केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में वक्फ विधेयक को चर्चा और पारित कराने के लिए रखते हुए कहा कि सरकार, संसद की संयुक्त समिति को वक्फ विधेयक पर हितधारकों, विशेषज्ञों से कई ज्ञापन और सुझाव मिले। उन्होंने कहा कि इस संसद भवन पर भी वक्फ का दावा किया जा रहा था, संप्रग सरकार ने तो काफी संपत्ति गैर-अधिसूचित करके दिल्ली वक्फ बोर्ड को दे दी। रीजीजू ने लोकसभा में विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि आपने उन मुद्दों पर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की जो वक्फ विधेयक का हिस्सा नहीं हैं।
धार्मिक संस्था में हस्तक्षेप नहीं
किरेन रिजिजू ने कहा कि संप्रग सरकार ने वक्फ कानून में बदलावों के जरिये इसे अन्य कानूनों से ऊपर कर दिया था, इसलिए नये संशोधनों की आवश्यकता पड़ी। विपक्ष के शोरगुल के बीच रीजीजू ने साफ तौर पर कहा कि सरकार किसी भी धार्मिक संस्था में हस्तक्षेप नहीं करने जा रही। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जहां नमाज पढ़ी जाती है, वहां कोई दखल नहीं। अपने संबोधन की शुरूआत में कहा कि किसी की बात कोई बुरा-गुमा ना समझेगा। ज़मीन का दर्द कभी आसमान नहीं समझेगा। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद ही नहीं, बल्कि पूरा यकीन है कि जो लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं, उनके दिल में भी बदलाव आएगा। सभी लोग सकारात्मक सोच के साथ इस बिल का समर्थन करेंगे।
संसद भवन पर भी हो गया था दावा
केद्रीय मंत्री ने कहा कि दिल्ली में 1970 से चल रहा एक मामला सीजीओ कॉम्प्लेक्स और संसद भवन सहित कई संपत्तियों से जुड़ा हुआ था। दिल्ली वक्फ बोर्ड ने इन पर वक्फ संपत्ति होने का दावा किया था। मामला अदालत में था, लेकिन उस समय यूपीए सरकार ने 123 संपत्तियों को डीनोटिफाई करके वक्फ बोर्ड को सौंप दिया था। अगर हमने आज यह संशोधन नहीं किया होता, तो हम जिस संसद भवन में बैठे हैं, उस पर भी वक्फ संपत्ति होने का दावा किया जा सकता था। अगर पीएम मोदी सरकार सत्ता में नहीं आती, तो कई संपत्तियां डीनोटिफाई हो जातीं।
यह धारा कैसे स्वीकार्य हो सकती है?
उन्होंने कहा कि 2013 में, 2014 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले, कुछ ऐसे कदम उठाए गए जो आपके मन में सवाल खड़े करेंगे। 2013 में, सिखों, हिंदुओं, पारसियों और अन्य लोगों को वक्फ बनाने की अनुमति देने के लिए अधिनियम में बदलाव किया गया। सभी जानते हैं कि वक्फ मुसलमानों के लिए अल्लाह के नाम पर वक्फ बनाने के लिए है। यह बदलाव 2013 में कांग्रेस ने किया था। कांग्रेस ने बोर्ड को खास बनाया, शिया बोर्ड में सिर्फ़ शिया। एक धारा जोड़ी गई कि वक्फ का प्रभाव हर दूसरे कानून पर हावी होगा। यह धारा कैसे स्वीकार्य हो सकती है? उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड की भूमिका मुतवल्लियों और वक्फ मामलों को संभालने वालों द्वारा वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन की निगरानी करना है। यह पूरी तरह से शासन और पर्यवेक्षण के लिए एक प्रावधान है। वक्फ बोर्ड किसी भी तरह से वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन नहीं करता है।