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बसपा का दो हिस्सों में बंटना लगभग तय : दीनानाथ भास्कर

pd logलखनऊ। यूपी में फिर से सरकार बनाने का सपना मायावती का धाराशाही हो सकता है. दरअसल माया के अपने ही अब बेगाने बनते नजर आ रहे हैं. पार्टी में बहनजी से नाराज बैठे MLA कब उन्हें छोड़कर चले जायेंगे. इस बात कि खबर तक पार्टी सुप्रीमो को नहीं है. बताया जाता है कि चुनाव से पहले पार्टी के करीब दो दर्जन से अधिक विधायक पार्टी छोड़कर जा सकते है.

पूर्व मंत्री दीनानाथ भास्कर का दावा 

बहुजन समाज पार्टी बसपा के संस्थापक सदस्य रहे पूर्व मंत्री दीनानाथ भास्कर ने आज एक न्यूज़ एजेंसी को दिए गए बयान में यह दावा किया है कि स्वामी प्रसाद मौर्या और आर. के. चौधरी के पार्टी छोड़ने के बाद आगामी अगस्त तक 28 विधायक बसपा से इस्तीफा देकर एक नयी पार्टी का हिस्सा बनेंगे. उन्होंने कहा है कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे स्वामी प्रसाद मौर्य और बसपा के संस्थापक सदस्य रहे आर. के. चौधरी का हाल में पार्टी छोड़ना महज इत्तेफाक नहीं है. उन्होंने दावा किया कि आगामी अगस्त तक 28 विधायक बसपा से इस्तीफा देकर एक नयी बनने वाली पार्टी में शामिल होंगे.

जुलाई तक कई नेता छोड़ देंगे पार्टी 

उन्होंने यह भी दावा किया कि 10 जुलाई तक कई पूर्व एवं वर्तमान विधायक बसपा छोड़ देंगे. आगामी सितम्बर में लखनउ के रमाबाई अम्बेडकर मैदान में होने वाली रैली में बसपा छोड़ने वाले सभी विधायक मौजूद रहेंगे. भास्कर ने कहा कि बसपा प्रमुख मायावती कहती हैं कि उनकी पार्टी छोड़कर जाने वाले सभी नेताओं का सियासी वजूद खत्म हो गया है, लेकिन अब हालात बदल गये हैं. बसपा में अब भी कई लोग गफलत में हैं और पार्टी में छोड़ने में जो भी ज्यादा देर करेगा, उसे उतना ही नुकसान होगा.

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बसपा के बन सकते है दो दल 

मालूम हो कि बसपा के महासचिव और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे स्वामी प्रसाद मौर्य तथा बसपा संस्थापक कांशीराम के करीबी सहयोगी रह चुके आर. के. चौधरी ने पिछले महीने बसपा प्रमुख मायावती पर चुनाव के टिकट बेचने समेत कई गम्भीर आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी थी. जिसके बाद यह अटकलें जोरों पर थीं कि अभी कई और नेता बसपा छोड़ेंगे. फिलहाल पूर्व मंत्री का यह दावा अगर सही साबित होता है तो बसपा दो धड़ में बंट जाएगी.

भाई और बहन के हाथ में होगी कमान 

इसमें से एक की कमान जहां मायावती के पास होगी वहीँ दूसरी की कमान उनके मुंहबोले गद्दार भाई स्वामी प्रसाद मौर्या के पास होगी. जिसके चलते आने वाले समय में वह बसपा के लिए बड़ी मुसीबतें खड़ी कर सकते है. समझा जाता है कि इस बात की चिंता बहनजी को अभी से सताने लगी है. अगर ऐसा होता है तो दलित ही नहीं पिछड़ा वर्ग  का भी वोट दोनों और बंट जायेगा, जिसका सबसे अधिक नुकसान मायावती को होगा. साथ ही उनका वह ख्वाब   भी अधूरा रह जायेगा जो उन्होंने  इस बार अपनी सरकार यूपी में बनाने का देखा था.

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