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राज्य की नई बंदरगाह विकास निधि पर कैबिनेट की मुहर

Sea4मुंबई। फडणवीस सरकार की नई बंदरगाह नीति को सफलता मिली तो निश्चित ही महाराष्ट्र के समुद्र तटों का नजारा ही बदल जाएगा। प्राइवेट क्षेत्र को बंदरगाह बनाने के लिए फडणवीस सरकार ने सोमवार को राज्य कैबिनेट में नई व्यापक बंदरगाह विकास नीति-2015 को हरी झंडी दे दी। इससे पहले सन 2010 में ऐसी ही एक नीति बनाई गई थी जिसे सफलता नहीं मिली। नई बंदरगाह नीति में सरकार कई तरह की टैक्स में रियायत देने जा रही है। नई नीति में व्यापार के अलावा इस बात का भी ध्यान दिया गया है कि इसका उपयोग परिवहन के लिए किया जाए। इसमें महाराष्ट्र मेरीटाईम बोर्ड (एमएमबी) की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

महाराष्ट्र का समुद्री किनारा 720 किलोमीटर तक फैला हुआ है जिसमें मुंबई का 114 किलोमीटर, ठाणे और पालघर जिला का 127 किलोमीटर, रायगढ जिला का 122 किलोमीटर, रत्नागिरी का 237 किलोमीटर और सिंधुदुर्ग 120 किलोमीटर तक पसरा हुआ है। इन समुद्र तटों पर दो बड़े बंदरगाह, मुंबई पोर्ट ट्रस्ट और जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह ट्रस्ट हैं जिस पर केंद्र सरकार का नियंत्रण है। महाराष्ट्र सरकार के अख्तियार में 48 छोटे बंदरगाह हैं जो ज्यादा सक्रिय नहीं है। सरकार उन बंदरगाहों को सक्रिय करने के साथ-साथ नए बंदरगाह बनाना चाहती है। सरकार का कहना है कि नई बंदरगाह नीति में हर 50 किलोमीटर के दायरे में एक बंदरगाह होगा।

नई बंदरगाह नीति में परोक्ष या अपरोक्ष रूप से सरकार भी शामिल होगी। निजी क्षेत्र के साथ पार्टनरशिप करेगी। बंदरगाह तक आने-जाने के लिए बुनियाद सड़क मार्ग, रेल मार्ग इत्यादि की सुविधा मुहैया कराएगी। नए बंदरगाह से आयात-निर्यात सुलभ होगा। सरकार बंदरगाहों पर आधुनिक बुनियादी सुविधाओं मुहैया कराने के अलावा बंदरगाह निर्माण, नौपरिवहन व्यवसाय के लिए आवश्यक निर्माण कार्य, जहाज बनाने व रिपेयरिंग करने की कंपनी बनाने के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा।

बंदरगाह के विकास के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के लिए महाराष्ट्र पोर्ट कनेक्टिविटी कॉर्पोरेशन का गठन किया जाएगा जिसमें सागरमाला डिवेलमेंट कंपनी, महाराष्ट्र मेरिटाईम बोर्ड और उद्योग विभाग का समावेश होगा। इसे विशेष उद्देश्य वाहन (SPV) कंपनी के माध्यम से लागू किया जाएगा। एसजीवी में कनेक्टिविटी कॉर्पोरेशन एक होल्डिंग कंपनी रहेगी। कोकण रेलवे, रेल विकास निगम लिमिटेड, सार्वजनिक निर्माण विभाग जैसे सरकारी संस्था अथवा कंपनी वैसे ही संबंधित डिवेलपर्स इसमें शामिल होंगे।

मिलेगा प्रोत्साहन

बंदरगाह बनाने के लिए आर्थिक सहूलियत देना भी नई नीति में शामिल है। इसके अलावा इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी, मुद्रांक शुल्क, बिजली दर में छूट, वैट में रियायत और बंदरगाह बनाने में रियायत मिलेगी। वैसे ही शिपयार्ड के लिए इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी, मुद्रांक शुल्क, बिजली दर में छूट, जहाज बेचने पर वैट शुल्क में भी रियायत मिलेगी।

महाराष्ट्र मेरीटाईम बोर्ड की महत्वपूर्ण भूमिका

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– 720 किमी के दायरे में दो बड़े और 48 छोटे बंदरगाह है

– दोनों बड़े बंदरगाहों पर केंद्र सरकार का शासन

– हर 50 किलोमीटर पर एक बंदरगाह बनाने की संभावना

– बंदरगाह तक बुनियादी सुविधा राज्य सरकार मुहैया कराएंगी

– आयात-निर्यात को मिलेगा बढ़ावा

– ग्रीनफिल्ड बंदरगाह,कॅप्टिव्ह जेटी, बहुउद्देशीय जेटी और शिपयार्ड प्रकल्प

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