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तंजील अहमद के हमलावरों का लिंक बिजनौर ब्लास्ट के आरोपियों से?

tanjeelलखनऊ। बिजनौर के श्योहरा में शहीद हुए एनआईए के डिप्टी एसपी तंजील अहमद का आतंकियों के अलावा कोई दुश्मन नहीं था। घरवालों के बयान, वारदात के बाद हुई पड़ताल में उनकी कोई निजी रंजिश सामने नहीं आई है। घरवालों ने भी उनकी हत्या के लिए जो एफआईआर दर्ज कराई है उसमें किसी को नामजद नहीं किया।

जिस तरह से उनकी हत्या के बाद देश और प्रदेश की खुफिया व जांच एजेंसियों ने बिजनौर में डेरा डाला है उससे वारदात में आतंकियों का हाथ होने से इनकार नहीं किया जा सकता क्योंकि बिजनौर ब्लास्ट की पड़ताल समेत कई ऐसे महत्वपूर्ण आपरेशन हैं जिनमें तंजील ने अहम भूमिका निभाई थी। एजेंसियां इसी दिशा में पड़ताल कर रही हैं।

हमलावरों ने जिस इत्मिनान से तंजील पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं, उससे जाहिर है कि वे पूरी तैयारी और प्लानिंग से आए थे। एजेंसियों का मानना है कि तंजील की कई दिनों से रेकी की जा रही थी। हत्या के बाद एनआईए और यूपी एटीएस ने बिजनौर ब्लास्ट में शामिल रहे आतंकियों के करीबियों, मददगारों का ब्योरा जुटाना शुरू कर दिया है। जानकारों का कहना है कि बिजनौर ब्लास्ट के 17 फरवरी को ओडिशा से गिरफ्तार वॉन्टेड का हाथ इस हत्या के पीछे हो सकता है।

इस गैंग से जुड़े लोगों ने तेलंगाना, बिहार, एमपी और ओडिशा में भी ऐसी वारदातें की हैं। एजेंसियां मध्यप्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा से गिरफ्तार सिमी आतंकियों शेख महबूब, अमजद खान, सादिक और मोहम्मद सालिक से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारियां जुटा रही हैं।

इसके अलावा 12 सितंबर 2014 को बिजनौर के मोहल्ला जाटान में हुए विस्फोट के बाद कथित सिमी आतंकियों के भागने में मदद करने वाले हुस्ना, अब्दुल्ला, रईस अहमद, नदीम और फुरकान के करीबियों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। एजेंसियों को शक है कि इन लोगों के जेल भेजे जाने का बदला लेने के लिए तंजील पर हमला कराया गया हो।

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दरअसल तंजील बिजनौर के ही सहसपुर के रहने वाले थे। उन्होंने बिजनौर ब्लास्ट के बाद मददगारों को पकड़वाने और मामले की विवेचना में अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि एनआईए और एटीएस के अधिकारी तंजील के बिजनौर ब्लास्ट की जांच से जुड़े होने से इनकार कर रहे हैं।

लखनऊ जेल में बंद संदिग्धों से पूछताछ!

बिजनौर ब्लास्ट के आरोपियों की मदद करने में गिरफ्तार हुए हुस्ना, अब्दुल्ला, रईस अहमद, नदीम और फुरकान फिलहाल लखनऊ जिला जेल में बंद हैं। एनआईए और एटीएस की टीमें जल्द ही इनसे पूछताछ करेंगी। एडीओ एलओ दलजीत सिंह चौधरी ने कहा, ‘एटीएस व एनआईए की मदद से बिजनौर पुलिस मामले की जांच कर रही है। डिप्टी एसपी के शरीर पर गोलियों के 16 घाव मिले हैं। इनमें से 12 गोलियों की एंट्री के और चार घाव एग्जिट के हैं। अभी तक किसी रंजिश की बात सामने नहीं आई है।’

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