‘FIR की जरूरत है’
सीजेआई ने तत्काल सूचीबद्ध करने के लिए मामलों के मौखिक उल्लेख की प्रथा को रोक दिया है। सीजेआई ने कहा, ‘यह काफी है। याचिका पर उसी के अनुसार सुनवाई होगी।’ वकील ने कहा कि टॉप अदालत ने सराहनीय काम किया है, लेकिन एफआईआर की जरूरत है।
सीजेआई ने कहा, सार्वजनिक बयान न दें
बता दें कि नेदुम्परा और तीन अन्य ने रविवार को एक याचिका दायर कर पुलिस को मामले में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की थी।
1991 के फैसले को दी चुनौती
क्या है पूरा मामला?
कथित नकदी की बरामदगी 14 मार्च को रात करीब 11.35 बजे वर्मा के लुटियंस दिल्ली स्थित आवास में आग लगने के बाद हुई, जिसके बाद अग्निशमन अधिकारी मौके पर पहुंचे। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त इन-हाउस कमेटी के तीन सदस्यों ने आरोपों की जांच शुरू करने के लिए न्यायमूर्ति वर्मा के आवास का दौरा किया।
विवाद के मद्देनजर, टॉप अदालत के कॉलेजियम ने न्यायमूर्ति वर्मा को उनके मूल इलाहाबाद उच्च न्यायालय में वापस भेजने की सिफारिश की, जिन्हें सीजेआई के निर्देश के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने पदच्युत कर दिया था।