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चार साल : पीएम मोदी का जादू बरकरार, पर चुनौतियां भी बरकरार

राजेश श्रीवास्तव

शुक्रवार को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी अपनी सरकार के चार साल पूरे होने पर सरकार की उपलब्धियां गिनवा रहे थ्ो। तब उनके पास गिनवाने के लिए योजनाओं की लंबी-चौड़ी सूची जरूर थी। पर शायद वह यह भूल गये थे  कि उन योजनाओं में से किसी का बहुत भला नहीं हुआ है। इन चार सालों की उपलब्धियां कहीं जाएं तो सिर्फ इतनी हैं कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपना जादू बरकार रखा है। उनकी वाकपटुता, उनकी शैली, उनका आचरण और उनका जलवा सभी अभी तक कायम है। उनकी श्ौली ने उनके विरोधियों को भी इसका कायल कर रखा है।

विरोधी भी मानते हैं कि उनमें बोलने की वह शैली है कि वह झूठ भी बोलते हैं तो इतने भरोसे से कि सच लगने लगता है। शायद इसी श्ौली के चलते प्रधानमंत्री पद के लिए अब तक किसी भी नाम पर जनता ने सोचना भी शुरू नहीं किया है। पूरी भारतीय जनता पार्टी के पास सिर्फ और सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाकपटुता के अलावा कुछ भी नहीं है जिससे जनता को बहुत भला होता दिखेंगे । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चार साल के कार्यकाल में ऐसा कुछ खास नहीं हुआ जिससे आम आदमी के जीवन का स्तर कुछ बढ़ा हो। उद्योगपतियों ने राहत की सांस ली हो। या फिर कोई भी सेक्टर प्रगति के पथ पर चढ़ कर इतरा रहा हो। नरेंद्र मोदी सरकार के चार साल का कार्यकाल केवल लोगों की पेशानी पर बल डालता रहा। लोगों ने लोकतंत्र का वह रूप देखा जिसकी उन्होंने आदर्शवादी नरेंद्र मोदी से कभी कल्पना नहीं की थी।

गोवा, मेघालय, मिजोरम, बिहार, कर्नाटक में जो कुछ भी हुआ वह आम आदमी की भाजपा के प्रति सोच बदलने के लिए पर्याप्त था। अब आदमी यानि भाजपा का जमीनी कार्यकताã भी यह कहने लगा है कि अब उसकी पार्टी भी उस शुचिता और अनुशासन वाली पार्टी नहीं रही जिस पर उसे गर्व होता था। कर्नाटक में तो जो कुछ भी हुआ वह सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के बल पर रुक सका। राजनीति का स्तर गिरना भी गनीमत रहती। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह अपने भाषणों में झूठे तथ्यों को रखा, वह भी बेहद दिलचस्प रहा। उसने भी प्रधानमंत्री के प्रशंसकों पर बिजली बनकर गिरा।

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क्योंकि आज गूगल का युग है जहां आप कुछ भी छिपा नहीं सकते। हर जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध है इसलिए झूठ बहुत लंबे समय तक नहीं टिक सकता। फिर भी प्रधानमंत्री ने दसियों बार झूठ बोला। पिछले चार साल में मोदी सरकार बेरोजगारी खत्म करने के मुद्दे पर कुछ खास नहीं कर पायी है। चुनाव में भाजपा ने करोड़ों रोजगार के अवसर पैदा करने का वादा किया था। लेकिन इसमें वह पूरी तरह फ्लाप साबित हुई है। नोटबंदी और जीएसटी के बाद से अर्थव्यवस्था सुस्त है। विशेषज्ञों का दावा है कि छह महीने में इसकी हालत में सुधार नहीं आया, तो बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो जायेगा।

आंकड़ों में भले ही महंगाई पहले की अपेक्षा कम हुई है, लेकिन मध्यम वर्ग के लिए अब भी यह बड़ी चिता है। महंगाई पर काबू पाना मोदी सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। लेकिन इन सबके बावजूद दिलचस्प यह है कि बड़े राज्य जैसे यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब, ओड़िशा और गुजरात में सेंटर फॉर एम्पावरमेंट स्टडीज द्बारा किये गये सर्वेक्षणों पर नजर डालें, तो पता चलता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता अब भी बनी हुई है। इन राज्यों में लोकसभा की कुल 22० सीटें हैं। इससे साफ है कि 2०19 में सरकार किसी की भी बने पर प्रधानमंत्री मोदी का जलवा बरकरार है और अभी इस स्तर के आसपास भी कोई शख्स पहुंचता नहीं दिख रहा है।

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