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11 महीने में ही केजरीवाल सरकार ने विज्ञापन पर 60 करोड़ खर्च कर दिए

kejiनई दिल्ली। दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने अपने पिछले 11 महीने के कार्यकाल के दौरान विज्ञापनों पर 60 करोड़ का खर्च किया। अपनी हर योजना और उपलब्धि को सीधे जनता तक लेकर जाने की उनकी रणनीति हो या फिर किसी भी योजना के लिए जनता का समर्थन मांगने की कवायद, सरकार ने हमेशा ही विज्ञापनों का सहारा लिया।

दिल्ली सरकार के इस खर्चे में सरकार के सभी विभागों द्वारा प्रिंट, टीवी, रेडिया व आउटडोर के माध्यम से किए गए विज्ञापनों का खर्च शामिल है। हाल ही ऑड-ईवन फार्मूले के तहत किए गए प्रचार पर ही करीब 2 करोड़ लागत आई। दिल्ली सूचना व प्रचार निदेशालय ने अपने 526 करोड़ रु. के भारी-भरकम बजट से 25 करोड़ खर्च किए तो बाकी के 35 करोड़ रुपए ऐसे विज्ञापनों में लगे जो फिलहाल चल रहे हैं या खत्म हुए हैं।

आप संयोजक केजरीवाल ने एड कैंपेन्स का इस्तेमाल लोगों के साथ संपर्क स्थापित करने और पार्टी की अपनी नीति फैलाने में किया है। सरकार के कार्यकाल के पहले 11 महीनों के दौरान उनकी अलग-अलग स्कीम लगातार दिल्लीवासियों की नजरों में बनी रहीं। हितों को लेकर उनका उपराज्यपाल नजीब जंग के साथ टकराव हो या फिर केंद्र सरकार से उनका विरोध, सभी मुद्दे इन विज्ञापनों की शक्ल में लगातार लोगों के बीच पहुंचाए जाते रहे।

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आप के वित्त वर्ष खत्म होने में दो माह ही बचे हैं तो ऐसे में उम्मीद है कि सरकार अपने अगले एड उपलब्धियों पर लेकर आएगी। 14 फरवरी को आप सरकार के कामकाम का एक साल पूरा होगा। इस मौके पर पार्टी की विज्ञापनों की नई खेप आएगी। यहां विज्ञापनों की भरमार को लेकर विरोधी भाजपा और कांग्रेस ने हमेशा केजरीवाल सरकार पर अपने प्रचार और पब्लिसिटी के लिए पैसा खर्च करने का आरोप लगाया। सरकार के फस्र्ट बजट ईयर में विज्ञापन विभाग के लिए 526 करोड़ रुपए का जुगाड़ किए जाने पर विपक्षी दलों में खूब चर्चा हुई थी। कहा जाता है कि आप के विज्ञापनों की भाषा राजनैतिक होती है। वहीं दिल्ली में एक भी सीट न पा सकी कांग्रेस तो इस मुद्दे पर हाईकोर्ट पहुंच गई। कांग्रेस और भाजपा दिल्ली सरकार पर जनता के पैसे का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाती रही हैं।

सरकारी विज्ञापनों में मुख्यमंत्री केजरीवाल का फेस यूज न करने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी दिल्ली सरकार ने विज्ञापनों की भाषा केजरीवाल की छवि के इर्द-गिर्द ही बुनी। पिछले 11 महीनों के दौरान सरकार द्वारा चलाए गए 8-9 बड़े विज्ञापन अभियानों लेकर विवाद बनता रहा। वुंमस सिक्युरिटी को लेकर दिल्ली पुलिस की कथित नाकामी के एड हो या फिर 35 भ्रष्ट अधिकारियों को पकडऩे के दावे वाला विज्ञापन, विरोधी दलों व केजरी सरकार की एक-दूसरे से ठनी रही। हालांकि विरोधियों के किसी आरोप से आप पर कोई असर नहीं पड़ा है। अपने काम को सीधे लोगों के बीच पहुंचाने, अपनी उपलब्धियों या योजनाओं को लेक र लोगों में जानकारी फैलाने के लिए आप सरकार एक के बाद एक विज्ञापन श्रृंखला लेकर आती रही। ऑड-ईवन के लिए भी केजरीवाल ने रेडियो-प्रचार का सहारा लिया।

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