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कांग्रेस का आरोप, मालेगांव केस में NIA का स्टैंड बदलने के पीछे PMO का हाथ

Blast16www.puriduniya.com नई दिल्ली। कांग्रेस ने मालेगांव मामले में सरकार पर अपना हमला तेज करते हुए रविवार को आरोप लगाया कि इस केस में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का ‘सीधा दखल’ रहने की लवजह से 2008 के मालेगांव बम धमाके के मामले में NIA का ‘रुख अचानक से पलटा’ है। कांग्रेस ने मांग की कि मालेगांव बम धमाके की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराई जाए।

मुख्य विपक्षी पार्टी ने यह आशंका भी जाहिर की कि समझौता एक्सप्रेस धमाके मामले का भी यही हश्र हो सकता है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा कि वह अपनी संवैधानिक शपथ का मान रखें और अपनी ‘विचारधारा’ से परे जाकर शपथ के अनुसार अपने कर्तव्यों का पालन करें। NIA ने हाल ही में दाखिल की गई चार्जशीट में मालेगांव धमाके की मुख्य आरोपियों में शुमार साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को क्लीन चिट दी है और दूसरे मुख्य आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल पीएस पुरोहित से मकोका की धाराएं हटा ली हैं।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने पत्रकारों से में कहा कि NIA का मतलब अब ‘नमो इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी’ हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि लगता है आरोप-पत्र का मकसद दिवंगत हेमंत करकरे की अगुवाई वाली महाराष्ट्र ATS की ओर से की गई ‘कुशल’ जांच को ‘नुकसान पहुंचाना और पूरी तरह खत्म कर देना’ है । कांग्रेस नेता ने मांग की कि NIA की ओर से ‘अचानक अपना रुख पलट लेने’ के कारण साध्वी प्रज्ञा सहित छह आरोपियों को मिली क्लीन चिट और बाकी आरोपियों के खिलाफ मकोका के तहत लगाए गए आरोप वापस ले लिए जाने से केस के ‘कमजोर’ हो सकता है। इसके मद्देनजर मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए।

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कांग्रेस नेता ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि वह ‘लगातार’ ऐसे लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है, जो उनकी विचारधारा का पालन करते हैं या उनसे जुड़े संगठनों से संबंध रखते हैं और आरोपों का सामना कर रहे हैं। शर्मा ने कहा, ‘इस मामले में PMO से सीधे दखल दिया जा रहा था।’ अपने आरोप को थोड़ा स्पष्ट करते हुए शर्मा ने कहा कि मालेगांव धमाके के एक आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल पीएस पुरोहित ने छह जनवरी को कथित तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल को एक पत्र लिखा था और आठ जनवरी को यह पत्र गृह मंत्रालय पहुंच गया और नौ जनवरी को गृह मंत्रालय ने इस पर ‘काम करना शुरू कर दिया।’

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘मैंने तो सरकार में फाइलें भी इतनी तेज गति से चलते नहीं देखी हैं।’ शर्मा ने कहा, ‘हमारी मांग बहुत साफ है। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में मामले की जांच कराने पर जोर देते हुए शर्मा ने कहा कि शीर्ष अदालत को मामले इससे जुड़ी जांच, इकबालिया बयानों, आरोप-पत्रों और सरकार, NIA और अटॉर्नी जनरल, NIA और गृह मंत्रालय और गृह मंत्रालय और PMO के बीच से हुए संवादों से जुड़े सभी दस्तावेज अपने पास रखने चाहिए।’ शर्मा ने दावा किया कि NIA ने मकोका के तहत लगाए गए आरोप सिर्फ इस मंशा से हटाए ताकि ATS की ओर से दर्ज किए गए सभी बयान ऐसे हो जाएं कि उन्हें सबूतों के तौर पर स्वीकार ही न किया जाए। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि NIA प्रमुख शरद कुमार को यही काम करने के लिए सेवा विस्तार दिया गया था। उन्होंने कहा, ‘वे जो कुछ भी कर रहे हैं, योजनाबद्ध तरीके से कर रहे हैं। यदि मकोका नहीं लगेगा तो जिन लोगों ने बयान दिए हैं वे इस बात से मुकर जाएंगे कि उन्होंने बयान दिए और अदालत संज्ञान नहीं लेगी और नतीजतन सभी आरोपी छूट जाएंगे।

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