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PM मोदी की फटकार के बाद स्वामी को याद आया गीता का ज्ञान!

28swamywww.puriduniya.com नई दिल्ली। BJP की ऑफिशल लाइन से इतर बोलने के लिए सुर्खियों में रहने वाले राज्यसभा सदस्य सुब्रमण्यन स्वामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘फटकार’ के एक ही दिन बाद ‘गीता के उपदेशों’ की शरण ले ली। सोमवार को प्रधानमंत्री ने सुब्रमण्यन स्वामी के तौर तरीकों को इशारों में ही ‘पब्लिसिटी स्टंट’ करार दिया। हालांकि मोदी ने स्वामी का नाम नहीं लिया लेकिन मंगलवार सुबह सुब्रमण्यन स्वामी का ट्ववीट काफी कुछ कह रहा था। मंगलवार को ही PM मोदी और वित्त मंत्री जेटली की मुलाकात भी होनी है।

स्वामी ने ट्विटर पर कहा, ‘दुनिया अपने सामान्य संतुलन की अवस्था में रहती है। किसी एक सिरे पर किए गए छेड़छाड़ का असर सभी तरफ होता है। ऐसी सलाह कृष्ण ने दी है: सुख दुखे…’ दरअसल गीता उपदेश में श्रीकृष्ण ने कहा है, ‘सुख दुखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ, ततो युद्धाये युज्यस्व नैवं पापम्वाप्स्यासी!!!’ इसका मतलब हुआ, ‘सुख दुःख, लाभ नुकसान, जीत हार में अपने को सम रखकर युद्ध करो। इस तरह तुम पाप से बच सकते हो।’

इस बीच मंगलवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली और प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात भी होनी है। सियासी गलियारों में कहा जा रहा है कि वित्त मंत्री अरुण जेटली इन दिनों सुब्रमण्यन स्वामी के जुबानी प्रहार की वजह से नाराज हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जेटली के एक विश्वस्त सहयोगी का कहना है कि स्वामी के ट्विटर पर किए हमलों को व्यक्तिगत राय कहकर नहीं छोड़ा जा सकता। स्वामी पार्टी के सदस्य हैं।

राज्यसभा सांसद ने लगातार वित्त मंत्री पर सार्वजनिक हमले किए और बाद में उन्होंने मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन, आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांता दास और RBI गवर्नर रघुराम राजन पर भी विवादित बयान दे चुके हैं। सूत्रों का कहना है कि BJP में स्वामी ने मौजूदा सरकार में उनकी प्रभावशाली स्थिति को समझे बिना ही हमला कर दिया है।
78 वर्षीय नेता पर BJP के सबसे कद्दावर चेहरों में से एक पर सार्वजनिक आक्रमण के बदले कार्रवाई जरूर होगी। BJP के अंदर ही एक हिस्सा ऐसे लोगों का भी है जो समझ रहे हैं कि स्वामी और जेटली के बीच का यह विवाद अतीत की तल्खियों का ही एक और चरण है। बहरहाल, जो भी हो अब तक किसी BJP नेता ने सार्वजनिक तौर पर स्वामी के बयान की निंदा नहीं की और इसे व्यक्तिगत विचार कह प्रतिक्रिया देने से भी बचते रहे।

अभी तक स्वामी के बयानों के लिए उन पर सार्वजनिक तौर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो पार्टी के अंदर एक कैंप स्वामी की आग उगलने वाली राजनीति की तुलना में जेटली के लिए सहानुभूतिपूर्ण रवैया रख रहा है। पार्टी के सदस्यों का मानना है कि एक बार फिर वित्त मंत्री की गरिमा पर हमला किया जा रहा है।

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