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कश्मीर के 7 बड़े नरसंहार, सरेआम मारे जाते थे पंडित, बच्चों का करते थे ऐसा हाल

श्रीनगर। आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद आतंकी संगठन लश्कर-ए-इस्लाम ने पुलवामा में कई जगह पोस्टर लगाए हैं। जिसमें कहा गया है कि कश्मीरी पंडित या तो घाटी छोड़ दें या फिर मरने के लिए तैयार रहें। बता दें कि कश्मीर में साल 1990 में हथियारबंद आंदोलन शुरू होने के बाद से लाखों कश्मीरी पंडित अपना घर-बार छोड़ कर चले गए थे, उस वक्त हुए नरसंहार में सैकड़ों पंडितों का कत्लेआम हुआ था। बच्चों को तक नहीं बख्शा गया था।
कश्मीरी पंडित के 7 बड़े नरसंहार
mass-acre12003 नदिमार्ग नरसंहार
पुलवामा जिले के नदिमार्ग गांव में आतंकियों ने 24 हिंदुओं को मौत के घाट उतार दिया था। बताया जाता है कि आधीरात हथियारबंद आतंकी मिलिट्री की ड्रेस में नदिमार्ग गांव आए और लोगों को घरों से बाहर निकाला और एक कतार में खड़े कर गोलियों से भून दिया था। इसके बाद महिलाओं के शवों से गहने उतारे और घरों में लूटपाट भी की। उस वक्त की मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस घटना की जिम्मेदारी आतंकी संगठन लश्कर- ए- तैयबा ने ली थी।
kashmiiiiiचित्ती सिंघपोरा नरसंहार
20 मार्च 2000 को होला मना रहे 36 सिखों की गुरुद्वारे के सामने आतंकियों ने गोली मार कर हत्या कर दी। बताया जाता है कि आतंकी दो ग्रुप्स में आए और गांव के दो अलग- अलग गुरुद्वारे के सामने होला मना रहे सिखों को कतार में खड़ा कर गोलियों से भून दिया था।
kashmir-massacre25 जनवरी, 1998 वंधामा नरसंहार
हथियारबंद आतंकियों ने 4 कश्मीरी पंडित परिवार के 23 लोगों को गोलियों से भून कर मार डाला था। मिलिट्री की ड्रेस में आए आतंकियों ने पहले गांव में आकर चाय पी फिर रेडियो पर गांव के सभी हिन्दू परिवारों को घेरने की खबर मिलते ही उन्हें मौत के घाट उतार दिया। बताया जाता है कि वंधामा के पंडितों ने आतंकियों की धमकी नज़र अंदाज करते हुए कश्मीर में रहने का फैसला किया था।
rsप्रानकोट नरसंहार- अप्रैल 17, 1998
उधमपुर जिले के प्रानकोट गांव में एक कश्मीरी हिन्दू परिवार के 27 मौत के घाट उतार दिया था, इसमें 11 बच्चे भी शामिल थे। इस नरसंहार के बाद डर से पौनी और रियासी के 1000 हिंदुओं ने पलायन किया था।
20022002 क्वासिम नगर नरसंहार
क्वासिम नगर नरसंहार आतंकियों द्वारा कश्मीर में किए गए सबसे भीषण नरसंहार में से एक था। उस वक्त की मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आतंकी रात आठ बजे क्वासिम नगर बस्ती में गए, यह स्लम एरिया में कई हिन्दू मजदूर रहते थे। बस्ती में घुसकर आतंकियों ने ग्रेनेड फेंके और लोगों पर एके 47 से अंधाधुन फायरिंग की। इस नरसंहार में 29 हिन्दू मजदूरों की मौत हो गई थी । जिनमें 13 महिलाएं और एक बच्चा शामिल था।
dodaडोडा नरसंहार- 2006
आतंकियों ने डोडा जिले में 35 हिन्दुओं को मौत के घाट उतार दिया था। ये हमले दो अलग-अलग जगह गांवों में हुए थे। बताया जाता है कि आतंकियों ने भेड़ चराने वाले हिन्दू परिवारों को निशाना बनाया था।
2001 जम्मू कश्मीर रेलवे स्टेशन नरसंहार
सेना के भेष में आतंकियों ने रेलवे स्टेशन पर गोलीबारी कर दी, इसमें 11 लोगों की मौत हो गई।
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