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छोटी मोटी दलाली कर विल्डर बने संजय सेठ पर मुलायम मेहरबान क्यों ?

pd logलखनऊ। लखनऊ में छोटी मोटी दलाली कर बिल्डर बने संजय सेठ पर मुलायम यूँ ही मेहरबान नहीं हुए है. संजय सेठ न सिर्फ मुलायम के बेटे प्रतीक के बिजनेस पार्टनर है बल्कि हाल ही में मुलायम को इटावा में करोड़ों रुपये की कोठी बनाकर गिफ्ट की है. यही नहीं दो साल से तिहाड़ जेल में बंद सुब्रतो राय की कमी मुलायम सिंह को संजय ने लखनऊ में खलने नहीं दी. बताया जाता है कि जो काम सुब्रतो राय पार्टी के लिए किया करते थे, अब वही काम संजय सेठ पार्टी के लिए कर रहे है.
सूत्रों के मुताबिक मुलायम सिंह यादव का दिल बहुत बड़ा है. अगर कोई रत्ती भर भी उनके लिए कुछ करता है तो वह उसका अहसान कभी नहीं भूलते है. इसी का नतीजा है कि संजय सेठ ने मुलायम को अगर कोठी बनाकर गिफ्ट की तो वह भी संजय सेठ को राज्यसभा भेजने से पीछे नहीं हटे. अगर उनकी जगह कोई और होता तो वह संजय सेठ को नीम्बू की तरह निचोड़ कर किनारे कर देता. मगर मुलायम का दिल इतना बड़ा है कि उनको बुरा भला कहने वाले बेनी बाबू को भी उन्होंने अपनी पार्टी की सदस्यता दिलाकर ऐन वक्त पर उन्हें राज्यसभा भेजे जाने पर अपनी मुहर लगा दी. यही नहीं जबरदस्त विरोध के बाद अपने पुराने साथी अमर सिंह को भी उन्होंने राज्यसभा भेज दिया.
सूत्रों के मुताबिक ये वही संजय सेठ है, जो कभी LDA में प्रापर्टी की दलाली का काम किया करते थे. लेकिन उनका भाग्य उस समय जागा जब केंद्र में और उत्तर प्रदेश में बीजेपी का शासन चल रहा था. बताया जाता है कि लखनऊ में सूबे के नगर विकास मंत्री लालजी टंडन का दामन सेठ ने एक बड़े IAS अफसर के जरिये थामा. उसके बाद उसे मिनी सुब्रतो राय बनने में देर नहीं लगी. दरअसल ये वही दौर था जब नगर विकास मंत्री लालजी टंडन के एक फोन पर LDA उपाध्यक्ष किसी को भी जमीन आवंटित कर दिया करते थे. इतना ही नहीं चूँकि लखनऊ प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई का संसदीय क्षेत्र था. इसलिए अटलजी के दौर में लखनऊ के विकास के लिए अंधाधुंध पैसा केंद्र से भेजा जा रहा था.

शासन और सत्ता के गलियारे में जबरदस्त घुसपैठ रखने वाले सेठ ने इस दौर में LDA और आवास विकास परिषद कि कई बड़ी योजनाओं का काम पकड़ कर इतना अधिक माल कमाया कि लखनऊ की अधिकांश बेशकीमती प्रापर्टियों को औने-पौने दामों में खरीद लिया. इसमें कई नजूल की भी लैंड शामिल थी. बाद में जैसे ही जमीनों के दाम आसमान चढ़े और लखनऊ में जमीन का संकट पैदा हुआ. सेठ ने शालीमार ग्रुप के नाम से फ़्लैट स्कीम शुरू कर दी. आलम यह हो गया की काला काकर हाउस वाली सड़क हो या प्रयाग नारायण रोड हो. जिधर से गुजरो सिर्फ शालीमार बिल्डर की ही ग्रुप हाऊसिंग सोसायटी के फ़्लैट ही नजर आने लगे.

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यहाँ तक कि जब प्रदेश में सपा की सरकार बनी तो अखिलेश और शिवपाल तक पहुंचने का कोई रास्ता संजय सेठ को नहीं दिखा. जिसके चलते वह प्रतीक के पास एक अधिकारी के माध्यम से पंहुचा और फिर क्या था. सेठ की लाटरी निकल पड़ी. उसने धीरे- धीरे यादव परिवार ही नहीं बल्कि परिवार के मुखिया को पकड़ लिया. सूत्रों की मानें तो सेठ ने राजनीति में धन के बल पर अपनी पैठ बनाने के लिए सबसे पहले नेताजी को खुश करने के लिए उनको इटावा में एक आलीशान कोठी बनाकर देने का वादा किया. उसके बाद जब उसने अपना वादा पूरा किया तो सपा मुखिया भी पीछे नहीं हटे और उसने धीरे से पहले एमएलसी बनने की इच्छा जताई. सेठ के इच्छा जताते ही उनका नाम यूपी के राज्यपाल के पास भेजा गया.
लेकिन यूपी के बीजेपी के प्रवक्ता आईपी सिंह की शिकायत के बाद राजयपाल ने दो बार उनका नाम ख़ारिज कर दिया. जब बात राजयपाल से नहीं बनी तो सेठ को राज्यसभा भेजे जाने का मन नेताजी ने बना लिया और मंगलवार को सेठ के नाम की घोषणा भी कर दी गई. इस बाबत ‘इंडिया संवाद’ को फोन पर यूपी के बीजेपी प्रवक्ता आईपी सिंह ने बताया कि उन्होंने सेठ के काले धन की शिकायत प्रवर्तन निदेशालय ‘ईडी’ से करते हुए जाँच कराए जाने की मांग की है. बीजेपी नेता का यह भी कहना है कि वित्तमंत्री अरुण जेटली से भी वह इस संबंध में मिल चुके है. इधर ईडी  से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बीजेपी नेता की शिकायत पर लखनऊ के बिल्डर संजय सेठ की फ़ाइल खोली जा चुकी है.
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