बाद मुस्तफा स्टूडियो से निकल गए। इस पूरी वारदात में एक क्रू सदस्य घायल हआ। जानकारी के मुताबिक, मुस्तफा और नबीह को चोट नहीं आई है। टॉक शो के होस्ट ने बाद में अपने दर्शकों से इस पूरी घटना के लिए माफी मांगी। उन्होंने कहा, ‘स्टूडियो के बीच यह लड़ाई हुई। मैंने कभी कल्पना नहीं की थी कि लाइव कार्यक्रम के दौरान ऐसी घटना भी हो सकती है।’ मुस्तफा साल 2013 में मिस्र से ऑस्ट्रेलिया चले गए थे। अपने आधुनिक नजरिए के कारण कट्टरपंथी और पारंपरिक विचारों वाले धड़े में उन्हें काफी विरोध का सामना करना पड़ता है। 2014 में मुस्तफा ने एक फतवा निकाल कर कहा था कि बुर्का ‘मुस्लिम महिलाओं के लिए अनिवार्य’ नहीं है। मुस्तफा का यह भी कहना है कि कुराण किसी पर भी बुर्का पहनने के लिए दबाव नहीं डालता।

मुस्तफा पेशे से शरिया कानूनों के प्रफेसर हैं। पिछले साल जब उन्होंने यह कहा कि कुराण में शराब पीने पर कोई मनाही नहीं है, तब भी उनकी जमकर आलोचना हुई थी। मुस्तफा का कहना था कि कुराण में हालांकि शराब के नशे में धुत्त होने की मनाही है, लेकिन थोड़ी-बहुत शराब पीने को लेकर निषेध नहीं है।

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