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सिंधु समझौता उल्लंघन युद्ध के लिए उकसाने के तौर पर लिया जाएगा: पाक

pak-armyनई दिल्ली। पाकिस्तान ने आज भारत को चेतावनी दी कि 56 साल पुराने सिंधु जल समक्षौता को एकतरफा तौर पर रदद करने को युद्ध के लिए उकसाने के रूप में लिया जाएगा। साथ ही, उनका मुल्क संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) का भी रूख कर सकता है। पाकिस्तान के शीर्ष राजनयिक सरताज अजीज ने यहां कहा, दो देशों के बीच अब तक हुआ यह सबसे सफल जल समक्षौता है। इसे रदद किए जाने को पाकिस्तान के खिलाफ शत्रुतापूर्ण कार्रवाई के तौर पर लिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यदि भारत समक्षौता निलंबित करता है तो पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का भी रूख करेगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस मसले पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचने पर विचार कर रहा है। पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार अजीज ने इस मुददे पर नेशनल एसेंबली में कहा, अंतरराष्ट्रीय कानून बताते हैं कि भारत एकतरफा तरीके से इस समक्षौते से खुद को अलग नहीं कर सकता।

उन्होंने कहा कि समक्षौते को एकतरफा तौर पर रदद करना पाकिस्तान और इसकी अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी होगी। उन्होंने कहा कि यदि भारत समक्षौते का उल्लंघन करेगा तो पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का रूख कर सकता है। अजीज ने कहा, इस भारतीय कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय शांति के उल्लंघन के तौर पर लिया जा सकता है और इस तरह पाकिस्तान एक अच्छी वजह को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का रूख कर सकता है। उन्होंने कहा कि इस समक्षौता को करगिल और सियाचिन युद्ध के समय भी निलंबित नहीं किया गया। उन्होंने साथ ही कहा कि यदि भारत की ओर बहने वाली नदियों का प्रवाह चीन रोक देता है तो इसका नुकसान उसे उठाना पड़ सकता है।

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गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 56 साल पुराने सिंधु जल समक्षौते की एक समीक्षा बैठक की कल अध्यक्षता की थी जिसमें यह फैसला किया गया कि भारत क्षेलम सहित पाकिस्तान नियंत्रित नदियों के जल बंटवारा समक्षौते के मुताबिक इन नदियों के जल का अधिकतम दोहन करेगा।

उरी हमले में 18 सैनिकों के शहीद होने के बाद पाकिस्तान पर पलटवार करने के भारत के पास विकल्पों की तलाश करने के मददेनजर यह बैठक हुई। हमले के बाद यह मांग की जाने लगी कि सरकार पाकिस्तान पर दबाव बनाने के लिए जल बंटवारा समक्षौता को रदद कर दे। समक्षौते के तहत व्यास, रावी, सतलुज, सिंधु, चेनाब और क्षेलम़़, छह नदियों के पानी का दोनों देशों में बंटवारा होना था। इस संधि पर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने सितंबर 1960 में हस्ताक्षर किये थे। पाकिस्तान पर्याप्त पानी नहीं मिलने की शिकायत करता रहा है और कुछ मामलों मंे अंतरराष्ट्रीय पंचाट के पास गया है।

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