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सैकड़ों करोड़ के हवाला रैकिट के ‘बलि के बकरे’

hawala-scamमुंबई। बब्बन निकम एक छोटे से ढाबे को घूरते हैं और फिर फुसफुसाते हैं, ‘क्या वे मुझे गिरफ्तार करेंगे? मैं 73 साल का हूं, और पिछली बार शायद 20 साल पहले मुंबई गया था।’ बब्बन उन कई ‘बलि के बकरों’ में से एक हैं जिनकी पहचान को चुराकर 2,232 करोड़ रुपये के हवाला घोटाले को अंजाम दिया गया। आम लोगों की पहचान को चुराकर उनके नाम से दक्षिण मुंबई में कुछ सरकारी और निजी बैंकों में खाते खोले गए और उनसे करोड़ों रुपये विदेश भेजे गए।

बब्बन ढाबे पर काम करते हैं, हर रोज 12 घंटे मेहनत के बाद मुश्किल से 5 हजार रुपये हर महीने कमा पाते हैं। लेकिन उन्हें फाइनटच इम्पेक्स नाम की कंपनी का संयुक्त मालिक दिखाया गया है। पिछले कुछ महीनों से एक राष्ट्रीयकृत बैंक की ओपेरा हाउस शाखा में कंपनी के खाते से 168 करोड़ रुपये दुबई भेजे गए। बैंक के दस्तावेजों के मुताबिक कंपनी का दूसरा मालिक बब्बन का बेटा राजेंद्र है, जिसे 6 महीने पहले ही एक और ढाबे पर मुश्किल से काम मिला है।

वाकापाड़ा गांव में किराए के एक छोटे से कमरे में रहने को मजबूर बब्बन कहते हैं, ‘आप हमारे घर में किसी भी दिन 100 रुपये से ज्यादा नहीं पाएंगे। कभी-कभी तो हमें रिश्तेदारों से 500 रुपये उधार लेने पड़ते हैं।’ बब्बन के बेटे राजेंद्र ने अपनी बेटी की शादी के लिए मकान बेच दिया, जिसके बाद उनका परिवार पिछले महीने इस किराए के कमरे में शिफ्ट हुआ। बब्बन यहां अपनी पत्नी और बेटे के साथ रहते हैं जबकि दूसरा बेटा नासिक में दिहाड़ी मजदूर है।
बब्बन कहते हैं, ‘मैंने कभी भी बैंक में खाते नहीं खुलवाया। मेरे पास राशन कार्ड और वोटर कार्ड है, लेकिन मुझे ये याद नहीं कि पिछली बार मुझे इन दस्तावेजों की कब जरूरत पड़ी थी। जीवन एक लंबा संघर्ष है और मैं जेल में नहीं मरना चाहता, वो भी उस चीज के लिए जिसके बारे में मुझे कुछ नहीं पता।’

मुंबई मिरर ने सोमवार को खुलासा किया कि खुफिया राजस्व निदेशालय (DRI) ने एक बड़े हवाला घोटाले से पर्दा उठाया है, जहां आम लोगों के दस्तावेजों को चुराकर भारत से बड़ी राशि विदेश भेजी गई। DRI अधिकारियों के मुताबिक इस घोटाले में 4 राष्ट्रीयकृत बैंक और एक निजी बैंक शामिल हैं और फर्जीवाड़े को पिछले साल अक्टूबर से मार्च 2016 के बीच अंजाम दिया गया। बब्बन ने कहा है कि वह यह नहीं जानना चाहते कि उनके दस्तावेजों को किसने चुराया, क्योंकि उन्हें अपने परिवार की सुरक्षा की चिंता है।

मुंबई मिरर ने ऐसे ही एक और शख्स की पहचान की है जिसके दस्तावेजों का इस्तेमाल इस हवाला कांड में किया गया। डोंबिवली में फूल बेचने वाले 55 साल के गुलाबचंद सैनी भी इस घोटाले के ‘बलि के बकरों’ में शामिल हैं। बैंक दस्तावेजों के मुताबिक सैनी पिडिलाइट ट्रेडर्स नाम की कंपनी के इकलौते मालिक हैं। कंपनी का ओपेरा हाउस स्थित एक बैंक की शाखा में खाता है, जिससे 36 करोड़ रुपये दुबई भेजे गए।

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गुलाबचंद सैनी कहते हैं, ‘परिवार में मेडिकल इमर्जेंसी की वजह से पिछले 12 महीनों में हमारे पास जो कुछ भी था उसे बेचना पड़ा। मैं हर महीने करीब 8 हजार रुपये कमाता हूं।’ सैनी के परिवार में उनकी पत्नी, बेटी, बेटा, बहू और दो पोते-पोतियां हैं। ये सभी किराए के कमरे में रहते हैं।

सैनी की कहते हैं, ‘मैंने सिम कार्ड लेने के उद्देश्य से अपने राशन कार्ड का इस्तेमाल किया था’। वहीं, सैनी की पत्नी कहती है, ‘हम मुश्किल से गुजारा कर पाते हैं। और अब इस खबर ने हमें वाकई डरा दिया है।’ डायरेक्टोरेट ऑफ फॉरेन ट्रेड की वेबसाइट पर बब्बन और सैनी दोनों के नाम इंपोर्ट-एक्सपोर्ट कंपनियों के मालिक के तौर पर दर्ज है।

DRI के मुताबिक घोटाले के जिम्मेदार लोगों ने पिछले साल अगस्त में अब्दुल रहमान स्ट्रीट में स्टेलकन इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड नाम से एक ऑफिस खोला था। जब मिरर की टीम वहां पहुंची तो पता चला कि वहां अब सुनारों की दुकानें हैं, और पिछले किराएदार इस साल फरवरी में ही वहां से चले गए थे। लैंडलॉर्ड को भी पिछले किराएदार के बारे में कुछ पता नहीं है। बगल की एक दुकान के मालिक ने बताया कि पिछले किरायेदार उसी तरह चुपचाप चले गए जिस तरह आए थे।

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