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घाटी में ‘आजादी’ की जगह गूंज रहे पाकिस्तान परस्त नारे

pro-pakistanश्रीनगर। शुक्रवार को कश्मीर घाटी में कर्फ्यू का 34वां दिन था। हाल के वर्षों में कर्फ्यू का यह दौर सबसे लंबा है। पूरे कश्मीर में सड़कों और गलियों में अलगाववादी भीड़ का कब्जा दिख रहा है। 14 अगस्त को पाकिस्तान की आजादी के दिन पाकिस्तानी झंडा फहराने के लिए जगह-जगह प्लेटफॉर्म्स बनाए जा रहे हैं। कश्मीरियों के गले से निकलने वाले ‘आजादी’ के नारों की जगह पाकिस्तान के समर्थन में लगने वाले नारों ने ले ली है। इन हालातों में केंद्र और राज्य सरकार के लिए गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

राज्य के एक पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘कश्मीर में चल रहे तनाव और अशांति के पीछे पाकिस्तान की भूमिका और साफ हो गई है। पूरे कश्मीर में भारत विरोधी रैलियों के दौरान पाकिस्तानी झंडे लहराए जा रहे हैं।’ पाकिस्तान समर्थक अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने कश्मीरी आवाम से पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस मनाने की अपील की है। उन्होंने लोगों से इस दिन पाकिस्तान की तरक्की और स्थिरता के लिए विशेष प्रार्थनाएं करने को कहा। कश्मीर में हालात काफी तनावपूर्ण और संवेदनशील बने हुए हैं। प्रशासन ने ना केवल निजी टेलिकॉम सेवाओं को ब्लॉक कर दिया है, बल्कि मोबाइल इंटरनेट को भी फिलहाल स्थगित कर दिया है।

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पुलिस ने मस्जिदों में नमाज पढ़ने वाले मौलवियों को भड़काऊ भाषण ना देने की अपील की है। उधर एक कश्मीरी युवक की मौत पर शुरू हुए विवाद को खत्म करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अहम फैसला दिया। अदालत ने 22 साल के शबीर अहमद मीर का शरीर कब्र से निकालकर उसका फिर से पोस्टमॉर्टम करने का निर्देश दिया है। शबीर के परिवार का आरोप है कि पुलिस ने बहुत नजदीक से उसे गोली मारी या फिर पुलिस की कार्रवाई के दौरान पैलेट गन से लगे छर्रों के कारण उसकी मौत हुई। शबीर की मौत 10 जुलाई को हुई थी।
शुक्रवार को कश्मीर के कुलगाम जिले में आतंकियों द्वारा की गई गोलीबारी में एक कॉन्स्टेबल सहित एक आम आदमी की मौत हो गई और 2 अन्य लोग घायल हो गए। दोनों घायलों में से एक की हालत गंभीर बनी हुई है।

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