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जम्मू-कश्मीर को ज्यादा स्‍वायत्‍तता दी जाए: चिदंबरम

chidambaram22नई दिल्‍ली। कांग्रेस नेता और पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने कश्‍मीर समस्‍या के समाधान का रास्‍ता सुझाया है। उनका कहना है कि इस समस्‍या का समाधान तभी हो सकता है जब जम्‍मू कश्‍मीर को ज्‍यादा स्‍वायत्‍तता दी जाए और अगर ऐसा नहीं किया गया तो देश को ‘भारी कीमत’ चुकानी पड़ेगी।

चिदंबरम ने बुधवार को उस ‘बड़े समझौते (ग्रैंड बारगेन)’ की वकालत की जिसके तहत कश्मीर का भारत में विलय हुआ था और उसे व्यापक स्वायत्‍तता दी गई थी। एक इंटरव्‍यू के दौरान चिदंबरम ने कहा, ‘मैं समझता हूं कि उनका तरीका गलत है। हमने उस बड़े समझौते की अनदेखी की है, जिसके तहत कश्मीर का भारत में विलय हुआ था। मेरा मानना है कि हमने भरोसा तोड़ा, हमने वादे तोड़े और नतीजा यह हुआ कि हमने भारी कीमत चुकाई है।’

चिदंबरम ने कहा कि उनके मुताबिक सबसे बेहतर समाधान यह है कि नई दिल्ली को कश्मीर की जनता को यह आश्वासन देना चाहिए कि कश्मीर के विलय होने के समय जिस ‘बड़े समझौते’ का वादा किया गया था ‘उसका पूरी तरह पालन किया जाएगा।’ उन्‍होंने कहा, ‘मैं गलत हो सकता हूं, मैं सही हो सकता हूं लेकिन जरूरी तो यह आश्वासन देना है कि बड़े समझौते का पूरा पालन किया जाएगा। जहां तक संभव हो, उन्हें (कश्मीर के लोगों को) अपने कानून बनाने दीजिए और तब तक बनाने दीजिए जब तक यह संविधान से परे न जाता हो।’
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘हमें सुनिश्चित करना है कि हम पहचान, इतिहास, संस्कृति, धर्म का सम्मान करेंगे।’ उत्तर और पूर्व के तमिल क्षेत्रों को ज्यादा अधिकार देने को लेकर भारत की ओर से श्रीलंका को दी जाने वाली सलाह का जिक्र करते हुए चिदंबरम ने कहा कि हम श्रीलंका को जो उपदेश देते हैं, उसे हमें खुद पर भी लागू करना चाहिए।

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साथ ही चिदंबरम ने यह भी माना कि पूर्ववर्ती यूपीए सरकार भी इस मुद्दे से ठीक तरीके से नहीं निपट सकी। उन्‍होंने कहा, ‘हम (यूपीए सरकार) ठीक से नहीं निपट सके। लेकिन 2010 में हमने खुद को सुधारा। अब दिल्ली और श्रीनगर की सरकारें बहुत-बहुत बुरे ढंग से हालात से निपट रही हैं।’

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