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मुसलमानों को सड़कों पर ईद की नमाज अदा करने की अनुमति नहीं है, मैं इसके लिए माफी मांगता हूं: सड़क पर नमाज से जुड़े गौरव गोगोई के बयान पर सीएम सरमा ने जताई शर्मिंदगी

गुवाहाटी

गोगोई ने वक्फ संशोधन विधेयक पर बहस के दौरान मुसलमानों को सड़कों पर ईद की नमाज अदा करने से कथित तौर पर रोकने के लिए सरकार की आलोचना की थी। सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि मुझे इस बात पर शर्मिंदगी महसूस हो रही है। मैं इसके लिए माफी मांगता हूं।

असम के सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने संसद में कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई के सड़क पर नमाज से जुड़े बयान को लेकर शर्मिंदगी जताई। उन्होंने सांसद का बिना नाम लिए कहा कि मुझे इस बात पर शर्मिंदगी महसूस हो रही है कि हमारे राज्य के एक सांसद ने वक्फ विधेयक पर बहस के दौरान संसद में कहा कि मुसलमानों को सड़कों पर ईद की नमाज अदा करने की अनुमति नहीं है। मैं इसके लिए माफी मांगता हूं। असम की सरकार की कैबिनेट बैठक के बाद सीएम सरमा ने कहा कि असम के लोग भी सड़कों पर नमाज अदा नहीं करना चाहते हैं। क्योंकि राज्य में खूबसूरत और अच्छी मस्जिदें हैं। सरमा ने कहा कि देश भर से लोग मुझे इस बारे में फोन कर रहे हैं। हम शर्मिंदा हैं और मैं सीएम के तौर पर देश भर के लोगों से माफी मांगता हूं।

उन्होंने कहा कि मुसलमानों की ओर से ऐसी कोई मांग नहीं की गई है कि वे सड़कों पर नमाज अदा करना चाहते हैं। कांग्रेस सांसद की टिप्पणी से यह धारणा बनी है कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में केवल एक समुदाय ने योगदान दिया। सांसद केवल एक समुदाय की भूमिका को उजागर करने की हद तक चले गए। महात्मा गांधी, गोपीनाथ बोरदोलोई, सुभाष चंद्र बोस या अन्य प्रमुख हस्तियों का कोई उल्लेख नहीं किया गया।

सीएम सरमा ने कहा कि यह केवल संसद में असम के एक विशेष सांसद का अतिवादी बयान हैं, जिसने हमें दुखी किया है और हम इसके बारे में शर्मिंदा महसूस कर रहे हैं। असम के लोग समय आने पर ऐसे लोगों को सबक सिखाएंगे। पंचायत चुनाव को लेकर सरमा ने कहा कि यह सभी चुनावों में अच्छा होगा। क्योंकि असम के लोगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बहुत भरोसा है।’

गोगोई ने वक्फ संशोधन विधेयक पर बहस के दौरान मुसलमानों को सड़कों पर ईद की नमाज अदा करने से कथित तौर पर रोकने के लिए सरकार की आलोचना की थी। उन्होंने अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए भाजपा की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाया था।

कोच राजबंशी समुदाय के खिलाफ विदेशी न्यायाधिकरणों में लंबित मामले होंगे खत्म
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि असम कैबिनेट ने कोच राजबंशी समुदाय के लोगों के खिलाफ विदेशी न्यायाधिकरणों में लंबित सभी मामलों को हटाने का फैसला किया है। वे अब ‘डी’ या संदिग्ध मतदाता का टैग नहीं रखेंगे। राज्य के विभिन्न विदेशी न्यायाधिकरणों में समुदाय के लोगों के खिलाफ 28,000 मामले लंबित हैं। कैबिनेट ने तत्काल प्रभाव से मामलों को हटाने का ऐतिहासिक फैसला किया है।

उन्होंने कहा कि सरकार का मानना है कि कोच राजबंशी राज्य का एक स्वदेशी समुदाय है और वे हमारे सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने का एक अभिन्न हिस्सा हैं। इस समुदाय के लोग गरीब हैं और पिछले कई सालों में उन्होंने काफी कुछ सहा है। कोच राजबोंगशी की असम, पश्चिम बंगाल, मेघालय और बांग्लादेश, नेपाल और भूटान के कुछ हिस्सों में अच्छी खासी मौजूदगी है और वे अनुसूचित जनजाति का दर्जा मांगते हैं।