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भारत के पास हैं 7 ऐसे हथियार, जाे मिनटों में पाकिस्तान को दे सकते है मात

हर्षवर्धन शर्मा (रोमिंग एडिटर दिल्ली)
INS विक्रमादित्य यह समंदर पर चलता-फिरता अभेद्य किला है, जाेकि 283.5 मीटर लंबा, 20 मंजिला ऊंचा और 44,500 टन भारी है। 30 लड़ाकू जहाज ले जाने की क्षमता से लैस विक्रमादित्य पर 6 कोमोव-31 हेलीकॉप्टर भी तैनात रहते हैं, जो इसे पनडुब्बी हमले से भी बचा सकते हैं। विक्रमादित्य 6 नली वाली AK-630 तोप से लैस है। जमीन से हवा पर मार करने वाली बराक मिसाइल इसे दुश्मन के लड़ाकू जहाज से बचाएंगे। अपने रडार प्रणाली से यह अपने चारो तरफ 500 किलोमीटर के इलाके पर वार कर सकता है। यह 56 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से युद्धक्षेत्र तक पहुंच सकता है। इस पर 6 डीजल जनरेटर लगे हैं, जिससे 18 मेगावॉट बिजली मिलती है। इस पर एक वक्त में 1600 से 1800 नौसैनिक मौजूद रहते हैं।
सुखोई- 30 MKI दुनिया के सबसे तेज फाइटर प्लेन में से एक सुखोई हवा में ही फ्यूल भरने की क्षमता रखता है। यह 1350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दुश्मनों पर वार कर सकता है। इसका वजन 4600 किलोग्राम और लंबाई 8.56 मीटर है। यह एक बार उड़ान भरने के बाद 8,000 किलो तक के हथियार लेकर 5200 किमी तक उड़ान भर सकता है। इसमें ब्रह्मोस मिसाइल रखने की भी क्षमता है।
INS अरिहंत इसमें 12 शॉर्ट रेंज k-15 मिसाइल और 4 लंबी दूरी की k-4 बैलिस्टिक मिसाइल तैनात की जा सकती है। यह पानी के अंदर, जमीन और हवा से परमाणु हमला करने में सक्षम है और 700 से लेकर 3500 किमी तक मार कर सकती है। यह 6 हजार टन वजनी न्यूक्लियर सबमरीन है।
ब्रह्मोस यह देश का सबसे मॉडर्न और दुनिया का सबसे तेज क्रूज मिसाइल है। दुनिया का कोई भी मिसाइल इस मामले में इसके आगे कम है। यह न्यूक्लियर वॉर हेड तकनीक से लैस है और 290 किमी दूरी तक को लक्ष्य कर वार कर सकता है। इसे दागे जाने के बाद यदि लक्ष्य रास्ता बदल ले तो यह मिसाइल भी अपना रास्ता बदल लेती है और निशाना साधती है।
अग्नि-1 इसकी मारक क्षमता 700 किमी है और 9 मिनट 36 सेकेंड में अपने लक्ष्य को भेद सकता है। यह 15 मीटर लंबा है, जबकि इसका वजन 12 टन है। यह एक टन से ज्यादा वजनी पे-लोड ले जाने की क्षमता रखता है। इसमें अत्याधुनिक नौवहन प्रणाली लगाई गई है जो यह सुनिश्चित करती है कि यह पूरी सटीकता से लक्ष्य तक पहुंच रहा है। इसकी मारक दूरी को पेलोड कम करके बढ़ाया जा सकता है।
C-130 j हरक्यूलिस यह खराब मौसम में उड़ान भरने के साथ लैंडिंग कर सकता है। इसे लैंड करने के लिए ज्यादा रनवे की जरूरत नहीं पड़ती है। यह 20 टन तक सामरिक का सामान ले जा सकता है और इसमें करीब 80 सैनिक हथियारों के साथ उड़ सकते हैं। यह वायुसेना का सबसे बड़ा विमान है। उत्तराखंड आपदा के समय भी इस विमान ने ‘ऑपरेशन राहत’ में बड़ी भूमिका निभाई थी।
AH-64D अपाचे AH-64D अपाचे लॉन्‍गबो हेलीकॉप्टर 171 मील प्रतिघंटे की रफ्तार में उड़ान भरने में सक्षम है। ये हेलीकॉप्टर पहाड़ों और जंगलों में मार करने में सक्षम हैं। इन हेलीकॉप्टर्स का इस्तेमाल दुश्‍मन मुल्कों के सा‌थ ही देश के भीतर उग्रवादियों के खिलाफ भी किया जा सकता है।
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