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डीएनए जांच में हुआ खुलासा, छात्रा से 21 लोगों के सैम्पल हुए मैच! (हजरतगंज में छात्रा से गैंगरेप व हत्याकांड का मामला)

हजरतगंज में छात्रा से गैंगरेप व हत्याकांड का मामला
pd logwww.puriduniya.com लखनऊ। हजरतगंज में सीएम आवास के सामने छात्रा से गैंगरेप व हत्या की जो घिनौनी दास्तां सामने आई है। उसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए। शायद यह देश का पहला ऐसा वाक्या होगा जिसने पुलिस प्रशासन के पैरों तले से जमीन खिसका दी हो। छात्रा कांड में जो सच सामने आया है उसकी सच्चाई बहुत ही विभत्स है। डीएनए जांच में सामने आया है कि छात्रा से 21 लोगों ने बालात्कार किया था। इतना ही नहीं उसकी मौत होने के बाद भी दरिंदे उसके शरीर को नोंच रहे थे। छात्रा के सैम्पल से 21 लोगों के सैम्पल मैच होने की आशंका के बाद पुलिस के होश उड़ गए हैं। यही वजह है कि पुलिस जांच रिपोर्ट को गोपनीय रखते हुए पड़ताल कर रही है और सदगुरु, दीपू, माइकल व नसीर के अलावा अन्य बालात्कारियों की तलाश में जुट गई है।
दो महीने से छात्रा हत्याकांड की त’ीश में जुटी पुलिस को जब फारेंसिक टीम ने जानकारी दी कि छात्रा से गैंगरेप करने में एक या दो लोग नहीं बल्कि 21 लोग थे। तो पुलिस के पसीेने छूट गए। लेकिन यह ऐसी सच्चाई थी जिसने वीवीआईपी जोन में मुस्तैद रहने वाली पुलिस के मुंह पर करारा तमाचा है। क्योंकि पांच दिनों तक छात्रा सीएम आवास के सामने जंगल में पड़ी रही और दरिंदे उसे नोंचते रहे। पुलिस सूत्रों का कहना है कि घटना में अब तक दो रिक्शा चालक सदगुरु और दीपू के अलावा गोल्फ क्लब के कैडी माइकल व नसीर पर ही छात्रा से गैंगरेप व हत्या का अरोप था। पुलिस ने इन सभी चारों को गिर तार कर जेल भी भेज दिया है। लेकिन घटना का खुलासा पुलिस ने नहीं किया। यहां तक कि पुलिस ने सदगुरु और दीपू का नाकरे टेस्ट कराने के बाद माइकल व नसीर का नाकरे टेस्ट नहीं करा सकी। इसकी सबसे बड़ी वजह थी कि फारेंसिक से मिली डीएनए रिपोर्ट थी। जिसने पुलिस के पैरों तले से जमीन खिसका कर रख दी थी। फिलहाल पुलिस इस मसले में कुछ भी बोलने से बच रही है। यहां तक कि उसने डीएनए रिपोर्ट को भी गोपनीय रखा है। पुलिस के कई अधिकारियों से बता की गई तो नाम न छापने की शर्त उन्होंने पूरा मामला स्पष्ट किया लेकिन उन्होंने नाम न लिखने की बात कहीं।
गौरतलब हो कि गत 15 फरवरी को हजरतगंज थाना क्षेत्र स्थित सीएम आवास के सामने जंगल में जानकीपुरम में रहने वाली 12वीं की छात्रा की लाश मिली थी। पहले पुलिस इसे आत्महत्या बता रही थी। लेकिन जब पोस्टमार्टम हुआ तो उसके साथ गैंगरेप की बात सामने आई। यहां तक रिपोर्ट में इस बात की भी पुष्टि हुई थी कि छात्रा की मौत के बाद भी उसके साथ बालात्कार किया गया था। इस मामले में पुलिस ने घटना स्थल के करीब ही झोपड़ी बनाकर रहने वाले रिक्शा चालक हैदरगढ़ निवासी सदगुरु और दीपू को गिर तार किया था। पुलिस का दावा था कि सदगुरु के घर छात्रा का मोबाइल फोन व कपड़े बरामद हुए थे। बाद में पूदछात होने पर सदगुरु और दीपू ने घटना में माइकल व नसीर के भी शामिल होने की बात कबूल की थी। पुलिस ने इन दोनों को भी गिर तार कर जेल भेज दिया था।
बालात्कार किए जाने से ही हुई थी छात्रा की मौत
फारेंसिक की आई डीएनए रिपोर्ट और छात्रा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर यकीन करें तो यह बात साबित होती है कि छात्रा की मौत बालात्कार किए जाने से हुई थी। क्योंकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई थी कि अधिक खून बह जाने से छात्रा की जान गई है। मतलब साफ है कि 21 लोगों ने जब छात्रा के साथ हैवानियत की हदंे पार की तो उसकी जान चली गई।
हत्या की बात कबूल करा रही पुलिस
पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि वह इस बात का खुलासा करे कि छात्रा की हत्या किसने की। यही वजह थी कि पुलिस ने आरोपी सदगुरु और दीपू का नाकरे, पॉलिग्राफ टेस्ट तक करा डाला। लेकिन दोनांें ने ही हत्या किए जाने की बात कबूल नहीं की। जबकि उन्होंने बालात्कार की बात स्वीकार की थी। ऐसे में पुलिस इस मुश्किल में है कि यह कैसे साबित किया जाए कि आरोपियों से हत्या का जुर्म किस तरह से कबूल कराया जाए।
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