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सामने आया सुपरटेक का फर्जीवाड़ा, रद्द हुआ यमुना एक्सप्रेस वे का प्रॉजेक्ट

SUPERwww.puriduniya.com नोएडा। नामी बिल्डर सुपरटेक एक बार फिर विवादों में है। NCR के बड़े बिल्डरों में से एक सुपरटेक का एक 100 करोड़ का प्रॉजेक्ट यमुना एक्सप्रेस वे पर टाउनशिप बसाने का चल रहा था। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) के दो CEO के आपत्ति दर्ज कराए जाने के बाद इस प्रॉजेक्ट पर रोक लगा दी है। दोनों CEO का कहना है कि बिल्डर ने एक फर्जी पत्र के माध्यम से प्लान रिवाइज करवाया। दोनों ही CEO की तरफ से सुपरटेक के खिलाफ एक FIR दर्ज कराने की भी सिफारिश की गई।

2011 में सुपरटेक के द्वारा जमा किए गए एक पत्र के बाद ग्राउंड कवरेज क्षेत्र बढ़ाने की अनुमति दी गई थी। इसके बाद बिल्डर ने तकरीबन 730 प्लॉट और विला जिनकी अनुमानित लागत 343 करोड़ है, की बिक्री की। 2015 में जब सुपरटेक की तरफ से प्रॉजेक्ट के समाप्त होने का सर्टिफिकेट लेने की प्रक्रिया शुरू हुई तो YEIDA के दो CEO संतोष यादव और अनिल गर्ग ने यह मुद्दा उठाया कि प्लान के लिए जमा किए दस्तावेज फर्जी हैं।

सुपरटेक के आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार इसके प्रॉजेक्ट सुपरटेक अपकंट्री के सभी 28 टावर, प्रत्येर टावर में 120 घर, 948 विला और प्लॉट बिक चुके हैं। इनके खरीदार पोजिशन का इंतजार कर रहे हैं। सुपरटेक को 100 एकड़ जमीन TS-1 सेक्टर 17A के पास जून 14, 2010 में आवंटित की गई थी। प्लॉट अगस्त में रजिस्टर्ड हुआ। उस वक्त YEIDA के चेयरपर्सन और CEO मोहिंदर सिंह ने बिल्डर को टाउनशिप बसाने के लिए 25 जनवरी 2011 को YEIDA के बिल्डिंग बायलॉज ऑफ सितंबर 2009 के तहत अनुमति दी थी।

YEIDA को पत्र (संख्या: 215377-3-10-01) 13 सितंबर 2011 की तारीख को मिली। जिस पर यूपी के तत्कालीन गृह सचिव आलोक कुमार के हस्ताक्षर थे। पत्र में इस बात की सिफारिश की गई थी कि सुपरटेक लिमिटेड के प्रस्तावित टाउनशिप को अतिरिक्त जमीन दी जाए क्योंकि उस जमीन पर कोई और निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है। सुपरटेक को उस क्षेत्र में निर्माण कार्य की अनुमति TS-1 पर YEIDA के 2010 से प्रभाव में नए नियमों के तहत मिलनी चाहिए।

YEIDA के CEO संतोष यादव ने 2015 में इस सबंध में पड़ताल की थी, जिसके बाद उत्तर प्रदेश के संयुक्त सचिव ने लिखित में पुष्टि करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा बिल्डर के लिए कभी इससे संबंधित पत्र जारी नहीं किया गया था। इससे स्पष्ट हो गया कि सितंबर 2011 में सुपरटेक द्वारा जमा किया गया पत्र फर्जी था। हमारे सहयोगी ने संयुक्त सचिव देवी प्रसाद से भी संपर्क किया और उन्होंने भी इस बात की पुष्टि की। प्रसाद ने कहा, ‘उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सुपरटेक बिल्डर के लिए कोई पत्र जारी नहीं किया गया था।’

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YEIDA के एक अधिकारी ने बताया, ‘सुपरटेक ने सरकार की तरफ से एक पत्र दाखिल किया था, जिसके आधार पर बिल्डर को भवन कानून 2010 के तहत अतिरिक्त जमीन मुहैया कराई गई थी। 2015 में YEIDA के तत्कालीन CEO संतोष यादव ने जानकारी दी कि सुपरटेक की तरफ से दाखिल पत्र फर्जी है। जिसके बाद प्रमाणिकता की जांच की गई और इस बात की पुष्टि हो गई कि सरकार की तरफ से इस तरह का कोई पत्र जारी नहीं किया गया था।’

अधिकारी ने यह भी बताया कि तत्कालीन CEO यादव ने उसके बाद बिल्डर को कारण बताओ नोटिस जारी किया। साथ ही भिल्डर के खिलाफ धोखाधड़ी करने के लिए एक FIR भी दर्ज कराई गई थी। अधिकारी ने बताया, ‘CEO के निर्देश के बाद से टाउनशिप के प्लान को कैंसल कर दिया गया। जहां तक FIR की बात है विभाग की कानूनी टीम उस पर नजर बनाए है।’

वहीं बिल्डर ने इसके खिलाफ YEIDA के चेयरमैन रामा रमन से अपील की है कि उनके पक्ष को सुने बिना ही टाउनशिप का प्लान रद्द कर दिया गया। YEIDA से जुड़े सूत्रों ने बताया, ‘हमने कहा कि मामला प्रदेश सरकार की तरफ से फर्जी पत्र जारी करने का है इसलिए हमने बिल्डर को सीधे सरकार से संपर्क स्थापित करने के लिए कहा हैं।

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