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चाचा-भतीजे से आगे बढ़कर पिता-पुत्र में बदलती प्रतीत हो रही है वर्चस्व की लड़ाई

pita-putra-aour-chachaलखनऊ। बीते दो दिनों में सपा के अंदर घटित घटनाक्रम से यूपी में सियासी घमासान मचा है। आम जनता से लेकर नौकरशाही और राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर जारी है कि अब भंग होगी यूपी की अखिलेश यादव सरकार, शिवपाल देगें इस्तीफा, मुलायम सिंह यादव बनेंगे यूपी के मुख्यमंत्री। या फिर यह सब एक सोची समझी रणनीति के तहत आगामी चुनाव के लिए हो रहा है सियासी ड्रामा। इस मामले पर राजनीतिक दलों के साथ ही जनता की भी नजरें लगी हुई हैं। अगले कुछ घंटें यूपी की सियासत में बड़ा रोमांच आने की संभावना है।

मंगलवार दोपहर दीपक सिघल नोएडा में बैठक लेने के लिए घर से निकले ही थे कि उन्हें पद से हटाए जाने की सूचना मिली। सिंघल मुलायम के दिल्ली आवास पहुंचे। मुख्यमंत्री के इस एक्शन के बाद सपा प्रमुख ने अखिलेश यादव से प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी लेकर शिवपाल सिंह को सौंप दी। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रिएक्शन में शिवपाल सिंह यादव से सिंचाई, पीडब्ल्यूडी, राजस्व एवं सहकारिता जैसे महत्वपूर्ण विभाग छीन लिए। और इसकी सूचना राज्यपाल को दे दी।

राज्यपाल ने भी उनके इस सुझाव को तुरंत मान लिया और मुख्यमंत्री के अनुरूप विभागों का बंटवारा कर दिया। इस बीच शाम से लेकर देर रात तक सपा सांसद अमर सिंह ने मुलायम सिंह से दो बार उनके आवास पर मुलाकात की। बर्खास्त दोनों मंत्री गायत्री प्रजापति और राजकिशोर सिंह ने मुलायम सिंह यादव से मुलाकात की। चर्चा थी कि अखिलेश यादव ने भी बुधवार सुबह 10 बजे राज्यपाल से भेंट करने का समय मांगा था। अखिलेश को प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी वापस मिल जाए और शिवपाल के मंत्रालय उन्हें वापस मिल जाएं। सूत्रों का कहना है कि चाचा-भतीजा के बीच फिलहाल विवाद सुलझाने की दिशा में इस फार्मूले पर भी विचार किया जा रहा है।

नेताजी के रुख को देखते हुए हो सकता है कि शिवपाल और अखिलेश की जिम्मेदारियों की स्थिति पूर्ववत कर दी जाए बाकी विवाद धीरे-धीरे सुलझता रहेगा। उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज समाजवादी पार्टी में चल रही वर्चस्व की लड़ाई अब चाचा-भतीजे से आगे बढ़कर पिता-पुत्र में बदलती प्रतीत हो रही है। मंगलवार को सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने शिवपाल सिंह को उत्तर प्रदेश सपा अध्यक्ष बनाने की घोषणा की तो मुख्यमंत्री अखिलेश ने शिवपाल से अहम विभाग छीन लिए।

पूर्ण बहुमत से बनी सपा की सरकार पारिवारिक कलह के चलते विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पूर्व ही बिखरने की कगार पर है। कल मुलायम सिंह यादव के अगले फैसले का अखिलेश और शिवपाल के साथ-साथ सभी को इंतजार है। मुलायम का फैसला अगर शिवपाल को पसंद नहीं आएगा तो वह पार्टी से बाहर जा सकते हैं और कहीं शिवपाल को नाखुश करने के चक्कर में मुलायम पड़े तो अखिलेश उठा सकते हैं कोई बड़ा कदम। मंगलवार शाम को एकाएक सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने कड़ा फैसला लेते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष पद से हटाकर कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह को यह जिम्मेदारी सौंप दी।

सपा महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव के हस्ताक्षरित पत्र में जानदारी दी गई कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने शिवपाल सिंह को उत्तर प्रदेश सपा का अध्यक्ष मनोनीत किया है। मुलायम के यह फैसला लेने के पीछे सोमवार को भ्रष्टाचार के आरोप में मुख्यमत्री द्वारा की गई दो मंत्रियों खनन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति और पंचायतीराज मंत्री राजकिशोर सिंह की बर्खास्तगी को बड़ा कारण माना जा रहा है। ये दोनों मंत्री मुलायम सिंह और शिवपाल सिंह के करीबी माने जाते थे।

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मुलायम ने इस घटनाक्रम पर यह कहकर अपनी नाराजगी मीडिया के सामने जताई थी कि मैंने ही अखिलेश को मुख्यमंत्री तथा अन्य को मंत्री बनाया है। मुझे मंत्रियों की बर्खास्तगी के फैसले की कोई जानकारी नहीं है। जरूरी नहीं कि अखिलेश मुझसे पूछकर ही सारे फैसले करें।इसके अलावा आज प्रदेशके मुख्य सचिव दीपक सिंघल को हटाए जाने से भी आग में घी पड़ा। सिंघल भी शिवपाल सिंह के करीबी माने जाते हैं। उनकी जगह प्रमुख सचिव वित्त राहुल भटनागर को नया मुख्य सचिव बनाया गया है।

इसके बाद घटनाचक्र तेजी से घूमा और शाम को शिवपाल सिंह को उत्तर प्रदेश समाजवादी पार्टी का अध्यक्ष बनाए जाने की घोषणा हो गई। इस सारे मामले में महत्वपूर्ण यह है कि सभी लोगों को घटनाक्रम की जानकारी मीडिया के जरिए मिली। देर रात तक समाजवादी पार्टी में मचा घमासान उस वक्त सतह पर आ गया जब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने चाचा और मंत्रिमंडल में नंबर दो पर शिवपाल सिंह यादव से सभी महत्वपूर्ण विभाग छीन लिए। शिवपाल सिंह यादव के पास अभी तक लोक निर्माण विभाग, सिंचाई, बाढ़, सहकारिता, राजस्व, लोकसेवा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विभाग थे। मुख्यमंत्री ने उनसे इन विभागों को लेकर केवल परती भूमि विकास विभाग उनके पास छोड़ा है। समाज कल्याण विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी उन्हें सौंपा गया है।

मुख्यमंत्री ने सिंचाई एवं बाढ़ नियन्त्रण विभाग का अतिरिक्त प्रभार होमगार्ड मंत्री अवधेश प्रसाद को दे दिया जबकि राजस्व, लोकसेवा प्रबंधन और सहकारिता विभाग माध्यमिक शिक्षा मंत्री बलराम यादव को अतिरिक्त प्रभार के रूप में दिया गया है। लोक निर्माण विभाग को मुख्यमंत्री ने अपने पास रख लिया है। इससे पहले सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने अपने छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव को सपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाकर पार्टी की ही नहीं सूबे की भी राजनीति गरम कर दी थी। शिवपाल ने सपा प्रमुख से यह तो स्पष्ट कर दिया है कि अब वह अखिलेश मंत्रिमंडल में काम नहीं कर सकते। यदि उनकी इच्छा हुई तो वह पार्टी में अपनी भूमिका निभाएंगे।

सूत्रों का कहना है कि यदि बुधवार को लखनऊ में मुलायम सिंह यादव ने शिवपाल का साथ देने के बजाय अखिलेश के साथ खड़े हुए तो मंत्री पद छोड़ने के बाद का शिवपाल का फैसला ज्यादा बड़ा और सपा के लिए नुकसानदायक होगा भले ही उससे शिवपाल को निजी तौर पर कुछ हासिल न हो। बुधवार को लखनऊ में सपा प्रमुख के पहुंचने के साथ-साथ आजम खां भी लखनऊ पहुंच रहे हैं जो अभी रामपुर में हैं। शिवपाल सिंह जो आज लखनऊ से सैफई आ गए थे कल सुबह 10 बजे तक वापस लखनऊ पहुंचेंगे। सपा प्रमुख अभी दिल्ली में मौजूद हैं उनको लेने के लिए मुख्य सचिव पद से आज ही हटाए गए दीपक सिंघल मुख्यमंत्री का विशेष विमान लेकर दिल्ली पहुंच गए हैं। सपा प्रमुख कल लखनऊ पहुंचेंगे।

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