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दूसरे साल भी फर्स्ट डिविजन पास हुई मोदी सरकार, 62 पर्सेंट लोगों ने कामकाज को सराहा

modi (4)www.puriduniya.com नई दिल्ली। मोदी सरकार के दो साल पूरे होने के मौके पर पब्लिक की ओर से उसे एक तरह से रिटर्न गिफ्ट मिला है। 62 पर्सेंट मेट्रोपोलिटन लोगों ने मोदी सरकार के कामकाज को अच्छा या बहुत अच्छा करार दिया है। हालांकि बीते साल सरकार के कामकाज को 67 पर्सेंट लोगों ने अच्छा बताया था, इस लिहाज से मोदी सरकार की रेटिंग में 5 पर्सेंट की गिरावट आई है। वहीं, सरकार के काम को खराब और बेहद खराब बताने वालों की संख्या बीते साल 9 पर्सेंट से बढ़कर 16 पर्सेंट तक जा पहुंची है।

सर्वे में शामिल 47 पर्सेंट लोगों ने पीएम मोदी को कुछ करने की चाह रखने वाला मजबूत नेता माना है, जो अपनी टीम के साथियों की वजह से काम को पूरी रफ्तार से अंजाम नहीं दे पा रहे हैं। रेटिंग में कमी आने का यह भी एक अहम कारण हो सकता है। 51 पर्सेंट लोगों का मानना है कि 2014 के बाद से अब तक ब्रैंड मोदी की ताकत में कमी आई है। वहीं, 5 में से एक व्यक्ति ने कहा कि मोदी की छवि और मजबूत हुई है।

सरकार की ओर से चलाई गई योजनाओं की बात की जाए तो एक साल पहले की ही तरह लोगों ने इस बार भी स्वच्छ भारत योजना को सबसे ज्यादा सराहा है। 42 पर्सेंट लोगों ने स्वच्छ भारत योजना को बेहतर करार दिया है। वहीं पीएम नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी स्कीम मेक इन इंडिया 13 पर्सेंट के साथ दूसरे नंबर पर रही। सर्वे में लोगों ने नौकरियों के पर्याप्त अवसर पैदा न कर पाने को सरकार की सबसे बड़ी असफलता माना। 43 पर्सेंट लोगों ने इसे सरकार की असफलता करार दिया। इसके अलावा विपक्ष से झगड़े के मूड में रहने को भी लोगों ने सरकार की असफलता से जोड़ा है।

भ्रष्टाचार और ब्लैक मनी से निपटने के सरकार के प्रयासों पर भी लोगों की दिलचस्प राय सामने आई है। सिर्फ एक चौथाई लोगों ने माना है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार खत्म हुआ है। 40 पर्सेंट लोगों का मानना है कि पहले और अब की स्थितियों में कोई अंतर नहीं आया है। वहीं, 23 पर्सेंट का मानना है कि भ्रष्टाचार की स्थिति बीते दो सालों में और बदतर हुई है।

काले धन के माम ले में बात करें तो 40 पर्सेंट लोगों का मानना है कि सरकार ने अपने वादे को पूरा नहीं किया है। करीब एक तिहाई लोगों ने माना है कि सरकार ने इस दिशा में अच्छी शुरुआत की है। इसके अलावा 15 पर्सेंट लोगों का कहना है कि सरकार ने अपने वादे को पूरा किया है। सर्वे में शामिल दो तिहाई लोगों ने सरकार की विदेश नीति पर मुहर लगाई। वहीं 75 पर्सेंट लोगों ने पाकिस्तान को लेकर मोदी सरकार की नीति को साहसी और यथार्थवादी करार दिया। करीब 20 पर्सेंट लोगों का कहना था कि सरकार अपनी विचारधारा से भटक गई है। चाइना पॉलिसी को भी सरकार ने इसी तरह की रेटिंग दी है।

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करीब 50 पर्सेंट लोगों ने महंगाई में कमी आने का कुछ या पूरा श्रेय मोदी सरकार के कामकाज को दिया। 24 पर्सेंट लोगों ने कहा कि सरकार के प्रयासों की वजह से कीमतों में कमी आई है, 22 पर्सेंट के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय कारकों और सरकार के प्रयासों का यह नतीजा है। वहीं, 35 पर्सेंट लोगों ने कहा कि ऐसा पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय कारकों से हुआ है। वहीं 20 पर्सेंट लोगों का कहना है कि महंगाई में कोई कमी नहीं दिखाई देती है।

तीसरे साल में सरकार से हैं ये अपेक्षाएं

मोदी सरकार के तीसरे साल में लोगों को उससे रोजगार सृजन, किसानों को कर्ज से उबारने, महंगाई पर नकेल कसने और इकॉनमी को रफ्तार देने की उम्मीदें हैं। यह सर्वे ग्लोबल मार्केट रिसर्च कंपनी आईपीएसओएस की ओर से दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नै, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद में किया गया। इस पोल में 18 से 45 की आयु के कुल 1,348 लोगों को शामिल किया गया था।

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