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अरुणाचल: SC ने गवर्नर से 15 मिनट में मांगी प्रेसिडेंट रूल की सिफारिश वाली फाइल

scनई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश के मुद्दे पर बुधवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने गवर्नर से 15 मिनट में प्रेसिडेंट रूल लगाने की सिफारिश करने वाली फाइल देने को कहा है। केंद्र सरकार के प्रेसिडेंट रूल लगाने के फैसले को कांग्रेस ने चुनौती दी है। इसी पर सुनवाई हो रही है। केजरीवाल, जेडीयू समेत दूसरी पार्टियों ने भी इसे लोकतंत्र की हत्या बताया है।
आखिर क्यों लगा अरुणाचल में प्रेसिडेंट रूल…
– अरुणाचल में पिछले कई दिनों से राजनीतिक उठापटक चल रही है। कांग्रेस सरकार 42 में से 21 विधायक बागी हो गए हैं।
– 16-17 दिसंबर को सीएम नबाम टुकी के कुछ विधायकों ने बीजेपी के साथ नो कॉन्फिडेंस मोशन पेश किया और सरकार की हार हुई।
– सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस सरकार असेंबली भंग करने के मूड में नहीं थी और जोड़-तोड़ की तमाम कोशिशें करने में लगी हुई थी।
अपडेट्स
पूर्व सीएम नबाम टुकी के कहा कि अरुणाचल के लोग इस फैसले से नाराज हैं। उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट जस्टिस मिलेगा।
– कांग्रेस लीडर केसी मित्तल के मुताबिक, प्रेसिडेंट रूल अन्कान्स्टिटूशनल है।
प्रेसिडेंट ने माना राज्य में ‘संवैधानिक संकट’
– पिछले रविवार को नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में हुई कैबिनेट मीटिंग में इस पर चर्चा हुई थी। बाद में, सिफारिश को प्रेसिडेंट के पास भेज दिया गया।
– होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह सोमवार को प्रेसिडेंट से मिले थे। और उन्हें बताया था कि केंद्र ने अरुणचाल में क्यों प्रेसिडेंट रूल की सिफारिश की है।
– प्रेसिडेंट ने राज्य में ‘संवैधानिक संकट’ मानकर सिफारिश को मंजूरी दे दी।
– गृह राज्यमंत्री किरेन रिजिजू के मुताबिक, यह कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई है। कांग्रेस यह न सिखाए कि हमें क्या करना है। अभी तक के सभी कदम संविधान के तहत उठाए गए हैं।
– कांग्रेस ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की है। उनका एक डेलिगेशन प्रणब मुखर्जी से भी मिला।
– उधर, जेडीयू, आप समेत लेफ्ट पार्टियों ने इसे गलत ठहराया है।
क्या है असेंबली का गणित?
– अरुणाचल असेंबली में कुल 60 सीटें हैं। 2014 में हुए इलेक्शन में कांग्रेस को 42 सीटें मिली थीं।
– बीजेपी के 11 और पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल प्रदेश (PPA) को पांच सीटें मिलीं।
– पीपीए के 5 एमएलए कांग्रेस में शामिल हो गए थे। इसके बाद सरकार के पास कुल 47 एमएलए हो गए।
– लेकिन मौजूदा हालात में सीएम टुकी के पास सिर्फ 26 विधायकों का ही सपोर्ट है।
– सरकार बचाने के लिए कांग्रेस को कम से कम 31 विधायकों का सपोर्ट चाहिए।
कांग्रेस ने गवर्नर को बताया बीजेपी का एजेंट
– पिछले साल दिसंबर में गहराए सियासी संकट के दौरान टुकी ने गवर्नर ज्योति प्रसाद राजखोवा को बीजेपी एजेंट बताया था।
– टुकी ने आरोप लगाया कि उन्होंने ही राज्य में सरकार गिराने के लिए कांग्रेस के विधायकों को साथ मिलाकर बगावत कराई।
– 14 जनवरी को गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असेंबली के दिसंबर में बुलाए दो दिन के सेशन को ही रद्द कर दिया।
– जिसमें सरकार के खिलाफ नो कॉन्फिडेंस और स्पीकर के खिलाफ इम्पीचमेंट (महाभियोग) मोशन लाया गया था।
– टुकी सरकार ने असेंबली को सील करा दिया। इसके बाद पार्टी के बागी विधायकों ने मीटिंग बुलाकर कैलिखो पॉल को नेता चुन लिया था।
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