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कमलकान्त बलात्कार काण्ड विवेचना ट्रांसफर की क्यों न हो सीबीआई जांच: हाईकोर्ट

kamalkantइलाहाबाद/मथुरा। उपजा के प्रदेश उपाध्यक्ष कमलकांत उपमन्यु को एमबीए की छात्रा के यौन उत्पीड़न के मामले में विवेचना ट्रांसफर को लेकर हाईकोर्ट ने तगड़ा झटका देते हुए यूपी सरकार से पूछा है कि क्यों न मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी जाये। न्यायालय ने मुख्यमंत्री के ओएसडी, डीजीपी, एसएसपी को तलब कर न्यायालय में उपस्थित होकर शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश दिये हैं। अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।
मथुरा की एमबीए छात्रा के यौन उत्पीड़न के आरोपी उपजा के प्रदेश उपाध्यक्ष कमलकांत उपमन्यु के खिलाफ 6 दिसम्बर 2014 को हाईवे थाना में मामला दर्ज किया गया था। जिसकी विवेचना उपमन्यु द्वारा अपने प्रभाव से फिरोजाबाद ट्रांसफर करा ली थी। जिसे बार एशोसियेशन मथुरा के अध्यक्ष विजय पाल सिंह तोमर ने चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर दी।

जनहित याचिका हाईकोर्ट में लम्बित थी कि फिरोजाबाद पुलिस ने पीड़ित छात्रा के एक शपथ पत्र के आधार पर मथुरा न्यायालय में एफआर दाखिल कर दी थी। जिसे मथुरा न्यायालय ने इस शर्त के साथ पिछले दिनों स्वीकार कर लिया था कि हाईकोर्ट में पीआईएल का निर्णय एफआर पर मान्य होगा।

उधर दूसरी ओर इलाहाबाद हाईकोर्ट में विजयपाल सिंह तोमर की जनहित याचिका संख्या 3883/2015 पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश अरूण टण्डन एवं सुनीता अग्रवाल ने प्रदेश महाअधिवक्ता से पूछा कि आखिर बलात्कार पीड़िता का न्यायालय में ब्यान दर्ज होने के बावजूद भी विवेचना को अभियुक्त के भाई के प्रार्थना पत्र पर क्यों ट्रांसफर किया गया।

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न्यायाल ने कहा कि उच्च अधिकारियों ने गंभीर मामले में हस्तक्षेप कर जनता में कानून के प्रति विश्वास कम किया है न्यायालय ने मुख्यमंत्री के ओएसडी जगजीवन राम, डीजीपी उ.प्र., एसएसपी मथुरा को विवेचना ट्रांसफर किये जाने पर तलब करते हुऐ 25 जुलाई 2016 को न्यायालय में उपस्थित होकर शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश देते हुऐ कहा कि क्यों न मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी जाये। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।
बताते चलें कि उक्त बलात्कार मामले में 3 दिसम्बर 2014 को पीड़िता एमबीए की छात्रा ने एसएसपी मंजिल सैनी को प्रार्थना पत्र देकर कमलकांत उपमन्यु पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी। जिसमें एसएसपी द्वारा मामले की जांच के नाम पर जहां पीड़िता पर समझौते का दबाव बनाया गया बल्कि पीड़िता के भाई के खिलाफ भी छेड़छाड़ का मामला दर्ज करा दिया गया। पीड़िता छात्रा द्वारा संसद भवन पर आत्मदाह करने का एसएमएस उच्च अधिकारियों को किये जाने पर 6 दिसम्बर 2014 को अपराध संख्या 944/2014 पर आईपीसी की धारा 376 एवं 506 के तहत दर्ज कर पीड़िता का डाक्टरी परीक्षण कराकर न्यायालय में 164 के ब्यान दर्ज कराये गये।
बताया जाता है कि एक तरफ 22 दिसम्बर 2014 को मथुरा न्यायालय द्वारा कमलकांत उपमन्यु के खिलाफ धारा 82 दण्ड प्रक्रिया के तहत नोटिस जारी कर उसे 23 दिसम्बर 2014 को उपमन्यु की कोठी पर चस्पा किया जा रहा था। दूसरी तरफ उ.प्र. मुख्यमंत्री के ओएसडी जगजीवन राम 19/12/2014 के पत्र के आधार पर मामले को गंभीर मानते हुए डीजीपी लखनऊ से विवेचना ट्रांसफर की संतुति जारी की गई जिसके आधार पर 22-12-2014 को डीजीपी द्वारा मथुरा एसएसपी को विवेचना ट्रांसफर करने का आदेश जारी किया जिसमें 23 दिसम्बर 2014 को एसएसपी मथुरा द्वारा डीजीपी के आदेश पर फिरोजाबाद के लिये विवेचना ट्रांसफर की संतुति की गई।

जिसके खिलाफ विजय पाल सिंह तोमर द्वारा 11 फरवरी 2015 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दाखिल की गई थी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद कमलकांत उपमन्यु एवं मामले से जुड़े अनेक उच्च अधिकारियों, माफियाओं, बिल्डरों एवं कथित पत्रकारों में हड़कम्प मचा हुआ है। माना जा रहा है कि अगर मामले की जांच हाईकोर्ट द्वारा सीबीआई को सौंपी जाती है तो कई बड़े चेहरों से नकाब उतरकर जेल की सीखचों में जा सकते हैं।

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