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‘मन की बात’ में बोले प्रधानमंत्री मोदी, कश्मीर में होने वाली हर मौत हमारा अपना नुकसान

mann-ki-baat modiनई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम अपने संबोधन में रविवार को कश्मीर, GST बिल, गैस सब्सिडी, रियो ओलिंपिक में भारत के प्रदर्शन से लेकर प्रदूषण और पर्यावरण समेत कई मुद्दों पर खुलकर अपने ‘मन की बात’ रखी। उन्होंने कहा कि कश्मीर में किसी भी नौजवान या सुरक्षा कर्मी की जान जाती है तो यह नुकसान अपने देश का ही है। PM मोदी ने कहा, ‘गांव के प्रधान से लेकर प्रधानमंत्री तक हर कोई यह मानता है कि जो लोग छोटे-छोटे बालकों को आगे कर कश्मीर में अशांति पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, कभी-न-कभी उनको इन निर्दोष बालकों को जवाब देना पड़ेगा।’

GST बिल पर उन्होंने सभी राजनीतिक दलों को धन्यवाद देते हुए कहा, ‘अगस्त 2016 में घोर राजनैतिक विरोध रखने वाले सभी दलों ने मिल कर के GST कानून पारित किया | इसका क्रेडिट सभी दलों को जाता है।
ध्यानचंद को श्रद्धांजलि दी
29 अगस्त को हॉकी के जादूगर ध्यान चंद जी की जन्मतिथि है, यह दिन राष्ट्रीय खेल दिवस के रुप में मनाया जाता है। मैं ध्यान चंद जी को श्रद्धांजलि देता हूँ और इस अवसर पर आप सभी को उनके योगदान की याद भी दिलाना चाहता हूँ। साल 1928, 1932, 1936 में ओलिंपिक में भारत को हॉकी का स्वर्ण पदक दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। मशहूर क्रिकेटर ब्रैडमैन ने ध्यान चंद जी के लिए कहा था, ‘वह रन बनाने की तरह गोल करते हैं।’ ध्यानचंद जी खेल भावना और देशभक्ति की एक जीती-जागती मिसाल थे।

ओलिंपिक में प्रदर्शन पर
मेरे प्यारे देशवासियो, वैसे जब भी ‘मन की बात’ का समय आता है, तो MyGov.in पर या नरेंद्र मोदी ऐप पर कई सुझाव आते हैं। इस बार तो ज्यादातर, हर किसी ने मुझे आग्रह किया कि रियो ओलिंपिक के संबंध में आप जरूर कुछ कहें। एक श्रीमान अजित सिंह ने कहा, ‘बेटियों की शिक्षा और खेलों में उनकी भागीदारी पर जरूर बोलिए, क्योंकि रियो में मेडल जीतकर उन्होंने देश को गौरवान्वित किया है।’ श्रीमान सचिन लिखते हैं कि इस बार के ‘मन की बात’ में सिंधु, साक्षी और दीपा कर्माकर का जिक्र जरूर कीजिए।

हमारी बेटियों ने एक बार फिर साबित किया कि वे किसी भी तरह से, किसी से भी कम नहीं हैं। शिखर ठाकुर ने लिखा है कि हम ओलिंपिक में और भी बेहतर कर सकते थे। क्या हमारा प्रदर्शन वाकई अच्छा था? और जवाब है, नहीं। हमारे माता-पिता आज भी पढ़ाई और ऐकडेमिक्स पर फोकस करने पर जोर देते हैं | समाज में अभी भी खेल को समय की बर्बादी माना जाता है।

सत्यप्रकाश मेहरा ने मन की बात में खास तौर से बच्चों और युवाओं को लेकर पाठ्येतर गतिविधियों पर फोकस करने की जरूरत पर जोर देने का सुझाव दिया है। इस बात से तो इनकार नहीं किया जा सकता कि हमारी आशा के अनुरूप हम ओलिंपिक्स में प्रदर्शन नहीं कर पाए। शूटिंग में अभिनव बिंद्रा जी चौथे स्थान पर रहे और थोड़े से अंतर से वह पदक से चूक गए। जिम्नास्टिक में दीपा कर्माकर चौथे स्थान पर रही, बहुत थोड़े अंतर के चलते वह भी मेडल से चूक गईं।

पी. टी. ऊषा के बाद, 32 साल में पहली बार ललिता बाबर ने ट्रैक फील्ड फाइनल के लिए क्वॉलिफाई किया। 36 साल बाद महिला हॉकी टीम ओलिंपिक पहुँची। पिछले 36 साल में पहली बार पुरुषों की हॉकी टीम क्नॉक आउट स्टेज पहुँचने में कामयाब रही। मुक्केबाजी में विकास कृष्ण यादव क्वॉर्टर फाइनल तक पहुँचे, लेकिन कांस्य नहीं पा सके। अदिति अशोक, दत्तू भोकनल, अतनु दास कई नाम हैं, जिनके प्रदर्शन अच्छे रहे।

मैंने एक कमिटी की घोषणा की है, सरकार इसकी गहराई में जाएगी, दुनिया में क्या-क्या तरीके अपनाए जा रहे हैं, उसकी स्टडी की जाएगी। साल 2020, 2024 और 2028 के ओलिंपिक के लिए दूर तक की सोच के साथ हमें योजना बनानी है। मैं राज्य सरकारों से आग्रह करता हूँ कि ऐसी कमिटियां बनाएं, खेल जगत से जुड़े संगठन निष्पक्ष भाव से आत्म मंथन करें। हिन्दुस्तान के हर नागरिक से आग्रह करता हूँ कि मुझे सुझाव भेजें। सवा-सौ करोड़ देशवासी, 65% युवा जनसंख्या वाला देश, खेल की दुनिया में भी बेहतरीन स्थिति प्राप्त करे, इस संकल्प के साथ आगे बढ़ना है।

शिक्षक दिवस पर
5 सितम्बर को शिक्षक दिवस है, मैं कई सालों से शिक्षक दिवस पर विद्यार्थियों के साथ काफी समय बिताता रहा हूं। मेरे लिए 5 सितम्बर ‘शिक्षक दिवस’ भी था और ‘शिक्षा दिवस’ भी था। जीवन में जितना ‘माँ’ का स्थान होता है, उतना ही शिक्षक का स्थान होता है। मैं आज पुलेला गोपीचंद जी को एक खिलाड़ी से अतिरिक्त एक उत्तम शिक्षक के रूप में देख रहा हूँ।

5 सितम्बर, भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी का जन्म दिन है और देश उसे ‘शिक्षक दिवस’ के रूप में मनाता है। राधाकृष्णन जी हमेशा कहते थे, ‘अच्छा शिक्षक वही होता है, जिसके भीतर का छात्र कभी मरता नहीं है।’ मेरे एक शिक्षक की उम्र अब 90 साल हो गई है। आज भी हर महीने उनकी मुझे चिट्ठी आती है। महीने भर मैंने क्या किया, उनकी नज़र में वो ठीक था, नहीं था, जैसे आज भी मुझे क्लास रूम में वो पढ़ाते हों, वह लिखते हैं।

प्रदूषण और पर्यावरण पर
मेरे प्यारे देशवासियो, कुछ ही दिनों में गणेश उत्सव आने वाला है। गणेश उत्सव की बात करते हैं, तो लोकमान्य तिलक जी की याद आना बहुत स्वाभाविक है। लोकमान्य तिलक जी ने सार्वजनिक गणेश उत्सव के द्वारा इस धार्मिक अवसर को राष्ट्र जागरण का पर्व बना दिया था। अब केवल महाराष्ट्र नहीं, हिंदुस्तान के हर कोने में गणेश उत्सव होने लगे हैं। कुछ लोगों ने अभी भी लोकमान्य तिलक जी ने जिस भावना को रखा था, उसका अनुसरण करने का भरपूर प्रयास किया है।

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सार्वजनिक विषयों पर वो चर्चा रखते हैं, निबंध, रंगोली स्पर्द्धाएं करते हैं। लोक शिक्षा का बड़ा अभियान गणेश उत्सव के द्वारा चलता है। लोकमान्य तिलक जी ने हमें ‘स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है’ का प्रेरक मंत्र दिया था। सुराज हमारी प्राथमिकता हो, इस मंत्र को लेकर के हम सार्वजनिक गणेश उत्सव से संदेश नहीं दे सकते हैं क्या? उत्सव समाज की शक्ति होता है। उत्सव व्यक्ति और समाज के जीवन में नए प्राण भरता है। उत्सव के बिना जीवन असंभव होता है। मुझे कई लोगों ने गणेशोत्सव और दुर्गा पूजा से जुड़ी कुछ चीजों पर काफ़ी लिखा है। और उनको चिंता हो रही है पर्यावरण की।

शंकर नारायण प्रशांत कहते है कि ‘मन की बात’ में लोगों को समझाइए कि प्लास्टर ऑफ पैरिस से बनी गणेश जी की मूर्तियों का उपयोग न करें। क्यों न गाँव के तालाब की मिट्टी से बने हुए गणेश जी का उपयोग करें, PoP की बनी हुई प्रतिमाएं पर्यावरण के लिए अनुकूल नहीं होतीं। क्यों न हम मिट्टी का उपयोग करके गणेश, दुर्गा की मूर्तियाँ बनाकर हम उस पुरानी परंपरा पर वापस आएं। पर्यावरण, नदी-तालाबों की रक्षा, उसमें होने वाले प्रदूषण से इस पानी के छोटे-छोटे जीवों की रक्षा- ये भी ईश्वर की सेवा ही तो है। गणेशोत्सव एक समाज सेवा का काम है। आप सबको गणेश चतुर्थी की बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूँ।

मदर टेरेसा पर
‘भारत रत्न’ मदर टेरेसा, 4 सितम्बर को मदर टेरेसा को संत की उपाधि से विभूषित किया जाएगा। मदर टेरेसा ने अपना पूरा जीवन भारत में गरीबों की सेवा के लिए लगाया था। जीवन भर भारत के गरीबों की सेवा करने वाली मदर टेरेसा को जब संत की उपाधि प्राप्त होती है, तो भारतीयों को गर्व होना स्वाभाविक है। 4 सितम्बर को होने वाले इस समारोह में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की अगुवाई में भारत सरकार का आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल वहां जाएगा।

गंगा की स्वच्छता पर
भारत सरकार ने पिछले दिनों 5 राज्य सरकारों के सहयोग के साथ स्वच्छ गंगा के लिए लोगों को जोड़ने का सफल प्रयास किया। इस महीने की 20 तारीख को इलाहाबाद में उन लोगों को निमंत्रित किया गया कि जो गंगा के तट पर रहने वाले गाँवों के प्रधान थे। वे इलाहाबाद आए और गंगा तट के गाँवों के प्रधानों ने माँ गंगा की साक्षी मानकर शपथ ली। वे गंगा तट के अपने गाँवों में खुले में शौच जाने की परंपरा को तत्काल बंद करवाएंगे, शौचालय बनाने का अभियान चलाएंगे। गंगा सफाई में गाँव पूरी तरह योगदान देंगे और गंगा को गंदा नहीं होने देगा। मैं उन सबको इस काम के लिए बधाई देता हूँ।

स्वच्छता अभियान पर
कुछ बातें मुझे कभी-कभी बहुत छू जाती हैं और जिनको इसकी कल्पना आती हो, उन लोगों के प्रति मेरे मन में विशेष आदर भी होता है। 15 जुलाई को छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में 1700 से ज्यादा स्कूलों के सवा-लाख विद्यार्थियों ने अपने माता-पिता को चिट्ठी लिखी। उन्होंने अपने माता-पिता से चिट्ठी लिख कर के कहा कि हमारे घर में टॉइलट होना चाहिए। कुछ बालकों ने तो ये भी लिख दिया कि इस साल मेरा जन्मदिन नहीं मनाओगे, तो चलेगा, लेकिन टॉइलट जरूर बनाओ।

कर्नाटक के कोप्पाल जिले में 16 साल उम्र की एक बेटी मल्लम्मा ने अपने परिवार के खिलाफ ही सत्याग्रह कर दिया। बेटी मल्लम्मा की जिद थी कि घर में टॉइलट होना चाहिए। अब परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी पर बेटी जिद पर अड़ी हुई थी। वह सत्याग्रह छोड़ने को तैयार नहीं थी। गाँव के प्रधान मोहम्मद शफी को पता चला कि मल्लम्मा ने टॉइल के लिए सत्याग्रह किया है। उनकी विशेषता देखिए कि उन्होंने 18,000 रुपयों का इंतज़ाम किया और एक सप्ताह के भीतर टॉइलट बनवा दिया।

सरकार ने लोगों से आह्वान किया है कि आप 2-3 मिनट की स्वच्छता की फ़िल्म बनाइए, यह शॉर्ट फिल्म भारत सरकार को भेज दीजिए। वेबसाइट पर इसकी जानकारी मिल जाएंगी। उसकी स्पर्द्धा होगी और गाँधी जयंती के दिन जो विजयी होंगे, उनको इनाम दिया जाएगा। मैं टेलिविजन चैनलों को भी कहता हूँ कि आप भी ऐसी फिल्मों के लिये आह्वान करके स्पर्द्धा करिए। यह जरूरी नहीं है कि फिल्म बनाने के लिये स्टूडियो, कैमरा चाहिए, आजकल तो मोबाइल के कैमरे से भी आप फिल्म बना सकते हैं।

भारत-बांग्लादेश मैत्री
भारत की हमेशा यह कोशिश रही है कि हमारे पड़ोसियों के साथ हमारे संबंध गहरे हों। हमारे संबंध सहज हों। हमारे संबंध जीवंत हों। पिछले दिनों राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कोलकाता में ‘आकाशवाणी मैत्री चैनल’ की शुरुआत की। हमारे पड़ोस में बांग्लादेश है। हम जानते हैं, बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल एक ही सांस्कृतिक विरासत के साथ आज भी जी रहे हैं। तो इधर ‘आकाशवाणी मैत्री’ और उधर ‘बांग्लादेश बेतार’, आपस में कॉन्टेंट शेयर करेंगे, दोनों तरफ बांग्लाभाषी लोग’आकाशवाणी’ का मज़ा लेंगे।

गैस सब्सिडी पर
पिछले दिनों मुझे ऐसा पत्र मिला, मेरे मन को छू गया। 84 साल की एक माँ ने मुझे चिट्ठी लिखी। वह एक सेवानिवृत्त शिक्षक हैं। उन्होंने लिखा कि गैस सब्सिडी छोड़ने की आपकी अपील पर मैंने इसे छोड़ दिया था और बाद में मैं तो भूल भी गई थी। पिछले दिनों मुझे इस के लिए आपका धन्यवाद पत्र मिला। मेरे लिए भारत के प्रधानमंत्री का पत्र एक पद्मश्री से कम नहीं है। पेंशन पर गुजारा करने वाली एक मां जब 50,000 रुपये दूसरी गरीब माताओं को चूल्हे के धुएं से मुक्त कराने के लिए दे तो उनकी भावना मायने रखती है।

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