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कश्मीर पर कांग्रेस ने क्या किया अभी यह बताना ठीक नहीं, यह काम इतिहासकारों का: अरुण जेटली

arun22नई दिल्ली। कश्मीर के मुद्दे पर कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि देशहित सर्वोपरि है। देश का जिसमें लाभ हो, वही काम करना चाहिए और वहीं हमारी सोच होनी चाहिए। पढ़ें, राज्यसभा में अरुण जेटली द्वारा दिए गए भाषण के मुख्य अंश-

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  • जेटली ने कहा कि यह सच है कि पर्यटन बंपर रहा है। अमरनाथ यात्रा पर भी काफी संख्या में लोग जाने को तैयार रहे। जेटल ने कहा कि केवल ये सोच लेना कि बीजेपी-पीडीपी की सरकार की प्रतिक्रिया में यह हो रहा है कहना राजनीतिक सोच हो सकती है।
  • कश्मीर पर कांग्रेस ने क्या किया यह बताना अभी ठीक नहीं है। यह काम इतिहासकारों का है। उन्होंने कहा कि लेह लद्दाख में भी हमारा समर्थन है।
  • घाटी में हमारी सरकार बनना मजबूरी थी। यही विकल्प उपलब्ध था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने पीडीपी, एनसी के साथ मिलकर सरकार बनाई। अब हम उस स्थिति हैं तो यह विरोध का कारण बन जाता है।
  • जेटली ने कहा कि देश की खातिर पीडीपी के साथ समझौता हुआ। आज की स्थिति का मूल कारण गठबंधन नहीं था। न ही टेलीविजन का कार्यक्रम था। यह स्पष्ट है कि जब से देश आजाद हुआ और बंटवारा हुआ, हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान ने कभी भी कश्मीर को भारत का हिस्सा नहीं माना। इसलिए वह कश्मीर पर राजनीति और एजेंडा चलाते रहे।
  • एक लड़ाई भी लड़ी और वह समझ गया कि वह जीत नहीं सकता। यह समझ गया कि ऐसे कश्मीर नहीं मिलेगा। इसलिए उन्होंने आतंकवाद का सहारा लिया। इसमें निर्दोष लोग मारे गए, सुरक्षाकर्मी मारे गए और आतंकवादी भी मारे गए।
  • एक समय ऐसा आया कि विश्व ने माना आतंकवाद से कुछ भी हासिल होगा। आज पूरे विश्व में आतंकवाद के खिलाफ माहौल है। इसलिए अलगाववादियों ने रणनीति बदली है।
  • आईएसआईएस से लोग प्रेरणा पाकर गुमराह हो रहे हैं। 10-15 साल पहले भारत में अलकायदा से जुड़ा कोई आदमी नहीं था। आईएस से ज्यादा लोग भारत में जुड़े नहीं हैं यह गौरव की बात है।
  • 8 जुलाई को जम्मू-कश्मीर की पुलिस ने आतंकवादियों की सूचना पर कार्रवाई की। वह आतंकवादी यूथ आईकन बन रहा था। पुलिस ने एनकाउंटर में उसे मार गिराया। यह विरोध इस बात का था कि एक आइकन पुलिस की टुकड़ी ने मार गिराया।
  • जब हजारों लोग सुरक्षा बल हमला करने लगे और थानों पर हमला करने लगे तो कार्रवाई होगी। यह विषय चर्चा को हो सकता है कि कितनी फोर्स का इस्तेमाल होना चाहिए यह मौके पर तैनात पुलिस और सुरक्षाबल का निर्णय है।
  • बेगुनाह पर अत्याचार गलत है इसे कोई स ही नहीं कहेगा। जम्मू-कश्मीर का आवाम देश के साथ है। इसलिए सरकार किसी के साथ अन्याय नहीं होने देगी। उतनी ही ताकत का इस्तेमाल होगा जितने की जरूरत है।
  • वहां आदमी को तकलीफ न हो, ऐसा प्रयास हो रहा है। वहां के नौजवानों को हमने देखा है, वह मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। इसलिए कोई यह नहीं चाहेगा कि वह एलियेनेट हों।
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