वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 समेत विभिन्न मुद्दों पर बिहार विधानसभा के बाहर विपक्ष ने विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेता अजीत शर्मा ने कहा कि वक्फ (संशोधन) विधेयक वापस लिया जाना चाहिए। बिहार में भ्रष्टाचार चरम पर है और सभी अधिकारियों की जांच होनी चाहिए। भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। राजद विधायक मुकेश कुमार यादव ने कहा कि वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 एक विशिष्ट व्यक्ति और समुदाय के खिलाफ एक निषेध है। सरकार वक्फ संपत्तियों को कुछ उद्योगपतियों को सौंपना चाहती है।
इससे पहले बिहार में बुधवार को वक्फ विधेयक के खिलाफ विधानसभा से लेकर सड़कों तक पर प्रदर्शन हुए। राजधानी पटना में विभिन्न राजनीतिक दलों ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) के ‘महा धरना’ के प्रति एकजुटता व्यक्त की। एआईएमपीएलबी ने विधानसभा परिसर से महज एक किलोमीटर की दूरी पर धरना दिया, जिसमें केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार से संसद में पेश वक्फ विधेयक को वापस लेने की मांग की गई और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जैसे “धर्मनिरपेक्ष” नेताओं से विवादास्पद विधेयक के लिए उनके “समर्थन” पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया गया। बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव अपने बीमार पिता और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद के साथ पटना में धरने के लिए निर्धारित स्थल गर्दनीबाग पहुंचे।
तेजस्वी ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि “उनकी रगों में लालू का खून बह रहा है”, जिन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को गिरफ्तार करवाकर अयोध्या रथयात्रा को बीच रास्ते में ही रोक दिया था। राजद नेता ने कहा कि उनकी पार्टी इस विधेयक का पुरजोर विरोध करेगी, क्योंकि यह “असंवैधानिक”, “तानाशाही प्रवृत्ति का” और “नागपुरिया”विचारधारा से प्रेरित है। तेजस्वी का इशारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की तरफ था, जिसका मुख्यालय महाराष्ट्र के नागपुर में है। नीतीश पर परोक्ष रूप से हमला करते हुए तेजस्वी ने कहा, “कुछ लोग सत्ता के लालच के कारण विधेयक का समर्थन कर रहे हैं…।