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मोदी के बलूचिस्तान मुद्दा उठाने से ‘बेहद परेशान’ हैं चीनी विद्वान: एक्सपर्ट

china-indiaपेइचिंग। रणनीतिक मामलों के एक बड़े जानकार ने रविवार को कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से बलूचिस्तान का मुद्दा उठाए जाने से चीनी विद्वान ‘बेहद परेशान’ हैं। इसके साथ ही उन्होंने बलूचिस्तान में चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के प्रभावित होने की स्थिति में दोनों देशों के भारत के खिलाफ एक होने का अंदेशा भी जताया। साउथ एशिया मामलों के एक्सपर्ट हू शिशेंग ने कहा, ‘मेरा निजी मत है कि यदि भारत अडिग रहता है और इसके चलते CPEC की संभावनाओं पर विपरीत प्रभाव पड़ता है तो इससे भारत और चीन के रिश्तों में भी तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है।’

हू शिशेंग ने कहा, ‘यदि ऐसा होता है तो चीन और पाकिस्तान के पास भारत के खिलाफ एकजुट होकर कदम उठाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं होगा। तीनों देश अपने आर्थिक एवं सामाजिक विकास के पटरी से उतर सकते हैं। यह काफी बुरा हो सकता है। मैं कहना चाहता हूं कि भारत-चीन के रिश्तों में एक बार फिर पाकिस्तान के चलते तनाव की स्थिति आ सकती है। यह मुद्दा तिब्बत, बॉर्डर और व्यापारित असंतुलन से भी बड़े विवाद का रूप ले सकता है।’

चीन के विदेश मंत्रालय से जुड़े चाइना इंस्टीट्यूट ऑफ कनटेम्पररी इंटरनैशनल रिलेशंस के थिंक-टैंक इंस्टीट्यूट ऑफ साउथ ऐंड साउथ-ईस्ट एशियन ऐंड ओशियनिक स्टडीज के निदेशक हू ने कहा कि ऐसी स्थिति चीन और भारत से जुड़े विद्वानों के लिए खासी चिंताजनक होगी। हू ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस जैसे अहम मौके पर पीएम मोदी की ओर से पाक के बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के हनन का मुद्दा उठाए जाने से चीनी विद्वान बेहद परेशान हैं।

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हालांकि, अब तक चीनी विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे पर अपनी ओर से कोई टिप्पणी नहीं की है। पाक का बलूचिस्तान सूबा पाकिस्तान-चीन आर्थिक गलियारे का हब है। यह गलियारा चीन के शिनजियांग को बलूचिस्तान से जोड़ेगा। हू ने कहा कि मेरा मानना है कि इस आर्थिक गलियारे के निर्माण के लिए पाकिस्तान और चीन सुरक्षा के सभी उपाय करेंगे। यह किस तरह से होंगे इसके बारे में अभी कोई आइडिया नहीं है।

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