Tuesday , March 2 2021
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जोड़ो के दर्द से आराम दिलाता है सरसों का तेल

पानी पीना सभी को पसंद होता है ओर पानी पीने को सेहत के लिए अच्छा भी बताया जाता है, लेकिन पानी पीने का भी अपना एक तरीका होता है जो आज हम आपको बताने जा रहे हैं. जी दरअसल में पानी पीने का एक ही तरीका होता है जो है बैठकर. जी हाँ, पानी कभी भी खड़े होकर नहीं पीना चाहिए क्योंकि इससे बहुत सारे नुकसान होते हैं जो आज हम आपको बताने जा रहें हैं.Image result for सरसों का तेल

गुर्दे की बिमारी होना – अगर आप खड़े होकर पानी पीते है तो पानी पूरी तरह से गुर्दे से छनकर शरीर में सही तरह से नहीं जाता है. इस वजह से गुर्दे की बिमारी होना लाजमी है.

पेट की बिमारी – अगर आप खड़े होकर पानी पीते है तो आपको पेट की बिमारी भी हो सकती है. खड़े होकर पानी पीने से पानी तेज धारा के बहाव के साथ पेट के अंदरूनी दीवार और आस-पास के अंगो तक जाता है जिससे पेट को नुक्सान होता है.

गठिया की समस्या – खड़े होकर पानी पीने से जोड़ो में मौजूद तरल पदार्थो का संतुलन खराब हो जाता है जिससे गठिया की समस्या हो सकती है.

प्यास नहीं बुझती – खड़े होकर पानी पीने से प्यास भीपानी पीना सभी को पसंद होता है ओर पानी पीने को सेहत के लिए अच्छा भी बताया जाता है, लेकिन पानी पीने का भी अपना एक तरीका होता है जो आज हम आपको बताने जा रहे हैं. जी दरअसल में पानी पीने का एक ही तरीका होता है जो है बैठकर. जी हाँ, पानी कभी भी खड़े होकर नहीं पीना चाहिए क्योंकि इससे बहुत सारे नुकसान होते हैं जो आज हम आपको बताने जा रहें हैं.

गुर्दे की बिमारी होना – अगर आप खड़े होकर पानी पीते है तो पानी पूरी तरह से गुर्दे से छनकर शरीर में सही तरह से नहीं जाता है. इस वजह से गुर्दे की बिमारी होना लाजमी है.

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पेट की बिमारी – अगर आप खड़े होकर पानी पीते है तो आपको पेट की बिमारी भी हो सकती है. खड़े होकर पानी पीने से पानी तेज धारा के बहाव के साथ पेट के अंदरूनी दीवार और आस-पास के अंगो तक जाता है जिससे पेट को नुक्सान होता है.

गठिया की समस्या – खड़े होकर पानी पीने से जोड़ो में मौजूद तरल पदार्थो का संतुलन खराब हो जाता है जिससे गठिया की समस्या हो सकती है.

प्यास नहीं बुझती – खड़े होकर पानी पीने से प्यास भी नहीं बुझती है और इसे आयुर्वेद में भी गलत कहा गया है. आयुर्वेद के अनुसार पानी ऐसे पियो के जैसे खा रहे हो और खाना ऐसे खाओ के जैसे पी रहे हो अर्थात खाने को मुंह में इतना चबाओ के उसका पानी बन जाए.

नहीं बुझती है और इसे आयुर्वेद में भी गलत कहा गया है. आयुर्वेद के अनुसार पानी ऐसे पियो के जैसे खा रहे हो और खाना ऐसे खाओ के जैसे पी रहे हो अर्थात खाने को मुंह में इतना चबाओ के उसका पानी बन जाए.

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