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खिलाने वाले हाथ को काट रही है आईसीसी: बीसीसीआई

icc and bcciमुंबई। बीते कई महीनों से भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) इंटरनैशनल क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (आईसीसी) और उसके स्वतंत्र अध्यक्ष शशांक मनोहर से नाराज चल रहा है। शशांक मनोहर बीसीसीआई के भी पूर्व अध्यक्ष थे। शनिवार को जब यह खबर आई कि आईसीसी ने इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) को अगले साल होने वाली चैंपियंस ट्रोफी की मेजबानी के लिए बड़ी भारी रकम आवंटित की, उसके बाद दोनों के बीच रिश्ते और तल्ख होते नजर आ रहे हैं। यह रकम उससे दोगुनी है जो आईसीसी ने भारत को इस साल वर्ल्ड टी20 के आयोजन के लिए दी थी। इससे पहले मीडिया में भी ऐसी खबरें थीं कि आईसीसी ने अगले साल चैंपियंस ट्रोफी के लिए 135 मिलियन डॉलर का बजट अलग रखा हुआ है। वहीं इस साल मार्च/अप्रैल में भारत में हुए वर्ल्ड टी20 के लिए आईसीसी ने भारत को 45 मिलियन डॉलर की रकम दी थी।

बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा, ‘हमने आईसीसी से कुछ सवाल पूछे हैं क्योंकि इस आयोजन पर जो रकम खर्च होगी वह सबकी जेब से जाएगी। मुझे यकीन है कि आईसीसी इस बात को समझेगी। एक क्रिकेटिंग नेशन होने के नाते भारत वैश्विक नेतृत्वकर्ता की अपनी भूमिका निभाना चाहेगा।’

आईसीसी का ही एक भीतरी गुट बजट बढ़ाने की बात से इनकार कर रहा है। उनका कहना है कि चैंपियंस ट्रोफी के लिए तैयार बजट का ड्राफ्ट 60 मिलियन डॉलर से कम है लेकिन बीसीसीआई के सूत्रों ने कहा कि आईसीसी ने बजट में बेहताशा बढ़ोतरी की है।

आईसीसी ने एक बयान जारी कहा: ‘आईसीसी के सभी आयोजनों की तरह, इस मामले में भी मेजबान देश ने इस उच्च स्तरीय इवेंट के आयोजन पर होने वाले खर्च का एक ड्राफ्ट बजच पेश करता है। इस बजट को पहले सभी सदस्य देशों को बांटा जाता है। इसके बाद आईसीसी का वार्षिक कॉन्फ्रेंस में बोर्ड इस पर चर्चा करता है और उसके बाद ही इसे मंजूरी दी जाती है।’ यहां यह बात जान लेना भी जरूरी है कि भारत में आयोजित हुए वर्ल्ड टी20 में चैंपियंस ट्रोफी के मुकाबले ज्यादा टीमें थीं, ज्यादा स्थानों पर मुकाबले हो रहे थे। सूत्रों का कहना है कि प्रति मैच होने वाले खर्च में काफी अंतर है।

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बीसीईआई के एक अधिकारी ने कहा कि आईसीसी की कमाई का 80 फीसदी हिस्सा बीसीसीआई से आता है और इन समितियों में बोर्ड का कोई प्रतिनिधित्व नहीं होता। ऐसा लगता है कि आईसीसी उसी हाथ को काटना चाहती है जो उसे खिला रही है।

जब शशांक मनोहर बीसीसीआई के अध्यक्ष थे, तब वह उस समिति के सदस्य थे लेकिन अब जब वह आईसीसी में चले गए हैं, बीसीसीआई की कोई नुमाइंदगी उस समिति में नहीं है। इसके साथ ही बोर्ड को इस बात का भी अहसास है कि मनोहर बोर्ड के हित में काम नहीं कर रहे।

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