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गुलबर्ग दंगे पर फैसला आज, सुरक्षा घेरे में जज, ड्रोन से नजर

gulwww.puriduniya.com अहमदाबाद। 2002 में गोधरा कांड के बाद हुए गुलबर्ग सोसायटी नरसंहार मामले में एसआईटी कोर्ट अब से कुछ देर में फैसला सुना सकता है। मामले की सुनवाई शुरू हो गई है। केस की संवेदनशीलता को देखते हुए कोर्ट से लेकर गुलबर्ग सोसायटी तक सिक्यॉरिटी के बेहद कड़े इंतजाम किए गए हैं। फैसला सुनाने वाले जज, गवाहों और सभी पार्टियों की सुरक्षा बेहद पुख्ता की गई है, वहीं गुलबर्ग सोसायटी में ड्रोन से नजर रखी जा रही है। बता दें कि गुलबर्ग नरसंहार में कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी समेत अल्पसंख्यक समुदाय के 69 लोग मारे गए थे।

सीनियर पुलिस सूत्रों ने बताया कि गुलबर्ग सोसायटी और बाकी संवेदनशील इलाकों पर करीब से नजर से रखी जा रही है ताकि किसी अप्रिय गतिविधि को अंजाम न दिया जा सके।

पुलिस कंट्रोल रूम में संवेदनशील इलाकों की लाइव स्ट्रीमिंग और तस्वीरें पहुंचाने के लिए दो मानवरहित ड्रोन्स का इंतजाम भी किया गया है। एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया,’हमने सुरक्षा के लिहाज से दो ‘नेत्रों’ की मांग की है। इसके अलावा हमने पुलिस हेडक्वार्ट्स में अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की है।’ सूत्रों की मानें तो यह पहली बार है जब किसी अपराधिक मामले पर नजर रखने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया गया है।
गांधीनगर के डीजीपी और सिटी पुलिस कमिश्नर के ऑफिस में कई बैठकें हुईं, जिनमें एसआईटी के जज पीबी देसाई के लिए सुरक्षा के इंतजामों पर चर्चा हुई।

एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि कोर्टरूम और कोर्ट परिसर की सुरक्षा की जिम्मेदारी सिटी क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है। वहीं लोकल डेप्युटी कमिश्नरों से कहा गया है कि कोर्ट के बाहर नजर रखें।

सिटी पुलिस चीफ शिवा नंद झा ने बताया कि चश्मदीदों, पीड़ितों और उनके परिवार के सदस्यों के लिए सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। आरोपियों और उनके परिवारों को भी सुरक्षा दी गई है। गुलबर्ग सोसायटी में पुलिस पूरे दिन गश्त करेगी, साथ ही लोकल पुलिस स्टेशनों के अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों को संवेदनशील इलाकों की जानकारी दे दी गई है।

इस बीच सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त की गई एसआईटी ने भी कोर्ट परिसर में पुलिस से सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम का अनुरोध किया है। गुरुवार को मामले से संबंधित ज्यादातर गवाह कोर्ट मैं मौजूद होंगे।

एक सीनियर एसआईटी अधिकारी ने कहा,’हमने कोर्ट परिसर में और कोर्टरूम में अपनी टीमों को भी सुरक्षा के लिए तैनात किया है।’

गुलबर्ग सोसाइटी केस टाइमलाइन

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28 फरवरी 2002- 20 हजार की भीड़ ने गुलबर्ग सोसाइटी पर हमला किया। 39 शव मिले, 31 लोग लापता हो गए। 11 के खिलाफ FIR दर्ज।

21 नवंबर 2003- SC ने गुजरात पुलिस पर आरोपियों को बचाने के आरोप लगने पर इस समेत 9 केसों की सुनवाई रोकी।

26 मार्च 2008- SC ने SIT गठित की, रिटायर्ड CBI डायरेक्टर आरके राघवन को इसका चीफ बनाया।

11 अगस्त 2009- SIT ने 25 और आरोपियों को अरेस्ट किया और SIT कोर्ट ने 62 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए।

मई 2010- SC ने अंतिम फैसले पर रोक लगाई।

22 सितंबर 2015- 338 गवाहों की पेशी के बाद कोर्ट ने लंबी सुनवाई पूरी की।

22 फरवरी 2016- SC ने अंतिम फैसले से रोक हटाई।

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