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लाल किले से प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान की दुखती रग पर रख दिया मजबूत हाथ

modi (6)नई दिल्ली। प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपने संबोधन के दौरान बिना नाम लिए ही आतंकवाद का संरक्षण करने के लिए पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया। मोदी ने कहा, ‘मानवता से पले-बढ़े लोग और आतंकवाद से साथ बढ़े लोग कैसे होते हैं, इसके लिए मैं विश्व के सामने दो चित्र रखना चाहता हूं। पेशावर में आतंकवादियों ने निर्दोष बच्चों को स्कूल में जान से मार दिया। घटना पेशावर में हुई, लेकिन हिंदुस्तान के संसद की आंखों में आंसू थे। भारत के हर स्कूल में इसका शोक था। आतंकवाद से मरने वाला पेशावर का बच्चा भी हमें दर्द दे रहा था। यह हमारी मानवता थी।’

मोदी ने आगे कहा, ‘दूसरी तस्वीर वह देखिए जहां आतंकवाद के महिमामंडन का काम किया जा रहा है। जहां किसी आतंकवादी हमले में निर्दोष लोग मारे जाते हैं, तो उस पर खुशियां मनाई जाती हैं। यह भेद दुनिया अच्छी तरह समझ लेगी। मैं मानवता में यकीन करने वालों से अपील करता हूं कि वे इन दोनों तस्वीरों को तराजू में तौलकर देखें।’

गिलगित, बलूचिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे पर पाकिस्तान को घेरते हुए मोदी ने कहा, ‘पिछले कुछ दिनों गिलगित, बलूचिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के लोगों ने मेरे प्रति जो सद्भावना जताई है, उसके लिए मैं उनका विशेष अभिनंदन करना चाहता हूं। उस जमीन को मैंने देखा नहीं, लेकिन वहां के लोग मेरा आदर करते हैं तो यह मेरे देश का सम्मान है। पाक के कब्जे वाले कश्मीर, बलूचिस्तान और गिलगित के लोगों के प्रति दिल से आभार प्रकट कर रहा हूं।’

बलूचिस्तान, गिलगित और PoK में हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं। यहां के लोग पाकिस्तानी आर्मी के अत्याचारों खिलाफ लंबे समय से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। बलूचिस्तान के नेताओं ने इस मामले में भारत से मदद भी मांगी है। पिछले दिनों पाकिस्तान द्वारा कश्मीर के मुद्दे को बार-बार भुनाने की कोशिश की गई। दक्षिणी कश्मीर में भारतीय सुरक्षा बलों के हाथों मारे गए हिजबुल आतंवादी बुरहान वानी को पाकिस्तान ने शहीद घोषित किया है। इसके समर्थन में पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ ने ब्लैक डे भी मनाया था।

पहली बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए बलूचिस्तान का मुद्दा स्पष्ट शब्दों में उठाया। पीएम ने कहा वह बलूचिस्तान, पाक के कब्जे वाले कश्मीर और गिलगित के लोगों को प्रति आभार व्यक्त करते हैं। उनके इस बयान पर बलूचिस्तान के लोगों ने प्रधानमंत्री के प्रति आभार जताते हुए यह मुद्दा UN में उठाने की अपील की थी। रविवार को पाकिस्तान ने कहा था कि वह अपनी जश्न-ए-आजादी को ‘कश्मीर की आजादी’ के नाम करना चाहता है।

मोदी ने पाकिस्तान सहित अपने पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण संबंध बनाने की भारत की कोशिशों का जिक्र करते हुए कहा, ‘जिस दिन हमारी सरकार ने शपथ लिया, उस दिन हमने SAARC देशों को बुलाया था। हम शांतिपूर्ण संबंध बनाकर सहयोग का रास्ता खोलना चाहते हैं। SAARC देशों की सबसे बड़ी चुनौती गरीबी है। हम मिलकर गरीबी से लड़ना चाहते हैं। मैं सभी पड़ोसियों को गरीबी से लड़ने के इस संघर्ष में शामिल होने का निमंत्रण देता हूं। हमारे पड़ोसी देश का गरीब भी अगर गरीबी से आजादी पाता है, तो हमें खुशी होगी।’

प्रधानमंत्री ने इस मौके पर आतंकवाद के साथ-साथ माओवाद और नक्सल समस्या का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘हिंसा और अत्याचार का भारत के लोकतंत्र में कोई स्थान नहीं है। कंधे पर बंदूक लेकर निर्दोषों को मारने का खेल चल रहा है। यह देश हिंसा और आतंकवाद को कभी सहन नहीं करेगा। यह देश हिंसा के सामने कभी नहीं झुकेगा।’ उन्होंने नक्सलवाद की ओर रुख कर गए लोगों से अपील करते हुए कहा, ‘अभी भी समय है। मैं उन नौजवानों से अपील करता हूं कि वे लौट आएं। वे लौटकर अपने मां-बाप की उम्मीदों को पूरा करें।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस की 70वीं वर्षगांठ पर लाल किले की प्राचीर से झंडा फहराया। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने देश को संबोधित किया। जानें, PM के भाषण में खास 20 बातें…

1. 15 अगस्त के दिन देश की आजादी के लिए बलिदान देने वालों की याद आती है। हो सकता है हर किसी को जेल जाने का सौभाग्य न मिला हो, लेकिन प्रत्येक हिंदुस्तानी महात्मा गांधी के नेतृत्व में देश की आजादी के लिए प्रतिबद्ध था। तब जाकर स्वराज्य प्राप्त हुआ।

2. सुदर्शन चक्र धारी से लेकर चरखाधारी मोहन तक हमारी यात्रा और विरासत हैं। वेद से विवेकानंद तक, उपनिषद से उपग्रह तक, महाभारत के भीम से भीमराव तक का इतिहास है भारत का। भारत की उम्र 70 साल नहीं है, लेकिन गुलामी के लंबे इतिहास के बाद जब हमें आजादी मिली और एक नई व्यवस्था के तहत हमने शुरुआत की, उस यात्रा को शुरु हुए 70 साल हो गए हैं।

3. पंचायत हो या संसद हो, ग्राम प्रधान हो या प्रधानमंत्री हो, हर लोकतांत्रिक संस्था को सुराज्य की ओर आगे बढ़ने के लिए अपनी जिम्मेदारियों को निभाना होगा। सरदार पटेल ने देश को एक किया, अब हमारा दायित्व है देश को श्रेष्ठ बनाएं।

4. यह सच है कि देश के सामने कई समस्याएं हैं, लेकिन देश में सामर्थ्य भी है। सामर्थ्य की शक्ति से समस्याओं से समाधान के रास्ते भी मिल जाते हैं।

5. शासन को जनता के लिए उत्तरदायी होना चाहिए। ऐसा न होने पर आम लोगों की समस्याएं ऐसे की ऐसी ही रहती हैं। बदलाव नजर नहीं आता। शासन को संवेदनशील होना चाहिए। हमें याद है वो भी एक दिन थे, जब किसी बड़े अस्पताल में जाना हो तो कितने दिनों तक इंतजार करना पड़ता था। AIIMS में 2-3 दिन के बाद जांच शुरू होती थी। अब यह व्यवस्था हमने बदली है। सब ऑनलाइन हो गया है।

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6. 2 साल के कार्यकाल में हमने अनगिनत काम किए। मैं भी लाल किले की प्राचीर से सरकार की बहुत सी उपलब्धियां बता सकता हूं, लेकिन उसका हिसाब देने के लिए मुझे यहां हफ्ते भर तक बोलना होगा।

7. सरकार में पारदर्शिता को बल देना बेहद महत्वपूर्ण है। मध्यम वर्ग पुलिस से ज्यादा इनकम टैक्स वालों से परेशान होता है। यह स्थिति मैं बदल कर रहूंगा।

8. देश में एक समय था कि सरकार कोई योजना घोषित करे, तो आम आदमी संतुष्ट हो जाता था। एक समय था कि जब तक योजना का खाना न आया तब तक लोग संतुष्ट नहीं होते थे। आज 70 साल में लोगों की मानसिकता बदली है। अब लोग तब मानते हैं जब धरती पर चीजें उतरती हैं। यहां पुरानी रफ्तार से काम नहीं हो सकता, हमें अपने काम की रफ्तार को और तेज करना होगा।

9. आज घर में कार हो, तो उसको प्रतिष्ठा का विषय माना जाता है। एक समय था कि जब घर में गैस-चूल्हा हो तो उसे सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता था। 60 साल में 14 करोड़ लोगों को रसोई गैस का कनेक्शन दिया गया था, वहीं हमने 60 सप्ताह में 4 करोड़ नए रसोई गैस कनेक्शन दिए।

10. मध्यम वर्ग के लोग पुलिस से ज्यादा इनकम टैक्स वालों से परेशान होते हैं। यह स्थिति मैं बदल कर रहूंगा।

11. प्रधानमंत्री जन-धन योजना मुश्किल काम था। इतने साल से बैंकिंग व्यवस्था थे, बैंक थे, लेकिन फिर भी आबादी के एक बड़े वर्ग के पास बैंक खाता नहीं है। हमने 21 करोड़ परिवारों को जन-धन योजना से जोड़कर असंभव से संभव हुआ। यह सरकार की उपलब्धि नहीं, बल्कि सवा सौ करोड़ नागरिकों की उपलब्धि है।

12. दिल्ली से केवल 3 घंटे की दूरी पर हाथरस इलाके में एक गांव नगला फटेला है। यहां पहुंचने में दिल्ली से केवल 3 घंटे लगते हैं, लेकिन वहां बिजली पहुंचने में 70 साल लग गए।

13. 18 गांवों में से 10 हजार गांवों में बिजली पहुंचा दी गई है। मुझे पता चला है कि उनमें से कई गांव आज पहली बार देश की आजादी के जश्न को टीवी पर देख रहे होंगे। हमने पुरानी सरकारों के काम को भी तवज्जो दी है। कई पुरानी सरकारों की बंद पड़ी योजनाओं को पूरा करने का हमने बीड़ा उठाया। 10 लाख करोड़ लागत की 270 योजनाएं ऐसी हैं जो पिछली सरकारों ने शुरू कीं, लेकिन वे अटकी रहीं। हमने उसके लिए फंड आवंटित किया, ताकि वह पूरी हो सकें।

14. LED बल्ब भारत में यह 350 रुपये में बिकता था। सरकार की आदत होती है कि जहां टांग नहीं अड़ानी चाहिए, वहां अड़ाती है और जहां काम करना चाहिए वहां नहीं करती। हमने इस स्थिति को बदला है। हमने 13 करोड़ बल्ब बांटे हैं। अभी 64 करोड़ और बांटने हैं। जिस समय 77 करोड़ LED बल्ब लग जाएंगे, तब 20 हजार मेगावाट बिजली बचा सकते हैं। इससे ग्लोबल वॉर्मिंग से भी लड़ा जा सकता है। हमने LED बल्बों की कीमत 50 रुपये कर दी है।

15. यह बात सही है कि पहले की सरकार में महंगाई दर 10 फीसद को भी पार कर गया था। हमारे लगातार कदमों के कारण हमने इसे 6 फीसद से आगे नहीं जाने दिया है। इसके बावजूद 2 साल देश में अकाल रहा। सब्जियों के दाम पर अकाल का सबसे पहले असर दिखता है। इसके कारण दाल के उत्पादन की गिरावट भी चिंता का विषय बना, लेकिन अगर पहले की सरकार की तरह महंगाई बढ़ी होती तो देश के गरीबों का पता नहीं क्या होता। मैं गरीब की थाली को महंगी नहीं होने दूंगा।

16. देश गुरु गोविंद सिंह जी की 350वीं जयंती मनाने जा रहा है। गुरु गोविंद सिंह जी कहते थे कि जिस हाथ ने कभी कोई सेवा ना की हो, जिसने कोई काम ना किया हो, जो हाथ मजदूरी से मजबूत ना हुए हों और उनमें गांठें ना पड़ी हों, तब तक मैं उसको पवित्र नहीं मान सकता। मैं ऐसे में किसान भाइयों को याद करता हूं। सूखे और अकाल के बावजूद उन्होंने देश के अन्न का भंडार भरने में योगदान दिया, उसको हम सलाम करते हैं।

17. किसान दलहन छोड़कर दूसरी फसलों की खेती पर चले गए थे। जब देश के आम लोगों को दाल की कमी महसूस हुई, तब किसान आगे आए और मुझे खुशी है कि इस बार दाल की बुवाई डेढ़ गुना ज्यादा हुई है। मैं उन्हें भरोसा दिलाना चाहता हूं कि उन्हें उनकी मेहनत का वाजिब और पूरा-पूरा हक मिलेगा। हमारे सरकार की नीयत साफ है।

18. किसान के पास मिट्टी है। उसे अगर पानी मिल जाए, तो मेरे देश के किसानों में इतना दम है कि वे जमीन से सोना निकाल लें। इसीलिए हम जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। सिंचाई सुविधाएं पर काफी काम हो रहा है। सौर ऊर्जा से चलने वाले पंपों पर भी हम काफी काम कर रहे हैं। इससे किसानों की लागत कम होंगी। अबतक हमने 77 हजार सोलर पंप बांटे हैं। अब किसानों की खुशहाली आएगी।

19. हमारे वैज्ञानिकों ने 171 से ज्यादा नए बीज विकसित किए हैं। वे देश की जलवायु और मिट्टी के हिसाब से इन बीजों को विकसित कर रहे हैं। इससे उपज बढ़ेगी। पहले खाद और यूरिया की कमी होती थी। हमने सबसे ज्यादा खाद का उत्पादन किया है। हमने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना बनाई। पहली बार कम से कम प्रीमियम से अधिक से अधिक और गारंटीड लाभ मिल रहा है।
हमने 15 लाख टन अन्न के भंडारण के लिए गोदामों का निर्माण कराया है।

20. मेरा मकसद 2022 तक देश के किसानों की आमदनी को दोगुना करना है। देश में पहले की सरकारों ने अपने फायदे के लिए बहुत काम किया है। हमारे यहां एकाध लोकरंजक योजनाएं बनाकर सरकारों द्वारा अपनी पहचान बनाए जाने का चलन रहा है। हमने सरकार की पहचान को प्राथमिकता नहीं दी, बल्कि देश की पहचान को महत्व दिया है।

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