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चीन की उड़ी नींद, अमेरिका ने भेजा मिसाइल विध्वंसक

U-S-warshipपेइचिंग। चीन और अमेरिका में दक्षिण चीन सागर को लेकर टशन की स्थिति है। दक्षिण चीन सागर में बढ़ती चीनी गतिविधियों को अमेरिका ने खुली चुनौती दी है और चीन ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। दक्षिण चीन सागर पर एशिया में अमेरिकी नेतृत्व में चीन के खिलाफ गोलबंदी तेज हो रही है।

विवादित दक्षिण चीन सागर में चीन के नियंत्रण वाले एक द्वीप के निकट नौवहन की स्वतंत्रता को दिखाने और चीन के क्षेत्रीय दावों को चुनौती देने के लिए अमेरिका द्वारा जानबूझकर युद्धपोत भेजे जाने को लेकर चीन ने उसकी निंदा की है। अमेरिका के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मार्क राइट ने वॉशिंगटन में कहा कि मिसाइल विध्वंसक यूएसएस कर्टिस विल्बर तीन दावेदारों को सूचित किए बिना पार्सेल सीरीज में ट्राइटन द्वीप के 12 समुद्री मील (22 किलोमीटर) के इलाके में गया ताकि ‘पार्सेल द्वीप पर दावा करने वाले पक्षों के अत्यधिक समुद्री दावों को चुनौती दी जा सके।’

पार्सेल पर चीन, ताइवान और वियतनाम अपना अपना दावा पेश करते हैं और उनका कहना है कि इस क्षेत्र में आने वाले पोत पहले उनकी अनुमति लें। यह ताजा अभियान मुख्य रूप से चीन को निशाना बनाकर किया गया था। चीन ने अमेरिका की इस कार्रवाई पर तत्काल जवाब दिया।

आधिकारिक संवाद समिति शिंहुआ के अनुसार चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता यांग युजुन ने बयान जारी करके कहा कि अमेरिका की यह कार्रवाई ‘चीन के कानून का गंभीर उल्लंघन करती है, इससे जल क्षेत्रों में शांति, सुरक्षा और सुव्यवस्था को नुकसान पहुंचा है और साथ ही इलाके की शांति, स्थिरता को भी ठेस पहुंची है।’

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यांग ने कहा कि द्वीप पर मौजूद चीनी बलों, नौसेना के पोतों और युद्धविमानों ने तत्काल कार्रवाई की, अमेरिकी युद्धपोत को चिह्नित किया और ‘उसे चेतावनी देकर इलाके से बाहर कर दिया।’ उन्होंने कहा कि अमेरिका का अभियान ‘दोनों पक्षों के बलों की सुरक्षा के लिए एक गैरजिम्मेदाराना और बेहद गैर पेशेवर था और इससे अत्यंत घातक परिणाम हो सकते हैं।’

चीनी सुरक्षा बल ‘चीन की संप्रभुता एवं सुरक्षा की रक्षा के लिए’ हर वो कदम उठाएंगे जो जरूरी हैं। इस बीच चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा कि चीनी पक्ष ने निगरानी की और ‘उसने अमेरिकी युद्धपोत को मौखिक चेतावनी दी।’

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