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DU के प्रोफेसर बोले- रामचरितमानस लिखते समय मस्जिद में रहे थे तुलसीदास

JLF में रामचरितमानस पर चर्चा के दौरान बाएं में अशोक वाजपेयी, बीच प्रोफेसर फिलिप लुटगेनडॉर्फ, दाएं हरीश त्रिवेदी
JLF में रामचरितमानस पर चर्चा के दौरान बाएं में अशोक वाजपेयी, बीच प्रोफेसर फिलिप लुटगेनडॉर्फ, दाएं हरीश त्रिवेदी

नई दिल्ली। दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हरीश त्रिवेदी ने रामचरित मानस और तुलसीदास को लेकर एक विवादास्पद बयान दिया है। जयपुर लिट्रेचर फेस्टिवल(JLF) में बोलते हुए त्रिवेदी ने कहा कि रामचरितमानस लिखते समय तुलसीदास ने एक मस्जिद में शरण मांगी थी। त्रिवेदी का कहना है वह मस्जिद बाबरी मस्जिद हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि रामचरितमानस पर मुगलों का इफेक्टर भी दिखाई देता है।

मुगल टेंट के नीचे लिखा था रामचरित मानस
– शनिवार को JLF में रामचरित मानस पर चर्चा की हुई। चर्चा ‘मुगल टेंट’ में की गई।
– इस दौरान त्रिवेदी ने कहा कि अकबर के शासन के दौरान तुलसीदास ने भी रामचरित मानस एक मुगल शामियाने के नीचे ही लिखा था।
– त्रिवेदी ने कहा कि राम केवल कुछ लोगों के नहीं हैं। उन्होंने कहा कि 1992 में जो बाबरी मस्जिद ढहाई गई वह राम की गलती नहीं थी। इसके पीछे कोई जिम्मेदार था।
– संस्कृति को राजनीति से अलग रखा जाए। त्रिवेदी ने कहा कि मानस के कल्चरल और पॉलिटिकल साइड को अलग-अलग देखे जाने की जरूरत है।
रामचरितमानस: द लाइफ ऑफ ए टेक्स्ट पर हो रही थी डिबेट
-त्रिवेदी ने ये बयान जाने-माने कवि अशोक वाजपेयी और लोवा यूनिवर्सिटी के हिंदी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर लुटगेनडॉर्फ से बातचीत के दौरान दिया।
-फिलिप लुटगेनडॉर्फ ने रामचरितमानस का अंग्रेजी में ट्रांसलेशन किया है।
– लुटगेनडॉर्फ लोवा यूनिवर्सिटी में हिंदी और मॉर्डन इंडियन स्टडीज डिपार्मेंट में प्रोफेसर हैं।
– कवि अशोक वाजपेयी ने कहा रामचरितमानस मुगलों के समय में ही लिखा गया था।
– त्रिवेदी ने कहा कि रामचरितमानस पर मुगल साम्राज्य का इफेक्ट भी दिखाई देता है।
त्रिवेदी के बयान पर ट्विटर पर छिड़ी बहस
– शनिवार को दिए गए त्रिवेदी की इस बयान के बारे में राइटर रश्मि बंसल ने जानकारी दी।
– इसके बाद त्रिवेदी के बयान को लेकर ट्विटर पर बहस छिड़ गई।
करण ने कहा था फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेसन और डेमोक्रेसी मजाक बन गया है
– 22 जनवरी बुधवार को JLF में बॉलिबुड प्रोड्यूसर-डायरेक्टर करण जौहर ने फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन को लेकर कहा- हम ऐसे देश में रह रहे हैं जहां अपनी निजी जिंदगी पर बोलना भी काफी मुश्किल है।
– उन्होंने कहा कि फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन सबसे बड़ा मजाक बन गई है। इसी तरह दूसरा सबसे बड़ा मजाक डेमोक्रेसी है। करण जौहर ने सवाल किया कि जब बोलने की आजादी नहीं है तो हम लोकतांत्रिक कैसे हुए।
– उन्होंने यह बयान अपनी किताब एन अनसूटेबल ब्वॉय पर हो रही चर्चा के दौरान दिया था।
– करण ने कहा में फिल्म मेकर हूं लेकिन हर लेबल पर बंधा हुआ महसूस करता हूं। जहां भी जाता हूं डरा हुआ महसूस करता हूं।
– बीजेपी ने करण के बयान को प्रोपेगैंडा बताया था।
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