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बजट सत्र: कांग्रेस से निपटने की बीजेपी की पूरी तैयारी

mosowww.puriduniya.com नई दिल्ली। संसद के आज से शुरू होने वाले सत्र में कांग्रेसी सदस्यों के हंगामे की आशंका के बीच बीजेपी ने उसे चेतावनी दी है कि अगर उसने उत्तराखंड के बहाने सदन को बाधित करने का प्रयास किया तो उसे अपने इतिहास का ही बदनुमा आइना देखना पड़ सकता है। मालूम हो कि संसद के आज से शुरू हो रहे सत्र के हंगामेदार होने की संभावना है और उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने को लेकर विपक्षी दलों द्वारा सरकार को घेरने का अनुमान है। हालांकि सरकार भी इससे निपटने की पूरी तैयारी में है। मोदी सरकार ने संसद में विरोधियों से सीधी टक्कर लेने और कांग्रेस, जनता पार्टी एवं संयुक्त मोर्चा के दौर में राज्यों पर लगाए गए राष्ट्रपति शासन के उदाहरण रखने का फैसला किया है।

इशरत मामले को लेकर जवाबी हमला केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि कांग्रेस हर बार संसद सत्र में किसी न किसी बहाने हंगामा करके विकास की राह में अड़ंगा लगाती है। इस बार अगर उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने के बहाने संसद बाधित करने का प्रयास किया तो उसे खुद शर्मिंदगी उठानी पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन इसलिए लगाना पड़ा, क्योंकि वहां संवैधानिक संकट की स्थिति बन गई थी। विधायकों की खरीद-फरोख्त हो रही थी और खुद मुख्यमंत्री हरीश रावत का स्टिंग भी सामने आ गया। ऐसे में केंद्र सरकार के पास और कोई विकल्प नहीं था। इसी वजह से वहां राष्ट्रपति शासन लगाया गया, लेकिन विधानसभा को बर्खास्त नहीं किया गया। सिर्फ उसे सस्पेंड रखा गया है। यही नहीं, सरकार लोकसभा में कांग्रेस पर इशरत जहां केस में हलफनामा बदलने के मामले पर चर्चा के जरिए कांग्रेस पर जवाबी हमले की तैयारी में है। सरकार पहले ही इशरत जहां केस पर चर्चा को अजेंडे में शामिल करने की तैयारी कर चुकी है।
‘कांग्रेस के शासन में 88 बार राष्ट्रपति शासन’ नकवी ने कहा कि उत्तराखंड का मामला सुप्रीम कोर्ट के पास विचाराधीन है। कायदे से नियमों के तहत इस पर चर्चा नहीं हो सकती। अगर कोई चर्चा चाहता है तो सरकार जवाब देने के लिए तैयार है। बीजेपी नेता ने कहा कि अब कांग्रेस उत्तराखंड का मामला उठा रही है, लेकिन उसे खुद अपने गिरेबां में झांककर देखना चाहिए। देश में 100 बार राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगा है। इनमें से 88 बार कांग्रेस ने और उसमें से भी 50 बार इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए राष्ट्रपति शासन लगाया गया। ऐसे में अगर इस पर चर्चा हुई तो जाहिर है कि ये मामले भी उठेंगे। ऐसे में कांग्रेस को खुद शार्मिंदगी का सामना करना पड़ सकता है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीजेपी के खिलाफ मोर्चा बनाने की पहल पर बीजेपी नेता ने कहा कि यह हताश और निराश लोगों की कोशिश है। पहले गैर कांग्रेसवाद के नाम पर राजनीति करने वाले नीतीश अब उसी कांग्रेस की गोद में बैठे हैं। सरकार ने बजट सत्र के लिए भारी अजेंडा तय किया है जिसमें लोकसभा में 13 विधेयक और राज्यसभा में 11 विधेयक पारित कराना शामिल है। सरकार के नेताओं में इस बात को लेकर आम सहमति है कि शुरुआती कुछ दिन में जीएसटी जैसे विवादित मुद्दों को आगे बढाना संभव नहीं होगा। वामदल, जेडीयू और अन्य विपक्षी दलों के समर्थन से कांग्रेस उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने को लेकर केंद्र को घेरने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने इसे संघीय ढांचे पर हमला करार दिया है। कांग्रेस सरकारों या इसके या अन्य विपक्षी दलों के समर्थन की सरकारों के केंद्र में सत्ता में होने पर राष्ट्रपति शासन लागू करने की घटनाओं का एनडीए सरकार द्वारा हवाला देते हुए इस हमले का जवाब देने की संभावना है।
महाजन ने बुलाई सर्वदलीय बैठक गौरतलब है कि लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने संसद की सुचारु कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिए रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई। यह सत्र ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब उत्तराखंड राजनीतिक संकट को लेकर विवाद पैदा हो गया है और 10 राज्यों में सूखे जैसी स्थितियां हैं। कई विपक्षी दलों ने उत्तराखंड मुद्दे पर सत्र के पहले दिन प्रश्नकाल को निलंबित करने के लिए नोटिस दिया है और पहले हफ्ते में सूखे पर चर्चा की मांग की है।

सर्वदलीय बैठक (फोटो: PTI)

सरकार भी तैयार उत्तराखंड विवाद को लेकर सरकारी सूत्रों ने दावा किया है कि वर्ष 1951 से देश में 111 बार राष्ट्रपति शासन लागू हुआ है, जिसमें से 91 बार राष्ट्रपति शासन तब लागू हुआ है जब बीजेपी या एनडीए सत्ता में नहीं थे। सरकार के नजदीकी सूत्रों के मुताबिक, इंदिरा गांधी के 16 साल के शासनकाल के दौरान 45 बार राष्ट्रपति शासन लगाया गया। मनमोहन सिंह के 10 साल के शासनकाल के दौरान यह 10 बार लगाया गया। पीवी नरसिंह राव के 5 साल से कम के शासनकाल के दौरान 11 बार राष्ट्रपति शासन लगाया गया, जबकि नेहरू के 17 साल के शासनकाल के दौरान 7 बार राष्ट्रपति शासन लगाया गया। उम्मीद की जा रही है कि सरकार यह दलील देगी कि अटल बिहारी वाजपेयी के 6 साल के शासनकाल के दौरान सिर्फ 6 बार राष्ट्रपति शासन लगाया गया, जबकि वर्तमान पीएम नरेंद्र मोदी सरकार के पिछले दो साल के कार्यकाल के दौरान सिर्फ दो बार (अरुणाचल प्रदेश और उत्तराखंड) इसे लगाया गया।

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उत्तराखंड मुद्दे पर चर्चा चाहती है कांग्रेस ऑल पार्टी मीटिंग में ही विपक्षी कांग्रेस ने संकेत दे दिए हैं कि इस बार संसद सत्र हंगामेदार रह सकता है। उत्तराखंड को लेकर केंद्र सरकार से बेहद खफा कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने पहले ही दिन दोनों सदनों में इस मामले को उठाने की तैयारी कर ली है। जहां लोकसभा में विपक्ष ने इस मुद्दे पर कार्यस्थगत प्रस्ताव का नोटिस दे दिया है, वहीं राज्यसभा में इस मुद्दे पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ निंदा प्रस्ताव तक लाने की रणनीति पर काम तेज कर दिया है। सत्ता पक्ष के सूत्रों का कहना है कि हालांकि उसने लोकसभा और राज्यसभा में कुल मिलाकर लगभग दो दर्जन बिलों को मंजूर कराने की तैयारी की है, लेकिन विपक्ष के तेवरों से साफ है कि कम से कम पहले दो से तीन दिन तक सरकार को विपक्ष के तीखे हमलों का सामना करना पड़ सकता है।
RJD-JDU और अन्य दलों का समर्थन कांग्रेस के सीनियर नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि कांग्रेस ने उत्तराखंड के मामले को लेकर पहले ही कार्यस्थगन प्रस्ताव का नोटिस दे दिया हे। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार ने उत्तराखंड में जिस तरह से राष्ट्रपति शासन लगाया है, वह लोकतंत्र की हत्या करने के बराबर है। कांग्रेस नेताओं की तैयारी है कि इस मामले में वह सरकार को बैकफुट पर धकेले। जेडीयू और आरजेडी जैसे दल भी इस मामले में कांग्रेस के साथ हैं। माना जा रहा है कि कुछ और क्षेत्रीय पार्टियां भी इस मामले में सदन में कांग्रेस का साथ देते नजर आ सकती हैं। इसी वजह से सरकार चिंता में है। चूंकि राज्यसभा में सरकार का बहुमत नहीं है, इसलिए राज्यसभा में सरकार को ज्यादा दिक्कतें झेलनी पड़ सकती है।

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