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बीवी की लाश ढोने वाले दाना मांझी चाहते हैं, बेटी को मिले अच्छी शिक्षा

dana-manjhiनई दिल्ली। ओडिशा के कालाहांडी के रहने वाले दाना मांझी वही शख्स हैं जिन्हें देश-दुनिया में सिर्फ इसलिए पहचान मिली क्योंकि एंबुलेंस न होने के चलते उन्हें अपनी बीवी की लाश कंधे पर ढोकर करीब 12 किलोमीटर तक ले जानी पड़ी थी। दाना मांझी की तस्वीरें सोशल मीडिया और दुनिया भर की मीडिया में वायरल हो गईं और बहरीन के एक शेख ने उनकी मदद करने का प्रस्ताव रखा। गुरूवार को उन्हें बहरीन दूतावास बुलाकर शेख की तरफ से भिजवाया हुआ 8.87 लाख का चेक दिया गया।

दाना मांझी से इस पूरे मसले पर बात की है। दाना ने इस बात पर जोर दिया कि अब वो सिर्फ इतना चाहते हैं कि उनकी बेटी को शिक्षा मिल सके। बता दें कि एक एनजीओ भी दाना मांझी की मदद के लिए आगे आया है। दिल्ली के फाइव स्टार होटल अशोक में दाना मांझी को लेकर कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज नाम की एनजीओ के लोग पहुंचे। बता दें कि दाना यहां भी अपने उन्हीं कपड़ों में नज़र आए जैसा कि उन्हें तस्वीरों में देखा गया था।

गौरतलब है कि दाना मांझी के बच्चों को कलिंगा इंस्टीट्यूट एनजीओ ने अपने संस्थान में पढ़ाने का फैसला किया है। मांझी के तीन बच्चे 13 साल की चांदनी, 7 साल की सोनई और 4 साल की प्रमिला है। आपको बता दें कि दाना मांझी ओडिशा के उस इलाके के रहने वाले हैं, जहां पर बारिश काफी कम होती है और अकाल और सूखे के चलते जंगल और जमीन से वंचित आदिवासियों का बुरा हाल है।

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