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छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों की हो सकती है तिमाही समीक्षा

ppfनई दिल्ली। सरकार छोटी बचत योजनाओं के मामले में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है। पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (पीपीएफ), नैशनल सेविंग्स स्कीम (एनएससी) और किसान विकास पत्र पर मिलने वाली ब्याज दरों में तिमाही बदलाव हो सकता है। बाजार में होने वाले बदलावों को ध्यान में रखकर सरकार ऐसा करना चाह रही है।
छोटी बचत योजनाओं पर मिलने वाली ज्यादा ब्याज दरें बैंकों की ब्याज दर घटाने की प्रक्रिया में सबसे बड़ी बाधा मानी जाती है। इन बचत योजनाओं की ब्याज दरें ज्यादा हैं इसलिए बैंकों को भी डिपॉजिट पर ज्यादा ब्याज देने को मजबूर होना पड़ रहा है। इस वजह से लेंडिंग रेट नीचे नहीं आ पा रहे हैं।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘नए कानून के तहत ब्याज दरों में पहला बदलाव 1 अप्रैल से लागू हो सकता है। जल्द ही इसके लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया जाएगा।’ साथ ही उन्होंने कहा कि सिनियर सिटिजन और लड़कियों के लिए चल रहीं स्कीमों की दरों में बदलाव नहीं किया जाएगा।

इस तरह की बचत योजनाओं के लिए 1 अप्रैल 2015 को ब्याज दरों में आखिरी बार बदलाव किया गया था। तब से लेकर रिजर्व बैंक ने 0.75 बेसिस पॉइट की कटौती कर चुका है। इस वजह से मार्केट रेट और इन छोटी स्कीमों पर मिलने वाली ब्याज दरों में बड़ा गैप पैदा हो गया है।

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उदारहण के लिए अगर आप स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में 5 साल या फिर इससे ऊपर के लिए डिपॉजिट करवाते हैं तो आपको 7 फीसदी सालाना की दर से ब्याज मिलेगा। लेकिन, वर्तमान में पोस्ट ऑफिस की छोटी बचत योजनाओं पर 8.5 फीसदी की दर से ब्याज मिल रहा है। पीपीएफ पर 8.70 फीसदी की दर से ब्याज मिल रहा है। इस बड़े गैप की वजह से बैंकों के डिपॉजिट मोबलाइजेशन पर असर पड़ रहा है। इस वजह से बैंकों कर्ज पर भी ब्याज दर पर्याप्त नहीं घटा पा रहे हैं।

ध्यान रहे कि वित्त मंत्री अरुण जेटली के साथ प्री-बजट मीटिंग में बैंकों ने इन छोटी बचत योजनाओं पर मिलने वाली ब्याज दरों पर तिमाही समीक्षा की मांग की है।

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