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पिछले 30 चुनावों में ‘अन्य’ ने जीतीं बीजेपी, कांग्रेस से ज्यादा सीटें

bjp ,CONGREwww.puriduniya.com नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी पार्टी बनने की दिशा में BJP तेजी से बढ़ रही है और कांग्रेस की जगह खुद को मजबूत दावेदार की तरह पेश कर रही है। पांच राज्यों के विधानसभा नतीजे भी इस ओर संकेत करते हैं। तस्वीर का एक दूसरा पहलू भी है। देश की दो सबसे बड़ी नैशनल पार्टियों BJP और कांग्रेस के हिस्से में विधानसभा की आधी से भी कम सीटें हैं। पिछले 30 चुनावों में अन्य ने इन दोनों पार्टियों से ज्यादा सीटें जीती हैं।

28 राज्यों की विधानसभा सीटें इस तरफ संकेत करती हैं। तेलंगाना इसमें शामिल नहीं है, क्योंकि पिछली बार जब वहां चुनाव हुए थे तो तेलंगाना प्रदेश आंध्र प्रदेश का हिस्सा ही था। साथ ही दो केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली और पुडुचेरी भी में इसमें शामिल नहीं है।


2012 से अब तक कुल 4,117 सीटों पर 30 चुनाव हुए हैं। इनमें हालिया पांच विधानसभा के चुनाव भी शामिल हैं। कांग्रेस के मुकाबले BJP के अधिक विधायक हैं और कुल 1051 सीटों पर BJP ने जीत हासिल की है। वहीं, 871 सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है। दोनों राष्ट्रीय पार्टी का कुल आंकड़ा 1,922 सीटों का है। इसका मतलब है कि आधे से भी अधिक 2195 सीटों पर क्षेत्रीय पार्टियों का कब्जा है।

सीटों का यह खेल राजनीतिक प्रभुत्व का संकेत जरूर है, लेकिन इसकी अपनी कुछ सीमाएं भी हैं। लोकतांत्रिक चुनाव प्रणाली में एक पार्टी का वोट प्रतिशत अच्छा हो सकता है, लेकिन हो सकता है उसने एक भी सीट न जीती हो। इसी तरह छोटे प्रदेश सिक्किम का एक जनप्रतिनिधि जितनी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है, वह यूपी के एक प्रतिनिधि की तुलना में बहुत कम है। इसके बाद भी दोनों प्रदेशों के विधायक की गिनती का आधार एक सीट ही माना जाएगा।

चुनावी विश्लेषण में पार्टियों की स्थिति जानने का एक तरीका एक पार्टी को कितने वोट मिले, यह भी हो सकता है। इस लिहाज से भी BJP का पलड़ा कांग्रेस की तुलना में भारी है। 30 चुनावों में BJP को 12.6 करोड़ वोट मिले, वहीं कांग्रेस को 11.8 करोड़ वोट ही मिले। यहां भी बचे हुए 33.5 करोड़ वोट दोनों नैशनल पार्टियों के कुल वोट की तुलना में काफी अधिक है। BJP और कांग्रेस को कुल 42 फीसदी वोट मिले हैं, जबकि अन्य पार्टियों को 58 फीसदी वोट मिले।

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यहां यह भी स्पष्ट है कि 58 फीसदी वोट में से कुछ हिस्सा दोनों नैशनल पार्टियों के सहयोगियों को भी मिला है। शिवसेना, अकाली दल जैसे BJP के सहयोगी और DMK, RJD जैसे कांग्रेस के सहयोगी इस 58 फीसदी वोट शेयर के हिस्सेदार हैं। बावजूद इसके, यह कहने में कोई हर्ज नहीं है कि 58 फीसदी वोट क्षेत्रीय पार्टियों के खाते में गए हैं न कि दोनों बड़ी नैशनल पार्टी को मिले।


महत्वपूर्ण बात यह है कि क्षेत्रीय पार्टियों को मिले 33.5 करोड़ मत उन सभी पार्टियों को मिले हैं, जो BJP या फिर कांग्रेस के सहयोगी नहीं हैं। इनमें BSP, SP, बीजू जनता दल (ओडिशा), AIADMK, TMC और लेफ्ट पार्टियां शामिल हैं। पांच राज्यों के हालिया विधानसभा नतीजे भी क्षेत्रीय पार्टियों का दबदबा बताने के लिए काफी है।

पांच राज्यों पर 643 सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस को 115 सीटें मिली हैं, वहीं BJP को 64 सीटें, लेकिन अन्य पार्टियों ने 465 सीटें अपने खाते में जोड़ी। इन संकेतों से साफ है कि BJP कांग्रेस से सबसे बड़ी नैशनल पार्टी होने का खिताब छीन सकती है। वोट शेयर और सीटों के लिहाज से BJP फिलहाल कांग्रेस से अधिक मजबूत है। इसके बाद भी क्षेत्रीय पार्टियों की दमदार मौजूदगी भारतीय राजनीति में अभी भी बनी हुई है।

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