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सनातन संस्था के निशाने पर पुलिस अफसर, लेखक और पत्रकार भी!

27 KALBURGI-MURDER-PROBEwww.puriduniya.com मुंबई। सनातन संस्था के निशाने पर पुलिस अफसर, लेखक और पत्रकार भी हैं। अंधविश्वास के खिलाफ लड़ने वाले कार्यकर्ता नरेंद्र दाभोलकर, सीपीआई नेता गोविंद पानसरे और तर्कवादी एम एम कलबुर्गी की हत्या में इसी संगठन के काडरों की जांच चल रही है।

सीबीआई अधिकारियों ने बताया कि सनातन संस्था के गिरफ्तार कार्यकर्ता वीरेंद्र तावड़े की ईमेल के जरिए पता चला है कि उन्होंने ‘राक्षसों’ की लिस्ट तैयार की थी, जो ‘हिंदू धर्म के खिलाफ’ के खिलाफ काम कर रहे थे। इन कार्यकर्ताओं ने ऐसे लोगों को ‘राष्ट्र-विरोधी’ की कैटिगरी में रखा था।

तावड़े और सनातन के बाकी सदस्य एक-दूसरे को उन लोगों के बारे में लिखकर बताते थे, जो ‘हिंदुओं के खिलाफ’ थे। इस लिस्ट में कम से कम 7 ऐसी बड़ी शख्सियतों के नाम हैं। एक नाम जाने-माने सीनियर पत्रकार का है, जो मराठी न्यूज चैनल के हेड हैं और सनातन को लेकर आलोचनात्मक रहे हैं। साथ ही इस संस्था के निशाने पर महाराष्ट्र के एक सीनियर पुलिस अफसर भी हैं।

सीबीआई के एक अधिकारी ने बताया कि ईमेल में नाम काफी पहले भेजे गए, लेकिन सदस्यों ने इन लोगों की ‘गैर-हिंदू’ गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए रखी। जांच अधिकारियों को शक है कि दाभोलकर को इसलिए मारा गया क्योंकि वह महाराष्ट्र विधानसभा में अंधविश्वास के खिलाफ कानून पास करवाने को लेकर सक्रिय थे। उनकी हत्या 20 अगस्त 2013 को की गई।

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सतनाम के कार्यकर्ता अपनी ईमेल में कोड वर्ड का इस्तेमाल करते थे और यह इंग्लिश, मराठी और संस्कृत में है। मिसाल के तौर पर जिन लेखकों को इन लोगों ने ‘गैर-हिंदू, गैर-राष्ट्रवादी’ रवैये के कारण निशाने पर ले रखा था, उन्हें ‘साहित्य अकादमी’ का नाम दिया गया था।

सीबीआई अधिकारियों ने बताया कि दाभोलकर, पानसरे और कलबुर्गी के नामों के अलावा इन ईमेल्स में कई और लोगों को ‘राक्षस’ बताया गया था। तावड़े की तरफ से बाकी कार्यकर्ताओं को भेजी गई ईमेल से पता चलता है कि दाभोलकर को मारने की उनकी योजना कितनी चाक-चौबंद थी। उनकी हत्या के कई महीने पहले सनातन के कार्यकर्ताओं ने दाभोलकर के रूटीन पर करीबी निगरानी रखी थी।

ईमेल से पता चलता है कि किस तरह से तावड़े ने बाकी सदस्यों के साथ मिलकर दाभोलकर के आने-जाने के बारे में रोजाना जानकारी साझा की थी। मसलन कब वह टहलने जाते थे, कब वह लौटते थे आदि। उनकी नजर पानसरे और कलबुर्गी की गतिविधियों पर भी थी। सीबीआई को आशंका है कि दाभोलकर और पनसारे के अलावा कलबुर्गी की हत्या में भी इसी ग्रुप का हाथ है। सीबीआई के जांच अधिकारी अब गोवा, महाराष्ट्र और कर्नाटक पुलिस के साथ मिलकर जांच कर रहे हैं और इन राज्यों की पुलिस से अहम जानकारी भी हाथ लगी है। ईमेल से यह भी पता चला है कि सनातन संस्था के कार्यकर्ता ऐसे लोगों की सेना बनाना चाहते हैं, जिन्हें अपनी आस्था की रक्षा के लिए हथियारों की ट्रेनिंग दी जा सके।

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