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आपदा की घड़ी में म्यांमार मार के लिए देवदूत बना भारत, 20 मिलियन डॉलर की मानवीय सहायता भेजी

नई दिल्ली 28 मार्च को म्यांमार में आए भूकंप के झटको ने देशभर में तबाही मचा दी। 7.7 की तीव्रता वाले इस भूकंप में तीन हाजार से ज्यादा लोगों की जान चली गई। इस आपदा की घड़ी में भारत म्यांमार के साथ खड़ा रहा है, जिसके बाद अब भारत के अलावा क्वाड देशों ने भी म्यांमार के इस संकट की घड़ी में एकजुटता दिखाई है। साथ ही 20 मिलियन डॉलर की मानवीय सहायता भेजी है।

म्यांमार में 7.7 की तीव्रता से आए भीषण भूकंप के चलते 3000 तीन हजार से ज्यादा लोगों की जान चली गई। साथ ही उससे कही ज्यादा लोगों को विस्थापित होना पड़ा। हालांकि इस आपदा के समय में एक अच्छे पड़ोसी होने के नाते भारत ने अपना फर्ज निभाया और म्यांमार में राहत समाग्री भेजकर हरसंभव मदद की। इतना ही नहीं इस आपदा के समय क्वाड के देश भी म्यांमार और थाईलैंड के साथ खड़े दिखे। भारत और अन्य क्वाड देश, जिनमें भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान ने 28 मार्च को म्यांमार में आए भूकंप के बाद म्यांमार और थाईलैंड के लोगों के साथ अपनी एकजुटता दिखाई है। इन देशों ने इस संकट के दौरान मानवीय सहायता के रूप में 20 मिलियन डॉलर से अधिक का योगदान किया है। इसके अलावा, ये देश आसियान और अन्य भागीदारों के साथ मिलकर जीवन रक्षक सहायता प्रदान करने के लिए काम कर रहे हैं।

भारत के विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी
इस मामले में भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत, क्वाड भागीदारों के साथ म्यांमार और थाईलैंड के लोगों के साथ खड़ा है। म्यांमार के लिए हमारी द्विपक्षीय सहायता के अलावा, हम 20 मिलियन डॉलर से अधिक की मानवीय सहायता प्रदान कर रहे हैं और अन्य भागीदारों के साथ मिलकर सहायता पहुंचाने का काम कर रहे हैं।

थाईलैंड यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने दी थी ब्रीफिंग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने थाईलैंड यात्रा के दौरान म्यांमार में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भारत की मदद की स्थिति को लेकर एक विशेष ब्रीफिंग दी। इस ब्रीफिंग में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमार के वरिष्ठ जनरल से कहा कि भारत जरूरत के समय पहले प्रतिक्रियादाता के रूप में म्यांमार के साथ खड़ा है और यदि जरूरत पड़ी तो और अधिक सहायता भी भेजने के लिए तैयार है। साथ ही प्रधानमंत्री ने म्यांमार में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शीघ्र बहाली के महत्व को भी रेखांकित किया, खासकर विश्वसनीय चुनावों के माध्यम से।

भारत ने चलाया था ऑपरेशन ब्रह्मा
बता दें कि म्यांमार में 28 मार्च को 7.7 तीव्रता के भूकंप के बाद भारत ने सबसे पहले मदद की पेशकश की और म्यांमार को महत्वपूर्ण सहायता भेजी। भारत का राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) ऑपरेशन ब्रह्म के तहत म्यांमार में सक्रिय रूप से बचाव और राहत कार्य चला रहा है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने शुक्रवार को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैंकॉक में बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के दौरान म्यांमार के वरिष्ठ जनरल मिन आंग हलिंग से मुलाकात की और भूकंप से प्रभावित लोगों को भारत का समर्थन दिया।


एनडीआरएफ ने डिप्टी कमांडर ने दी जानकारी

साथ ही मामले में एनडीआरएफ के डिप्टी कमांडर कुणाल तिवारी ने बताया कि उनकी टीम में 80 कर्मी हैं और उन्हें चार विशेष रूप से प्रशिक्षित कुत्तों और उन्नत उपकरणों का समर्थन प्राप्त है, जिनकी मदद से वे मलबे में फंसे लोगों को ढूंढने और निकालने का काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब तक भारत ने म्यांमार को 625 मीट्रिक टन मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री भेजी है। यह सहायता म्यांमार में भूकंप से प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने के लिए काम आ रही है।