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रक्षा मंत्रालय ने पनडुब्बी मामले की जांच शुरू की

scorpiyanनई दिल्ली। रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के निर्देश पर नौसेना ने निर्माणाधीन स्कॉर्पीन पनडुब्बियों से जुड़ी खुफिया जानकारियां लीक होने के मामले की जांच शुरू कर दी है। हालांकि पर्रिकर ने कहा कि वह इस लीक को 100 फीसदी नहीं मानते, क्योंकि पनडुब्बी परियोजना के अंतिम एकीकरण का एक बड़ा हिस्सा भारत के पास है।

पर्रिकर ने बुधवार को कहा, मुझे पता चला है कि यह रात (मंगलवार) करीब 12 बजे हुआ। आने वाले कुछ दिनों में तस्वीर साफ हो जाएगी। वहीं, रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट देश को विचलित करने वाली है। स्कॉर्पीन पनडुब्बियों की पूरी तकनीक, राडार सिस्टम और इनके डिजाइन से जुड़े आंकड़े लीक हुए हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि पनडुब्बी के निर्माण से जुड़ी शायद ही कोई जानकारी अब गोपनीय है। बता दें कि फ्रांस की पनडुब्बी निर्माता कंपनी डीसीएनएस की मदद से इन पनडुब्बियों का निर्माण कर रही है। पहली पनडुब्बी 2016 के अंत तक बनकर तैयार होने की संभावना है।

नौसेना की सफाई: इस बीच, नौसेना ने बयान जारी कर कहा कि स्कॉर्पीन पनडुब्बियों से जुड़े दस्तावेजों की संदिग्ध लीक की जानकारी विदेशी मीडिया हाउस द्वारा से मिली है। नौसेना सूत्रों ने फ्रांसीसी पोत कंपनी के इस दावे को भी खारिज किया है कि जानकारी भारत से लीक हुई हो सकती है।

कंपनी ने क्या कहा
पनडुब्बियों का डिजाइन और निर्माण करने वाली फ्रांसीसी कंपनी डीसीएनएस कहा कि परियोजना से जुड़ी सूचनाओं तक अनाधिकृत पहुंच रोकने के लिए कंपनी के बीच कई और स्वतंत्र नियंत्रण व्यवस्थाएं हैं। हर डाटा का लेन-देन कूट भाषा में है और यह रिकॉर्ड रहता है। भारत के मामले में डीसीएनएस डिजाइन का निर्माण एक स्थानीय कंपनी ने किया है। डीसीएनएस प्रदाता है, लेकिन तकनीकी जानकारी का नियंत्रक नहीं है। इसलिए संभव है कि सूचनाएं भारत से ही लीक हुई हों।

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ऑस्ट्रेलिया की चिंता
ऑस्ट्रेलियाई अखबार के अनुसार, इस लीक के बाद ऑस्ट्रेलिया में उसकी अपनी नौसेना के भावी बेड़े से जुड़ी बेहद खुफिया जानकारी की सुरक्षा को लेकर डर पैदा हो गया है। ऑस्ट्रेलिया की पनडुब्बियों के बेडे़ का डिजाइन तैयार करने के लिए डीसीएनएस ने 50 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की निविदा में हासिल की है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मैलकॉम टर्नबुल ने कहा, यह बात ध्यान देने वाली है कि डीसीएनएस जो पनडुब्बी भारत के लिए बना रही थी, वह ऑस्ट्रेलिया के लिए बनने वाली मॉडल से पूरी तरह अलग है। जो जानकारी लीक की गई, वह कई साल पुरानी है। फिर भी, कोई भी गोपनीय जानकारी लीक होना चिंता का विषय है। कंपनी ने मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया को एक बार फिर आश्वासन देने की कोशिश की कि उसके साथ प्रस्तावित पनडुब्बी के साथ ऐसा कुछ नहीं होगा।

कैसे लीक हुई जानकारी?
ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ने कंपनी के हवाले से लिखा कि भारत के लिए स्कॉर्पीन का डाटा 2011 में फ्रांस में लिखा गया था। आशंका है कि उसी साल फ्रांसीसी नौसेना के एक पूर्व अधिकारी ने इस निकाल लिया था। वह अधिकारी उस समय डीसीएनएस का सबकॉन्ट्रैक्टर था। माना जा रहा है कि वह डाटा दक्षिण-पूर्वी एशिया की कंपनी में ले गया। उसने शायद एक क्षेत्रीय नौसेना की व्यावसायिक शाखा की मदद के लिए ऐसा किया। इसके बाद तीसरे पक्ष ने डाटा क्षेत्र की किसी दूसरी कंपनी को दे दिया, जिसने ऑस्ट्रेलिया की एक कंपनी को मेल से डाटा भेज दिया। डीसीएनएस ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि एशिया में यह डाटा किस हद तक साझा किया गया है या विदेशी खुफिया एजेंसियों ने भी हासिल किया है। हालांकि कुछ दस्तावेजों पर 2013 की तारीख है।

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