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डॉ स्वामी से जानिए कौन थे वो बाकी के तीन कंधे, जो दाना मांझी को नहीं मिले!

Dr-Subramanian-Swamiसोशल मीडिया के पलपल उत्परिवर्तित मुद्दों के साथ हालांकि अब ये मुद्दा शांत हो चुका है. क्योंकि अब संगीतकार विशाल ददलानी का अच्छे और कच्छे जैसे कच्चे छत्ते पर सोशल मीडिया की मधुमक्खियाँ झूम गयी हैं, जिसमें पर्याप्त शहद मिलने की उम्मीद कम ही है. फिर भी इस मुद्दे पर डॉ. सुब्रमणियम स्वामी द्वारा ठोकी गयी ताबूत की अंतिम कील पर एक नज़र मारना ज़रूरी है.

उनके लिए भी ज़रूरी है जो दाना मांझी के पत्नी के शव को कंधे पर ढोने को, दशरथ मांझी के पत्नी प्रेम से जोड़कर उसके मुसीबत के पहाड़ में से अपने अपने स्वार्थ का रास्ता निकाल रहे हैं.

सोशल मीडिया पर बहुर सारे लोगों ने अपने अपने तर्क प्रस्तुत किये होंगे, किसी ने व्यवस्था पर इलज़ाम लगाया, किसी ने उस कैमरामैन पर जिसे उसकी मदद करने के बजाय उसका वीडियो बनाना अधिक उचित लगा.

लेकिन हर बार की तरह जिस बात पर डॉ स्वामी ने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में लोगों का ध्यान खींचा उस बारे में किसी को पता नहीं होगा. एक बार आप भी डॉ स्वामी के फेसबुक पेज पर प्रकाशित इस लेख को पढ़िए और जवाब दीजिये कि जिस शव को उठाने के लिए चार कन्धों की ज़रूरत होती है, उनमें से एक तो मौजूद था, लेकिन बाकी के वो तीन कंधें (राहुल गांधी, जयराम रमेश और अरुंधती रॉय)कहाँ गायब हो गए, जिन्होंने उड़ीसा में की जा रहे सुधार कार्यों को सिर्फ इसलिए रोक दिया था कि ये लोग भी समृद्ध हो गए तो इनको बेचारा बनाकर वोट बैंक कैसे हासिल करेंगे.

डॉ स्वामी 2004 से 2014 तक के दशक की याद दिलाते हुए बताते हैं कि कैसे वामपंथियों ने उड़ीसा में स्टील और एलुमिनियम प्लांट्स बनाने की योजना का विरोध किया, माइनिंग रोक दी गयी थी, और उड़ीसा के इन आदिवासी लोगों के मसीहा बनकर सामने आये थे और वहां पर औद्योगिक विकास को ये कहकर रोक दिया था कि इन बेचारों को हम खाना-शिक्षा सब कुछ मुफ्त में बांटेंगे.

और तो और उस समय भी मैन स्ट्रीम मीडिया ने उनके तथाकथित कार्यों को महान बताते हुए उनका समर्थन किया, उनकी रैली को कवर करते हुए बड़े बड़े लेख लिखे गए, टीवी पर शो दिखाए गए. वामपंथियों के NGOs ने उनकी हाँ में हाँ मिलते हुए उड़ीसा के इन आदिवासियों को पूंजीपतियों से बचाने का नाटक किया, और उन्हें उनके दलदल में वापस धकेल दिया.

इस दलदल में धंसा कोई दाना मांझी कैसे उन सुविधाओं का सपना देख सकता है जिसके लिए इतना हो हल्ला मचाया जा रहा है. आज जब उसे शव को ढोने के लिए चार कन्धों की ज़रूरत है तो कहाँ ढूंढें वो राहुल गांधी, जयराम रमेश और अरुंधती रॉय के कंधे जिन्होंने उनके दलदल में ही हर चीज़ मुफ्त में देने का वादा कर उन्नति के सारे रास्ते बंद कर दिए थे.

यदि इन वामपंथियों के राष्ट्र-विरोधी इरादों का विरोध नहीं किया गया तो वो एक दिन हम सबको उड़ीसा के आदिवासियों के स्तर पर ले आयेंगे.

– डॉ सुब्रमणियम के नीचे अंग्रेज़ी में दिए गए फेसबुक लेख का भावार्थ

Let us cry a bit. Atleast 2 tears. One for this man and one for us. Because he is a reflection of us, our nation
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Dana Majhi is very poor. He had no money to pay for ambulance at govt hospital to carry his dead wife home which is 60kms away. So he decided to carry her on his shoulder and started walking towards his village. Its only after he walked for 12 kms that he got ambulance.

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Every dead person needs 4 shoulders but Dana Majhi’s wife got only one.

Where were the other three? The Three Leftists ?

Leftists survive and thrive because the masses never remember anything, nor they connect any dots.
Ambulance and hearse do not occur in nature. Both are attributes of an industrialised society.

So, even as the national chest beating over a very tragic and shameful incident in which a man had to carry dead body of his wife on his shoulder continues, nobody remembers the decade of 2004-14 of Orissa.

In this decade, Indian Left carried a high-decibel campaign of flagrant lies to block the industrialisation of Orissa. The campaign was led by Rahul Gandhi, Jairam Ramesh, and Arundhati Roy.

Major steel and aluminium plants were scrapped, permissions already given were withdrawn, mining was stopped, self-Righteous Leftists declared themselves to be saviours of the Tribals of Orissa. Cover stories were written, rallies were held, TV studios resonated with the cries of the Leftists out to save Orissa from evil Capitalists. And NGOs of the Leftists made huge sums.
And Orissa was pushed back into pristine forests.

Now when a Orissa tribal man actually needed three more persons to carry the dead body of his wife, because the Leftists won’t allow the modern economy that would make ambulance/hearse possible, the three Leftists-Rahul Gandhi, Jairam Ramesh, and Arundhati Roy were nowhere to be seen.

Typical Leftists. Leftists want victims, they do not want to help victims.
And Leftist freebie circus has one more pernicious effect. As they declare State to be provider of free everything: free food, free housing, free education; the social compact breaks down. People stop nurturing relationships, friendships, neighbourly relations, and community living. Otherwise, in such tragic situations relatives, friends, neighbours all rush to help.
In socialism, people start looking up to govt for everything, and stop looking at the neighbour next door.

If we do not resist the Leftists, we would all be reduced to the status of Tribals of Orissa.

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